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Gold price prediction before Diwali by market experts: ग्लोबल मार्केट में आई बड़ी उथल-पुथल के बीच सोने की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. इस साल जनवरी में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद सोना जुलाई 2026 तक काफी सस्ता हुआ है, जिससे आम खरीदारों के लिए निवेश का यह एक सुनहरा मौका बन गया है.
क्या आप भी इस साल के त्योहार या शादियों के सीजन में सोना खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं और लगातार आसमान छूती कीमतों को देखकर अपना इरादा बदल रहे हैं? अगर हां, तो आपके लिए एक राहत भरी और बेहद जरूरी खबर है. पिछले कुछ हफ्तों में सोने के बजार में एक ऐसा बड़ा उलटफेर देखने को मिला है जिसने निवेशकों से लेकर आम खरीदारों तक को हैरान कर दिया है. कीमतों में आई इस अप्रत्याशित कमी ने मिडिल क्लास परिवारों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है, जो लंबे समय से सोने के सस्ते होने का इंतजार कर रहे थे. तो चलिए मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय और ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक समझते हैं कि सोने की खरीद के लिए अभी की गिरावट ज्यादा फायदेमंद होगी या दीवाली तक रुकना बेहतर होगा.
अगर साल 2026 के शुरुआती महीनों पर नजर डालें, तो साल की शुरुआत में सोने ने हर दिन एक नया रिकॉर्ड बनाया था. इसी साल जनवरी के महीने में 10 ग्राम सोने की कीमत 1,80,000 रुपये के ऐतिहासिक स्तर को भी पार कर गई थी, जिसने आम आदमी की पहुंच से इसे कोसों दूर कर दिया था. लेकिन हालिया डेटा और रिपोर्ट्स एक बिल्कुल अलग कहानी बयां कर रहे हैं. जून के अंत तक सोने की कीमतें गिरकर करीब 1,40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गईं और अब जुलाई 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बाजार में यह मंदी बरकरार है जिससे कीमतें इसी निचले स्तर के आसपास टिकी हुई हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि सिर्फ कुछ ही महीनों के भीतर सोने की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है. जानकरों की मानें तो साल 2013 के बाद से सोने के बाजार में आई यह अब तक की सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है, जिसने पूरे मार्केट को हिला कर रख दिया है.
इस अप्रत्याशित गिरावट के पीछे की असली वजहों को डिकोड करते हुए जाने-माने मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रही भू-राजनीतिक उथल-पुथल इसका सबसे बड़ा कारण है. विशेष रूप से अमेरिका और इरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पश्चिम एशिया में जो अनिश्चितता का माहौल बना है, उसने सोने के बाजार पर सीधा असर डाला है. इसके साथ ही, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर लिए जा रहे फैसलों और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद नीति ने भी इस गिरावट में अहम भूमिका निभाई है. देवकृष्ण पांडेय का मानना है कि ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव की वजह से भले ही कीमतों में यह नरमी दिख रही हो, लेकिन लंबी अवधि में सोने का सपोर्ट लेवल काफी मजबूत नजर आ रहा है.
वर्ल्ड गोल्ड कौन्सिल (WGC) की मिड-इयर आउटलुक रिपोर्ट भी इस बात की तस्दीक करती है कि साल के दूसरे हिस्से में सोने की चाल काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों और निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी. आम लोगों के लिए इसका व्यावहारिक मतलब यह है कि जो लोग 'सोना और सस्ता होगा' इस उम्मीद में अपनी खरीदारी को लगातार टाल रहे हैं, उन्हें अब बहुत ज्यादा इंतजार नहीं करना चाहिए. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारतीय घरेलू बाजार में सोने को 1.35 लाख रुपये के स्तर पर एक बेहद मजबूत सपोर्ट मिल सकता है. ऐसे में दिवाली या उसके बाद आने वाले वेडिंग सीजन के लिए आभूषण खरीदने का यह सबसे मुफीद समय हो सकता है, क्योंकि यहां से बाजार में फिर से एक स्थिरता या हल्की तेजी देखने को मिल सकती है.
कीमतों में आई इस भारी कमी का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि बाजार में ग्राहकों की वापसी शुरू हो गई है. कुछ समय पहले जब सोना अपने ऑल-टाइम हाई पर था, तब ज्वेलरी मार्केट में सन्नाटा पसरा हुआ था और मांग में करीब 75 से 80 फीसदी तक की भारी गिरावट देखी गई थी. लेकिन जैसे ही दाम कम हुए, आम जनता ने दुकानों का रुख करना शुरू कर दिया है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब मांग में आई वह गिरावट घटकर महज 40 से 45 फीसदी रह गई है. यह बदलाव साफ दिखाता है कि भारतीय परिवारों के लिए सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि एक सुरक्षित निवेश और भावनात्मक सुरक्षा की गारंटी है, जिसका फायदा उठाने से वे कभी नहीं चूकते.
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