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Inherited Gold Rule: विरासत में सोना पाना टैक्स-फ्री है या नहीं, इसे 3 साल के भीतर बेचने पर इनकम स्लैब के अनुसार कितना टैक्स लगता है, इस बारे में बेचने से पहले जान लेना बेहद जरूरी है.
भारत में माता-पिता से सोना मिलना सिर्फ गहनों या सिक्कों का लेन-देन नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक परंपरा है, जिसे स्नेह और आर्थिक सुरक्षा का एक अहम हिस्सा माना जाता है. अच्छी बात यह है कि, चाहे सोना वसीयत के जरिए मिले या बिना वसीयत के, इसे विरासत में पाना पूरी तरह से टैक्स-फ्री है. पर, असली गणित तब शुरू होता है जब आप उस विरासत में मिले सोने को बेचते हैं या किसी को गिफ्ट में देते हैं. ऐसे मामलों में, इनकम टैक्स कानून के हिसाब से आपको कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ सकता है. भारत में 1985 के बाद से इनहेरिटेंस टैक्स यानी एस्टेट ड्यूटी खत्म कर दी गई है. इसलिए सीधे-सीधे सोना मिलने पर कोई टैक्स नहीं लगता है.
जब माता-पिता का निधन होता है, तो सोने का वितरण दो तरीकों से होता है.
अगर मृतक ने वसीयत बनाई है, तो गहने, सिक्के या बार उसी के हिसाब से बांटे जाते हैं. इस मामले में वसीयत के दस्तावेज़ प्राथमिक प्रमाण होते हैं.
जब वसीयत नहीं होती है, तो संबंधित पर्सनल लॉ लागू होते हैं. हिंदुओं के लिए हिंदू सक्सेशन एक्ट 1956 और अन्य धर्मों में इंडियन सक्सेशन एक्ट 1925 लागू होता है. कानूनी वारिस (पत्नी, बेटे और बेटियां) बराबर के हकदार होते हैं.
इस स्थिति में डेथ सर्टिफिकेट, सक्सेशन सर्टिफिकेट और फैमिली एग्रीमेंट जैसे दस्तावेज़ सोने के वैध हस्तांतरण को साबित करने में काम आते हैं.
सोने को विरासत में पाना भले ही टैक्स फ्री हो, लेकिन अगर आप उसे बेचते हैं, तो कैपिटल गेन टैक्स देना अनिवार्य है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने सोना कितने समय तक अपने पास रखा.
अगर विरासत में मिला सोना 3 साल के अंदर बेच दिया तो जितना फायदा होगा, वह आपकी इनकम स्लैब पर टैक्स होगा. इसका मतलब है कि आप 30% स्लैब में हैं, तो आपको सीधा 30% टैक्स लगेगा.
अगर 3 साल से ज्यादा समय के बाद इसे बेचते हैं, तो इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ टैक्स सिर्फ 20% ही लगेगा.
उदाहरण के लिए अगर आपको ₹60,000 की कीमत पर 10 ग्राम सोना मिला और आपने 2 साल बाद ₹80,000 में बेच दिया, तो ₹20,000 का फायदा आपकी कुल इनकम में जुड़ेगा और आपकी स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा.
अगर आप सोना अपने बच्चों, भाई-बहनों पत्नी या रिश्तेदार को गिफ्ट करते हैं, तो किसी भी पार्टी को कोई टैक्स नहीं लगेगा. जबकि अगर आप यह सोना किसी ऐसे व्यक्ति को गिफ्ट करते हैं, जो आयकर कानून के तहत रिश्तेदार नहीं है और सोने की कीमत ₹50,000 से ज्यादा है, तो रिसीवर को उस पूरी रकम पर इनकम टैक्स देना पड़ सकता है.
सोना विरासत में मिलने के बाद सबसे पहले किसी आधिकारिक मूल्यांकक से उसकी वर्तमान मार्केट वैल्यू की लिखित रिपोर्ट बनवा लें. यही आगे चलकर टैक्स कैलकुलेशन का आधार बनेगी. सोने को हमेशा बैंक लॉकर में सुरक्षित रखें और उसका रिकॉर्ड मेंटेन करें. अगर बेचने का प्लान है, तो 3 साल तक होल्ड करने पर आपको LTCG और इंडेक्सेशन का बड़ा फायदा मिलेगा, जिससे आपका टैक्स काफी कम हो जाएगा. वर्तमान में, सोने पर कोई नया इनहेरिटेंस टैक्स लागू नहीं है और न ही कैपिटल गेन टैक्स के नियम बदले हैं. यानी, आपको केवल बेचने पर ही टैक्स की चिंता करनी होगी.
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