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Gold-Silver Investment Strategy After Correction: सोना और चांदी में 4 सितंबर को तेज गिरावट आई. एमसीएक्स गोल्ड करीब 2,100 रुपये और सिल्वर करीब 1,500 रुपये टूटा. विशेषज्ञों ने सोने के लिए 1,51,000 रुपये और चांदी के लिए 2,25,000 रुपये के आसपास के स्तरों को अहम बताया है.
लगातार तेजी के बाद सोने और चांदी में आई गिरावट ने निवेशकों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या यह महंगी धातुओं में खरीदारी का मौका है या अभी कुछ और नीचे आने का इंतजार करना बेहतर होगा?
4 सितंबर को एमसीएक्स पर सोना करीब 2,100 रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसला, जबकि चांदी में करीब 1,500 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज हुई. ऐसे में आम निवेशक के लिए सबसे जरूरी सवाल सिर्फ आज का भाव नहीं, बल्कि यह है कि अगली खरीदारी किस स्तर पर की जाए. चलिए कमोडिटी और मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय से इसे समझते हैं.
4 सितंबर को एमसीएक्स के अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स में करीब 0.47 फीसदी की गिरावट आई और भाव लगभग 1,55,041 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा. वहीं एमसीएक्स सिल्वर दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट करीब 0.48 फीसदी गिरकर 2,41,189 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया. इससे पहले दोनों धातुओं में लगातार दो सत्रों तक तेजी देखने को मिली थी.
मनीकंट्रोल के मुताबिक, 3 सितंबर को एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स 1,55,701 रुपये प्रति 10 ग्राम पर मामूली कमजोरी के साथ बंद हुआ था, जबकि सिल्वर 2,42,391 रुपये प्रति किलोग्राम पर था. यानी अगले कारोबारी सत्र में दोनों धातुओं पर फिर दबाव दिखाई दिया.
यह गिरावट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी निवेशकों की नजर अमेरिका के रोजगार आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर नीति पर रही. मजबूत डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बदलाव का असर बुलियन की कीमतों पर तेजी से पड़ सकता है.
देव कहते हैं यहां सबसे अहम बात यह है कि गिरावट को देखकर पूरी रकम एक साथ लगाना समझदारी नहीं होगी. हालिया बाजार संकेत बताते हैं कि सोने की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव रह सकता है.
टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित विशेषज्ञ अनुमान के मुताबिक, नुवामा प्रोफेशनल क्लाइंट्स ग्रुप के हेड फॉरेक्स एंड कमोडिटीज अभिलाष कोइक्कारा ने सोने में गिरावट पर खरीदारी की रणनीति की बात कही थी. उनके अनुसार चांदी के लिए 2,25,000 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर सपोर्ट के तौर पर महत्वपूर्ण है.
देव के अनुसार इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि हर निवेशक को तुरंत सोना-चांदी खरीद लेना चाहिए. बल्कि लंबी अवधि के निवेशक गिरावट में धीरे-धीरे खरीदारी करने की रणनीति अपना सकते हैं, जबकि छोटी अवधि के निवेशकों को तकनीकी स्तर और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का इंतजार करना ज्यादा जरूरी है.
मनीकंट्रोल पर एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने सोने के लिए 1,51,000 से 1,55,500 रुपये प्रति 10 ग्राम की रेंज बताई थी. उनके मुताबिक कमजोर रोजगार परिस्थितियां फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों पर नरम रुख अपनाने की ज्यादा गुंजाइश दे सकती हैं, जिससे सोने को सपोर्ट मिल सकता है.
यानी निवेशक के लिए 1,51,000 रुपये के आसपास का स्तर खास नजर रखने लायक बनता है. अगर कीमतें इस तरह के सपोर्ट के आसपास टिकती हैं और वैश्विक संकेत भी अनुकूल रहते हैं, तो धीरे-धीरे खरीदारी का मौका बन सकता है.
