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Gold or silver-which offers greater profit potential? सोना-चांदी दोनों ने पिछले सप्ताह बढ़त दर्ज की, लेकिन अब तेजी के बाद मुनाफावसूली का खतरा भी है. 17 अगस्त से फेड मिनट्स, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और वेस्ट एशिया तनाव कीमतों की दिशा तय करेंगे. अगले 5 दिन Gold-Silver में Buy, Hold या Wait क्या करें?
Gold or Silver: which offers greater profit potential? सोना और चांदी दोनों की कीमतों में पिछले सप्ताह तेजी रही, लेकिन 17 अगस्त से शुरू होने वाला सप्ताह निवेशकों के लिए पहले से ज्यादा अहम है. सवाल सिर्फ यह नहीं है कि दोनों धातुओं में तेजी जारी रहेगी या नहीं, बल्कि यह है कि मौजूदा स्तर पर नया पैसा गोल्ड में लगाया जाए या सिल्वर में. चलिए सराफा बाजार की तेजी और उतार-चढ़ाव के आंकड़े के बीच कमोडिटी एंड शेयर मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय से अगले पांच दिन कहां पैसा बन सकता उसकी संभावना तलाशें.
पीटीआई के मुताबिक 16 अगस्त को बाजार विशेषज्ञों ने अगले सप्ताह गोल्ड और सिल्वर के लिए सकारात्मक रुख बरकरार रहने की उम्मीद जताई है, हालांकि कीमतों में उतार-चढ़ाव ज्यादा रह सकता है. जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर के अनुसार गोल्ड और सिल्वर क्रमशः 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और 2.54 लाख रुपये प्रति किलोग्राम की तरफ बढ़ सकते हैं. यानी तेजी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, लेकिन सीधे तेजी का पीछा करना भी जोखिम से खाली नहीं है.
एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी वाला गोल्ड पिछले सप्ताह 2,686 रुपये यानी करीब 2 फीसदी चढ़कर 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. इसी दौरान एमसीएक्स सिल्वर सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 4,458 रुपये यानी करीब 1.9 फीसदी बढ़कर 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पहुंचा.
एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने बताया कि एमसीएक्स गोल्ड ने इस सप्ताह करीब 1 फीसदी बढ़त दर्ज की, जबकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली आने से पहले तेजी 2 फीसदी से ज्यादा रही. उनके मुताबिक अगस्त में एमसीएक्स गोल्ड करीब 9.5 फीसदी चढ़ चुका है. इसका मतलब यह है कि आगे कुछ समय के लिए कंसॉलिडेशन और बीच-बीच में प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिल सकती है.
मिराए एसेट शेयरखान के प्रवीण सिंह के मुताबिक गोल्ड में तेज उछाल के बाद कुछ समय कंसॉलिडेशन हो सकता है. उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड का अगला अहम रेजिस्टेंस 4,500 डॉलर है, जबकि सपोर्ट 4,300 डॉलर और उसके बाद 4,200 से 4,220 डॉलर के बीच है. निवेशक के लिए इसका सीधा मतलब है कि अगर गोल्ड तेजी में भागता है तो एकमुश्त खरीदारी करने के बजाय गिरावट में खरीदारी की रणनीति ज्यादा संतुलित रह सकती है.
सिल्वर ने पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड से तेज प्रदर्शन किया. मिराए एसेट शेयरखान के मुताबिक स्पॉट सिल्वर 11 अगस्त को 66.79 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था, जो 22 जून के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था. इसके बाद अमेरिकी सीपीआई आंकड़ों के अनुमान के अनुरूप रहने पर मुनाफावसूली देखने को मिली. 13 अगस्त की रात स्पॉट सिल्वर करीब 64.73 डॉलर प्रति औंस पर था.
सिल्वर को लेकर प्रवीण सिंह का अनुमान है कि इसमें तेजी का रुख बना रह सकता है और यह 68 डॉलर के स्तर की तरफ बढ़ सकता है. लेकिन इतनी तेज चढ़ाई के बाद कंसॉलिडेशन की संभावना भी है.
घरेलू बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो 10 से 16 अगस्त के बीच सिल्वर 2.45 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर सप्ताह के दौरान 2.55 लाख रुपये तक पहुंची और फिर करीब 2.50 लाख रुपये पर आ गई. यानी एक ही सप्ताह में कीमत ने करीब 5,000 रुपये की बढ़त दर्ज की, लेकिन बीच में उतार-चढ़ाव भी काफी रहा. यही सिल्वर की सबसे बड़ी खासियत और जोखिम दोनों है. तेजी में यह गोल्ड से ज्यादा रिटर्न दे सकती है, लेकिन गिरावट आने पर झटका भी ज्यादा तेज हो सकता है.
अगले पांच दिनों में कीमतों को सिर्फ घरेलू मांग नहीं चलाएगी. अमेरिका की मौद्रिक नीति, डॉलर, ब्याज दरों की उम्मीद और वेस्ट एशिया की स्थिति सबसे अहम संकेत रहेंगे.
फेडरल रिजर्व की 29 जुलाई की एफओएमसी बैठक के मिनट्स 19 अगस्त को जारी होने हैं. मिराए एसेट शेयरखान के अनुसार सितंबर की एफओएमसी बैठक में फेड के रेट हाइक की संभावना एक महीने पहले के 75 फीसदी से घटकर 35 फीसदी हो गई है. साल के अंत तक रेट हाइक की संभावना भी 90 फीसदी से घटकर 70 फीसदी हुई है.
