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Sona-Chandi 5 year rate prediction: 1.52 लाख रुपये के करीब पहुंचा सोना और 2.35 लाख की दहलीज पर चांदी अभी भी तेजी की गुंजाइश दिखा रहे हैं. 2027 तक Fed, डॉलर, केंद्रीय बैंक खरीद और औद्योगिक मांग दिशा तय करेंगे. अगले पांच साल में मौका है, लेकिन volatility भी रहेगी.
सोना 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब और चांदी 2.35 लाख रुपये किलो की दहलीज पर है. ऐसे समय में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि भाव कितना बढ़ चुका है, बल्कि यह है कि यहां से और कितनी तेजी की गुंजाइश बची है.
एनडीटीवी प्रॉफिट के अनुसार 10 अगस्त 2026 की सुबह उपलब्ध बाजार आंकड़ों में 24 कैरेट सोना करीब 1,52,160 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब 2,32,660 रुपये प्रति किलो थी. यानी सराफा बाजार पहले ही बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है. लेकिन कहानी यहीं खत्म होती नहीं दिखती. केंद्रीय बैंक की खरीद, अमेरिकी ब्याज दर, डॉलर, भू-राजनीतिक तनाव और चांदी की औद्योगिक मांग अगले साल तक कीमतों को फिर नई ऊंचाई की तरफ ले जा सकती है. दूसरी तरफ तेज मुनाफावसूली और करेक्शन का खतरा भी उतना ही वास्तविक है.
मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय के आकलन को मौजूदा वैश्विक रिपोर्टों के साथ देखें तो सराफा बाजार में आगे का दौर ऐसा हो सकता है जिसमें तेजी के मौके तो मिलेंगे, लेकिन हर बढ़ती कीमत पर खरीदारी करना समझदारी नहीं होगी.
10 अगस्त की सुबह Bullion.co.in के आधार पर 24 कैरेट सोना 1,52,160 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,32,660 रुपये प्रति किलो के आसपास थी. अलग-अलग शहरों और बाजारों में स्थानीय प्रीमियम के कारण भाव थोड़ा अलग हो सकता है. यहां एक अहम बात समझनी होगी. IBJA का बेंचमार्क रेट, MCX का भाव और ज्वेलर की दुकान पर मिलने वाली कीमत एक जैसी नहीं होती. GST, मेकिंग चार्ज, स्थानीय प्रीमियम और ज्वेलर का मार्जिन अंतिम कीमत को बदल देते हैं. इसलिए 1.52 लाख रुपये का बाजार भाव देखने के बाद ज्वेलरी की खरीद लागत इससे ज्यादा हो सकती है. यानी निवेशक के लिए मौजूदा स्तर सिर्फ मनोवैज्ञानिक रूप से बड़ा नंबर नहीं है. यह वह स्तर भी है जहां छोटी-सी वैश्विक खबर कीमत में बड़ी हलचल ला सकती है.
| शहर | 24 कैरेट सोना (₹/10 ग्राम) |
22 कैरेट सोना (₹/10 ग्राम) |
चांदी (₹/किलो) |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| मुंबई | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| कोलकाता | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| चेन्नई | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| बेंगलुरु | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| हैदराबाद | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| अहमदाबाद | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| जयपुर | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| लखनऊ | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| पटना | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| भोपाल | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| चंडीगढ़ | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| देहरादून | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| रायपुर | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| रांची | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| भुवनेश्वर | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| गांधीनगर | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| गुवाहाटी | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| शिमला | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| श्रीनगर | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| जयपुर | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| भोपाल | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| पटना | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| लखनऊ | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| नोएडा | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
| वाराणसी | ₹1,52,160 | ₹1,39,480 | ₹2,32,660 |
नोट: ये संदर्भ भाव हैं। शहर, स्थानीय सराफा बाजार, शुद्धता, प्रीमियम और ज्वेलर के मार्जिन के अनुसार वास्तविक खरीद कीमत में अंतर हो सकता है। सोने के भाव में GST और ज्वेलरी मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं.