देव कहते हैं लेकिन अगर सपोर्ट टूटता है, तो सिर्फ इसलिए खरीदारी करना कि कीमत पहले से कम हो गई है, जोखिम भरा फैसला हो सकता है. बाजार में सस्ता दिखना और वास्तव में निचला स्तर बन जाना दो अलग बातें हैं.
चांदी सोने की तुलना में ज्यादा तेज उतार-चढ़ाव दिखा सकती है. इसका कारण सिर्फ निवेश मांग नहीं, बल्कि औद्योगिक मांग भी है. इसलिए वैश्विक आर्थिक आंकड़ों में बदलाव का असर चांदी पर अपेक्षाकृत तेज हो सकता है.
नुवामा के अभिलाष कोइक्कारा के अनुसार चांदी के लिए 2,25,000 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर सपोर्ट है. मौजूदा स्तर इसके ऊपर है, इसलिए इस स्तर पर बाजार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी.
यही वह छिपा हुआ एंगल है जिसे आम खरीदार को समझना चाहिए. चांदी में बड़ी तेजी देखकर ऊंचे भाव पर पूरी रकम लगाने के बजाय सपोर्ट के आसपास चरणबद्ध खरीदारी करना जोखिम को कम कर सकता है.
सोने और चांदी की अगली दिशा में अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों की भूमिका फिलहाल काफी अहम है. 4 सितंबर के बाजार में निवेशकों की नजर अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल्स और बेरोजगारी के आंकड़ों पर थी, क्योंकि इनके आधार पर फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर नीति को लेकर उम्मीदें बदल सकती हैं.
मोटे तौर पर अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कमजोरी के संकेत आते हैं और ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ती है, तो सोने को फायदा मिल सकता है. दूसरी ओर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती बुलियन पर दबाव बढ़ा सकती है.
मनीकंट्रोल के मुताबिक, मोटिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी ने बताया था कि फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वालर की टिप्पणियों के बाद सितंबर में दर बढ़ने की संभावना करीब 50 फीसदी तक आ गई थी, जो सप्ताह की शुरुआत में लगभग 70 फीसदी थी.
अगर आपका मकसद शादी, भविष्य की जरूरत या लंबी अवधि के लिए सोना खरीदना है, तो एक दिन के भाव के आधार पर पूरी खरीदारी करने के बजाय रकम को कई हिस्सों में बांटना बेहतर तरीका हो सकता है. इससे अगर बाजार और नीचे आता है तो अगली किश्त कम भाव पर लगाने की गुंजाइश बनी रहती है.
वहीं चांदी में निवेश करने वालों को ज्यादा उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए. खासकर 2,25,000 रुपये प्रति किलोग्राम के सपोर्ट स्तर पर नजर रखना महत्वपूर्ण है. एक और जरूरी बात यह है कि एमसीएक्स का भाव और ज्वेलरी दुकान पर मिलने वाला खुदरा भाव एक जैसा नहीं होता. आभूषण खरीदते समय मेकिंग चार्ज, जीएसटी और अन्य लागतें भी अंतिम कीमत को प्रभावित करती हैं. इसलिए सिर्फ एमसीएक्स में आई गिरावट को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि दुकान पर भी उतनी ही गिरावट मिल जाएगी.
फिलहाल सोना-चांदी में आई गिरावट को सीधे तौर पर खरीदारी का आखिरी मौका मानना जल्दबाजी होगी. लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट में चरणबद्ध खरीदारी की रणनीति पर विचार किया जा सकता है. सोने में 1,51,000 रुपये के आसपास का स्तर और चांदी में 2,25,000 रुपये प्रति किलोग्राम का सपोर्ट बाजार की अगली दिशा समझने में अहम हो सकता है.
सबसे जरूरी बात यही है कि गिरते भाव देखकर डरने या तेजी देखकर भागकर खरीदने के बजाय निवेश को हिस्सों में बांटा जाए. क्योंकि सोना-चांदी में अभी अमेरिका के रोजगार आंकड़े, फेड का रुख, डॉलर और बॉन्ड यील्ड जैसे फैक्टर अगले बड़े मूव को प्रभावित कर सकते हैं.
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