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देश में इंपोर्ट किये गये सोने का 28.5 प्रतिशत हिस्सा UAE से इंपोर्ट किया गया है. इसके पीछे की वजह यहां से कस्टम ड्यूटी में 1 प्रतिशत की छूट मिलना भी है.
भारत को अपनी देश में डिमांड के हिसाब से सोने का ज्यादातर हिस्सा विदेशों से इंपोर्ट करना पड़ता है, लेकिन पिछले कुछ समय से इंपोर्ट बिल तेजी से बढ़े हैं. इसी को देखते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से सोना न खरीदने की अपील की, लेकिन भारत में पीएम की इस अपील का उल्टा असर देखने को मिला. दरअसल प्रधानमंत्री की अपील के बाद इंपोर्ट कम होने की जगह 47.1 प्रतिशत तक बढ़ गया. यानी सोने की डिमांड कम होने की जगह लोगों ने इसकी जमकर खरीदारी की और सोना पहले से ज्यादा इंपोर्ट करना पड़ा. इसी को देखते हुए सरकार ने सोने की ज्यादातर खरीद ऐसे देश से की, जहां सोने की एक भी माइन ही नहीं है.
रिपोर्ट्स की मानें तो भारत ने 2025 तक में 7.49 अरब डॉलर का सोना इंपोर्ट किया था. इसके बाद 2026 की शुरुआत के साथ ही सोने के दाम आसमान छूने लगे. सोने की लगातार इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई जा रही थी. इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 मई 2026 को देशवासियों से सोना न खरीदने की अपील की. इसके साथ ही सोने पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया. इसके बाद भी अप्रैल जून 2026 में सोने खरीद में 47.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखी. यानी देश में 2025 के मुकालबे 2026 में 11.01 अरब डॉलर का सोना इंपोर्ट किया गया.
वहीं सोने की बढ़ती डिमांड और इंपोर्ट ड्यूटी को देखते हुए भारत अब सोने की ज्यादा खरीदारी यानी इंपोर्ट संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दुबई से कर रहा है, लेकिन अन्य देशों को छोड़कर दुबई से ही सोना क्यों इंपोर्ट किया जा रहा है. आखिर इसके पीछे की वजह क्या है आइए जानते हैं...
इस भारी-भरकम सोने की खरीदारी के पीछे कोई साधारण मांग नहीं, बल्कि भारत-यूएई मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में छिपा है. यहां से सोना खरीदने में सिर्फ 1 प्रतिशत की वो टैरिफ छूट' है, जिसने सर्राफा बाजार के सारे गणित बदल दिये हैं.
दुनिया के बाकी देशों से भारत जब सोना इंपोर्ट करता है तो उस पर 15 प्रतिशत की पूरी कस्टम ड्यूटी लगती है, UAE इस पर एक प्रतिशत की छूट देता है. भारत-यूएई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (CEPA) के तहत अगर सोना नियमों के अनुसार, इंपोर्ट होने पर कस्टम ड्यूटी 14 प्रतिशत की रहती है. अप्रैल-जून तिमाही में यूएई से सोने का इंपोर्ट 124.8 प्रतिशत बढ़कर 3.14 अरब डॉलर पहुंच गया. यानी भारत के कुल सोने के इंपोर्ट का लगभग 28.5 प्रतिशत हिस्सा अकेले यूएई से किया जाता है.
जब भारत अरबों डॉलर का सोना बाहर से खरीदता है, तो देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खाली होता है. डॉलर की मांग बढ़ने से भारतीय रुपया कमजोर होता है, जिससे आपके लिए पेट्रोल, डीजल और दूसरी इंपोर्ट किये गये सामान महंगी हो जाती है.