सोने के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 2026 की तेजी के बाद 2027 में भी नया रिकॉर्ड बनेगा. इसका जवाब पूरी तरह एकतरफा नहीं है. World Gold Council की 2026 Mid-Year Outlook रिपोर्ट बताती है कि इस साल सोने ने असाधारण volatility दिखाई. जनवरी में अंतरराष्ट्रीय सोना 5,500 डॉलर प्रति औंस के ऊपर गया, जबकि जून के अंत में 4,000 डॉलर से नीचे भी आ गया. रिपोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि भू-राजनीतिक जोखिम और निवेशकों की sentiment में अचानक बदलाव सोने की कीमत को तेजी से प्रभावित कर सकते हैं.
यानी 2027 की कहानी सिर्फ यह नहीं होगी कि सोना ऊपर जाएगा या नीचे. असली सवाल यह होगा कि बीच में कितनी बड़ी गिरावट आएगी और निवेशक उस गिरावट को खरीदारी के मौके में बदल पाते हैं या नहीं.
J.P. Morgan का जून 2026 का अनुमान इससे ज्यादा bullish है. उसकी Global Research टीम के मुताबिक सोना 2026 की चौथी तिमाही में करीब 6,000 डॉलर प्रति औंस और 2027 के अंत तक करीब 6,300 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है. उसके 2027 का औसत अनुमान करीब 6,263 डॉलर प्रति औंस है.
यह भारतीय रुपये में कोई निश्चित भविष्य का भाव नहीं है, क्योंकि डॉलर-रुपया विनिमय दर भी घरेलू सोने की कीमत को प्रभावित करेगी. लेकिन इतना जरूर है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़े संस्थानों को अभी भी upside दिखाई दे रहा है.
सोने के लिए इस समय चार बड़े इंजन हैं. पहला अमेरिकी Federal Reserve की ब्याज दर नीति है. दरें नीचे आती हैं और बॉन्ड यील्ड नरम पड़ती है तो सोने को समर्थन मिल सकता है. इसके उलट महंगाई के कारण Fed को दरें ऊंची रखनी पड़ीं तो सोने की तेजी पर दबाव आ सकता है.
दूसरा डॉलर है. आम तौर पर कमजोर डॉलर सोने के लिए बेहतर माहौल बनाता है, जबकि मजबूत डॉलर कीमत पर दबाव डाल सकता है. तीसरा केंद्रीय बैंकों की खरीद है. World Gold Council के जून 2026 के Central Banks Gold Reserves Survey में 89 फीसदी reserve managers ने कहा कि अगले 12 महीनों में वैश्विक केंद्रीय बैंकों की gold holdings बढ़ने की उम्मीद है. 45 फीसदी ने अपने खुद के संस्थान की gold holdings बढ़ने की उम्मीद जताई. चौथा भू-राजनीतिक जोखिम है. युद्ध, व्यापार तनाव, प्रतिबंध, वित्तीय संकट या वैश्विक बाजार में अचानक डर बढ़ने पर सोने की safe-haven demand बढ़ सकती है. यही चार फैक्टर 2027 तक सोने के लिए सबसे बड़ा सहारा बन सकते हैं.
अगर केवल bullish forecasts देखेंगे तो लगेगा कि सोना और चांदी अगले साल भी लगातार ऊपर जाएंगे. लेकिन World Bank का अनुमान तस्वीर का दूसरा हिस्सा दिखाता है.
World Bank के अनुसार precious metals price index 2026 में करीब 42 फीसदी बढ़ सकता है, लेकिन 2027 में इसमें लगभग 8 फीसदी की गिरावट का अनुमान है. बैंक के मुताबिक सोने को safe-haven demand और central bank purchases से समर्थन मिलता रहेगा, जबकि चांदी को industrial demand और constrained supply से सहारा मिलेगा.
सोने के लिए World Bank ने 2026 में करीब 37 फीसदी की बढ़त और 2027 में लगभग 9 फीसदी की गिरावट का अनुमान दिया है. चांदी के लिए 2026 में करीब 76 फीसदी की तेजी और 2027 में लगभग 7 फीसदी की गिरावट का अनुमान है. देव कहते हैं कि यहां निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये अनुमान किसी एक दिन के भारतीय सराफा भाव का target नहीं हैं. ये वैश्विक price trend के अनुमान हैं. इसलिए अगर 2027 में कीमतों में correction आता है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि सोने-चांदी की लंबी अवधि की कहानी खत्म हो गई.
