बिजनेस
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'भारत टेक्स 2026' में 14,300 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों और 2.8 बिलियन डॉलर के बिजनेस सौदों ने भारत को वैश्विक कपड़ा हब बना दिया है. इस महाकुंभ में 138 देशों के खरीदार शामिल हुए, जिससे छोटे बुनकरों को बड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलने की उम्मीद जगी है.
क्या आपने कभी सोचा है कि जो शर्ट या साड़ी आप पहनते हैं, वह आने वाले दिनों में न सिर्फ सस्ती हो सकती है बल्कि उसकी तकनीक आपको हैरान कर देगी? दिल्ली के भारत मंडपम में कुछ ऐसा ही बड़ा बदलाव शुरू हो चुका है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. दुनिया के सबसे बड़े कपड़ा महाकुंभ 'भारत टेक्स 2026' के शुरुआती तीन दिनों में ही जो हलचल हुई है, उसने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में दुनिया भर के लोग भारत में बने कपड़े पहनने वाले हैं. यह सिर्फ नेताओं और बड़े बिजनसमैन की बैठक नहीं थी, बल्कि यह सीधा आपकी जेब, आपकी लाइफस्टाइल और देश में रोजगार की नई क्रांति से जुड़ा मामला है.
भारत मंडपम का 16 लाख वर्ग फुट से ज्यादा का इलाका इन दिनों दुनिया के फैशन और टेक्सटाइल का सबसे बड़ा गवाह बना हुआ है. इस आयोजन में 138 देशों के प्रतिनिधि और करीब 95,000 कारोबारी आगंतुक पहुंचे. कुल मिलाकर 11,315 खरीदारों और 6,090 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने भारतीय कपड़ों को अपनी पहली पसंद बताया. तीन दिनों के भीतर 28,500 से अधिक आमने-सामने की बिजनेस बैठकें हुईं. इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में जब भारतीय कपड़ों की मांग पूरी दुनिया में बढ़ेगी, तो देश के भीतर मैन्युफैक्चरिंग तेज होगी. आम लोगों के लिए इसका मतलब है फैक्ट्रियों में काम का बढ़ना और नए बिजनेस के रास्ते खुलना.
इस आयोजन ने केवल कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर बड़ा असर दिखाया है. लगभग 14,300 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को इस दौरान रफ्तार मिली है. कर्नाटक, बिहार, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने विकास की नई इबारत लिखते हुए 30 से ज्यादा एमओयू साइन किए हैं. इसके अलावा, आरई एंड यूपी ने अकेले 4,800 करोड़ रुपये लगाने की घोषणा की है. इस भारी भरकम पैसे के निवेश से राज्यों के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में कपडा मिलें और प्रोसेसिंग यूनिट्स लगेंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर युवाओं को पलायन नहीं करना पड़ेगा और उन्हें अपने ही राज्य में रोजगार मिलेगा.
इस न्यूज में जो सबसे दिलचस्प बात सामने आई है और जो सीधे आपकी लाइफस्टाइल से जुड़ी है, वह है तकनीकी कपड़े यानी 'टेक्निकल टेक्सटाइल'. अभी तक हम कपड़ों को सिर्फ पहनने के नजरिए से देखते थे, लेकिन युवाओं ने इस कार्यक्रम में जो तकनीक दिखाई वह हैरान करने वाली है. टेक्निकल टेक्सटाइल हैकाथॉन में ऐसे कपड़े पेश किए गए जो अत्यधिक ठंड में आपको बचाएंगे, किसानों के लिए सुरक्षात्मक कवच का काम करेंगे और शुगर यानी डायबिटीज के मरीजों के घावों को ठीक करने में मदद करेंगे. यानी आने वाले समय में आपके कपड़े सिर्फ फैशन नहीं बल्कि आपकी सेहत की सुरक्षा की भी गारंटी होंगे.
इस पूरे आयोजन का सबसे भावुक और सबसे बड़ा फायदा देश के आम बुनकरों और छोटे उद्यमियों को मिला है. आकांक्षी जिलों के 250 से ज्यादा बुनकरों को सीधे इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाया गया. उन्हें दुनिया भर के खरीदारों से सीधे बातचीत करने का मौका मिला. अभी तक जो बुनकर महाजन या बिचौलियों के भरोसे रहते थे, उन्हें अब समझ आ गया है कि ग्लोबल मार्केट में उनके हुनर की क्या कीमत है. केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह और राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने भी इन छोटे कलाकारों के हुनर को सराहा है. अब जब भारत टैक्स ट्रेड फेडरेशन और प्रीमियर विजन पेरिस के बीच समझौता हुआ है, तो भारत के छोटे गांवों में तैयार होने वाला कपड़ा सीधे यूरोप के बड़े शोरूम्स में बिकने के लिए तैयार है.
यह पूरी खबर आपके लिए इसलिए मायने रखती है क्योंकि कपड़ा उद्योग खेती के बाद देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला क्षेत्र है. जब इस सेक्टर में 2.8 बिलियन डॉलर के व्यापारिक प्रस्ताव आते हैं, तो इसका सीधा असर बाजार के लिक्विडिटी यानी पैसे के फ्लो पर पड़ता है. इससे मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं के लिए टेक्सटाइल डिजाइनिंग, लॉजिस्टिक्स, एआई और मैन्युफैक्चरिंग में नौकरियों की बाढ़ आने वाली है. साथ ही, जब देश में ही बड़े स्तर पर इको-स्टिच और सस्टेनेबल कपड़े बनेंगे, तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना आपको बेहतर क्वालिटी के ब्रांडेड कपड़े कम कीमत पर मिलने की राह आसान हो जाएगी.
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