इसके अलावा 18 अगस्त को अमेरिका के रिटेल और आर्थिक आंकड़ों से जुड़े कई आंकड़े आएंगे और 20 अगस्त को कुछ और प्रमुख आंकड़े जारी होने हैं. चीन के जुलाई के प्रॉपर्टी डेटा, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और रिटेल सेल्स भी 17 अगस्त को बाजार के सामने होंगे.
इन आंकड़ों का असर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कमजोर आर्थिक संकेत और ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद गोल्ड को सपोर्ट कर सकती है. दूसरी तरफ मजबूत आंकड़े फेड के सख्त रुख की संभावना बढ़ा सकते हैं, जिससे बुलियन पर दबाव बन सकता है.
गोल्ड की कीमत के लिए एक और बड़ा फैक्टर वेस्ट एशिया की स्थिति है. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यूएस-ईरान तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अनिश्चितता अभी बनी हुई है. प्रणव मेर के अनुसार सुरक्षित निवेश की मांग ने गोल्ड को सपोर्ट किया है और फिलहाल इस संघर्ष का कोई साफ समाधान नजर नहीं आ रहा.
जतिन त्रिवेदी के अनुसार अमेरिकी डॉलर, इंटरेस्ट-रेट एक्सपेक्टेशंस और भू-राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले समय में बुलियन कीमतों के प्रमुख ड्राइवर्स रहेंगे.
आम खरीदार के लिए इसका मतलब यह है कि शादी, गहने या किसी जरूरी खरीदारी के लिए गोल्ड लेना है तो केवल इस उम्मीद में पूरी खरीदारी रोकना भी सही नहीं कि भाव निश्चित रूप से नीचे आएगा. वहीं निवेश के लिए खरीदारी कर रहे हैं तो पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय हिस्सों में खरीदना जोखिम कम कर सकता है.
देव कहते हैं कि अगर आपका लक्ष्य अपेक्षाकृत स्थिर और सुरक्षित प्रेशियस मेटल एक्सपोजर लेना है तो गोल्ड फिलहाल ज्यादा संतुलित विकल्प नजर आता है. इसकी वजह यह है कि गोल्ड को सेफ-हेवन डिमांड, ईटीएफ इनफ्लोज और नरम होती फेड रेट-हाइक उम्मीदों से सपोर्ट मिल रहा है. मिराए एसेट शेयरखान के मुताबिक वैश्विक गोल्ड ईटीएफ होल्डिंग्स में भी सुधार हुआ है.
अगर आप ज्यादा वोलैटिलिटी सह सकते हैं और तेजी का फायदा उठाने की कोशिश करना चाहते हैं तो सिल्वर में अपसाइड की संभावना आकर्षक है. प्रवीण सिंह ने सिल्वर के लिए 68 डॉलर का स्तर बताया है, लेकिन हाल की तेज तेजी को देखते हुए इसमें कंसॉलिडेशन का खतरा भी मौजूद है.
इसलिए अगले पांच दिनों का फॉर्मूला सीधा रखा जा सकता है. गोल्ड में बाय ऑन डिप्स और सिल्वर में स्टैगर्ड बाइंग ज्यादा व्यावहारिक रणनीति हो सकती है. बहुत तेज उछाल के दिन पूरी रकम लगाने से बचना बेहतर होगा. सबसे अहम बात यह है कि पिछले सप्ताह की तेजी देखकर एफओएमओ में खरीदारी न करें. बाजार में तेजी का मतलब यह नहीं कि हर अगले दिन कीमत ऊपर ही जाएगी.
गोल्ड के मामले में 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर बाजार के लिए महत्वपूर्ण अपसाइड जोन बन सकता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4,500 डॉलर रेजिस्टेंस है. दूसरी तरफ 4,300 डॉलर और फिर 4,200 से 4,220 डॉलर सपोर्ट जोन हैं.
सिल्वर में घरेलू बाजार का 2.54 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर महत्वपूर्ण रहेगा. अंतरराष्ट्रीय बाजार में 65 डॉलर के आसपास का क्षेत्र भी अहम है और मिराए एसेट शेयरखान ने 68 डॉलर का अगला लक्ष्य बताया है.
यानी अगले पांच दिनों में सिर्फ भाव नहीं, बल्कि भाव के साथ आने वाले ट्रिगर देखना ज्यादा जरूरी है. फेड मिनट्स नरम संकेत देते हैं, डॉलर कमजोर रहता है और वेस्ट एशिया तनाव बढ़ता है तो गोल्ड और सिल्वर दोनों को सहारा मिल सकता है. इसके उलट मजबूत अमेरिकी आंकड़े और ब्याज दरों को लेकर सख्त संकेत तेजी पर ब्रेक लगा सकते हैं.
17 अगस्त से गोल्ड और सिल्वर दोनों में तेजी की गुंजाइश बनी हुई है, लेकिन पिछले सप्ताह की बढ़त के बाद जोखिम भी बढ़ा है. गोल्ड में एमसीएक्स पर करीब 9.5 फीसदी की अगस्त तेजी के बाद कंसॉलिडेशन की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
ऐसे में गोल्ड उन निवेशकों के लिए बेहतर दिखता है जो जोखिम को थोड़ा नियंत्रित रखना चाहते हैं, जबकि सिल्वर ज्यादा जोखिम लेकर ज्यादा अपसाइड तलाशने वालों के लिए आकर्षक हो सकता है. सबसे व्यावहारिक रास्ता यही है कि दोनों में एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध खरीदारी की जाए.
आखिरकार अगले पांच दिनों में गोल्ड-सिल्वर का फैसला किसी एक आंकड़े से नहीं होगा. फेड मिनट्स, अमेरिकी डेटा, डॉलर, क्रूड ऑयल और वेस्ट एशिया की खबरें मिलकर बताएंगी कि यह तेजी आगे दौड़ती है या कुछ देर सांस लेती है.
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