चांदी की कहानी इस समय और दिलचस्प है क्योंकि इसकी मांग केवल निवेश से नहीं आती. सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और कई औद्योगिक इस्तेमाल में चांदी की जरूरत होती है. World Bank ने भी renewable energy और semiconductor जैसे क्षेत्रों को चांदी की मांग के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में रेखांकित किया है. J.P. Morgan Global Research ने 2026 में चांदी का औसत अनुमान 81 डॉलर प्रति औंस और 2027 का औसत अनुमान 85.5 डॉलर प्रति औंस रखा है.
चांदी की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ती है तो उद्योग इसका इस्तेमाल कम करने या दूसरे विकल्प तलाशने की कोशिश कर सकता है. J.P. Morgan ने भी माना है कि बढ़ती लागत लंबे समय में industrial demand को प्रभावित कर सकती है और silver में volatility ज्यादा रह सकती है. यानी चांदी में upside बड़ा हो सकता है, लेकिन गिरावट भी सोने के मुकाबले ज्यादा तेज हो सकती है.
आने वाले साल को तीन परिस्थितियों में समझना ज्यादा सही होगा. अगर अमेरिका में ब्याज दरें नरम होती हैं, डॉलर कमजोर पड़ता है और geopolitical tension बढ़ता है तो सोने में फिर जोरदार तेजी देखने को मिल सकती है. ऐसी स्थिति में चांदी भी तेजी पकड़ सकती है. अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था सामान्य गति से चलती है और ब्याज दरों में बड़ा बदलाव नहीं आता तो दोनों धातुएं ऊंचे स्तर पर रहकर कुछ समय consolidation कर सकती हैं. लेकिन अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत रहती है, महंगाई ऊंची बनी रहती है, Fed सख्त रहता है और डॉलर मजबूत होता है तो precious metals में तेज correction का जोखिम बढ़ जाएगा. यानी 2027 के लिए सबसे बड़ा खतरा मंदी नहीं, बल्कि यह भी हो सकता है कि बाजार में मौजूदा bullish expectations जरूरत से ज्यादा कीमत में शामिल हो चुकी हों.
पांच साल का नजरिया एक साल की prediction से अलग होता है. World Gold Council के 2026 Central Banks Gold Reserves Survey में 83 फीसदी reserve managers ने कहा कि पांच साल बाद उनके कुल reserves में gold का हिस्सा बढ़ने की उम्मीद है. यह आंकड़ा लंबी अवधि के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
केंद्रीय बैंक सोने को केवल commodity की तरह नहीं देख रहे. भू-राजनीतिक अनिश्चितता, reserve diversification और डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिशें gold demand को structural support दे सकती हैं. यही कारण है कि पांच साल के नजरिये से सोने की कहानी सिर्फ अगले Fed फैसले पर निर्भर नहीं है. अगर केंद्रीय बैंक खरीद जारी रखते हैं, वैश्विक कर्ज और fiscal risks बढ़ते हैं और geopolitical fragmentation बनी रहती है तो सोने के लिए एक मजबूत demand floor बना रह सकता है.
चांदी के लिए पांच साल का सबसे बड़ा सवाल industrial demand है. अगर renewable energy, electronics, semiconductors, electric vehicles और दूसरी high-tech industries तेजी से बढ़ती हैं तो चांदी की मांग को structural support मिलेगा.
लेकिन supply की कहानी भी महत्वपूर्ण है. चांदी अक्सर दूसरे metals की mining के साथ by-product के रूप में निकलती है. इसलिए कीमत बढ़ने के बावजूद supply हमेशा उसी तेजी से नहीं बढ़ती. J.P. Morgan ने भी silver supply की इस कम elasticity को महत्वपूर्ण factor बताया है. यही वजह है कि लंबे समय में चांदी में बड़ा upside बन सकता है, लेकिन इसका रास्ता सोने की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला रह सकता है.
यहीं आम निवेशक सबसे ज्यादा गलती करता है. जब बाजार में लगातार तेजी दिखाई देती है तो लगता है कि अभी नहीं खरीदा तो कभी मौका नहीं मिलेगा. लेकिन 2026 में खुद सोने ने दिखाया है कि रिकॉर्ड के बाद भी बड़ी गिरावट संभव है.
J.P. Morgan के मुताबिक 2026 में gold ने रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद तेज गिरावट देखी और फिर recovery की. उसकी मौजूदा रिसर्च में लंबी अवधि के लिए gold को लेकर bullish view कायम है, लेकिन Fed policy और geopolitical developments को प्रमुख जोखिम माना गया है. इसलिए देवकृष्ण पांडेय के बाजार आकलन के मुताबिक मौजूदा ऊंचे स्तर पर एकमुश्त पूरी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध खरीद का तरीका ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है.
मसलन, अगर किसी निवेशक ने पांच साल के लिए एक निश्चित रकम तय की है तो उसे एक ही दिन में लगाने के बजाय अलग-अलग चरणों में निवेश करने से तेज correction की स्थिति में औसत खरीद कीमत कम करने की गुंजाइश रहती है.
अगर सोना शादी या पारिवारिक जरूरत के लिए खरीदना है तो रणनीति अलग होगी. लंबे समय तक इंतजार करना हमेशा संभव नहीं होता. लेकिन निवेश के लिए सोना खरीद रहे हैं तो making charges और GST का असर समझना जरूरी है. ज्वेलरी का भाव बढ़ने का मतलब यह नहीं कि बेचते समय वही पूरा पैसा वापस मिलेगा. निवेश के लिहाज से physical gold के साथ regulated financial options भी देखे जा सकते हैं. चांदी में physical holding करते समय storage और purity का सवाल भी सामने आता है. इसलिए सिर्फ यह देखना कि सोना 1.52 लाख है और चांदी 2.35 लाख, पर्याप्त नहीं है. असली सवाल यह है कि खरीद का उद्देश्य क्या है और पैसा कितने समय के लिए लगाया जा रहा है.
अगले 12 से 18 महीनों में सराफा बाजार को समझने के लिए पांच संकेत बेहद अहम रहेंगे.
इनमें से दो-तीन संकेत एक साथ सोने के पक्ष में जाते हैं तो 2027 में नई तेजी की संभावना मजबूत होगी. इसके उलट अगर डॉलर और yields तेजी पकड़ते हैं और geopolitical risk घटता है तो correction का खतरा बढ़ सकता है.
देव का जवाब है हां, लेकिन यह तेजी अब बिना रुकावट वाली कहानी नहीं है. सोने के लिए J.P. Morgan का 2027 का करीब 6,300 डॉलर प्रति औंस का अनुमान और केंद्रीय बैंक खरीद का मजबूत रुझान बताता है कि लंबी अवधि की bullish कहानी अभी जिंदा है. चांदी के लिए 2027 का J.P. Morgan औसत अनुमान 85.5 डॉलर प्रति औंस है और industrial demand इसकी कहानी को अतिरिक्त सहारा देती है. ([JPMorgan Chase][6])
लेकिन World Bank का 2027 में precious metals में गिरावट का अनुमान यह साफ चेतावनी देता है कि 2026 जैसी तेज रैली को अगले साल सीधे extrapolate करना सही नहीं होगा. इसलिए अगले पांच साल के लिए सबसे मजबूत निष्कर्ष यह नहीं है कि सोना हर साल बढ़ेगा या चांदी दोगुनी हो जाएगी. असली बात यह है कि दोनों धातुओं के पास structural support मौजूद है, लेकिन entry price और investment horizon रिटर्न में बड़ा फर्क डालेंगे.
देवकृष्ण पांडेय के आकलन के अनुसार भी मौजूदा ऊंचे भाव पर तेजी का पीछा करने के बजाय गिरावट में चरणबद्ध खरीद ज्यादा समझदार रणनीति हो सकती है.
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