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How to get international freelance clients: फेसियल पैरालिसिस से न केवल चेहरा बल्कि एक हाथ और एक पैर काम करना बंद कर दिए लेकिन यूपी की इस जुझारू महिला ने हार नहीं मानी. घर बैठने के बजाय इंटरनेशनल लेवल पर फ्रीलांसिंग शुरू की आज सलाना 1 करोड़ कमा रही हैं.
How to Do Freelancing for Google Meta: लालित कौर की जिंदगी एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती के बाद पूरी तरह बदल गई. फेसियल पैरालिसिस के असर से उनके चेहरे के साथ एक हाथ और एक पैर भी प्रभावित हुए. इसके बावजूद उन्होंने इंटरनेशनल फ्रीलांसिंग शुरू की और गूगल, मेटा और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े क्लाइंट्स के लिए काम किया.
कई लोगों के लिए करियर में आगे बढ़ने का मतलब सिर्फ अच्छी नौकरी और ज्यादा कमाई होता है. लेकिन लालित कौर की कहानी में सबसे बड़ा संघर्ष कमाई से पहले अपनी शारीरिक मुश्किलों के साथ आगे बढ़ने का रहा.
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में लालित कौर ने अपनी जिंदगी और करियर से जुड़ी चुनौतियों के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि यूपी के अमरोहा की लालित कौर को 9 साल की उम्र में बुखार आया और डॉक्टर की दवा से उनको रिएक्शन हुआ कई डॉक्टरों के इलाज के बाद जब लालित को आगरा लाया गया तो पता चला उनको लैपरोसी हुई है. उनके मुताबिक उन्हें फेसियल पैरालिसिस हुआ था.
इसका असर उनके चेहरे पर भी दिखाई देता है. इसके अलावा उनका एक हाथ और एक पैर भी काम नहीं करता.ऐसे हालात में सामान्य दिनचर्या और काम करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है. इसके बावजूद उन्होंने अपने करियर को रोकने के बजाय ऐसा रास्ता चुना जिसमें वह अपनी क्षमता के मुताबिक काम जारी रख सकें.
लालित कौर की कहानी का एक अहम हिस्सा उनका पुराना ऑफिस अनुभव भी है. सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो के मुताबिक, कभी उनके आसपास के लोग उनके फैसलों को लेकर हंसते थे. लेकिन उन्होंने दूसरों की राय को अपनी मंजिल नहीं बनने दिया. पारंपरिक नौकरी के बजाय उन्होंने फ्रीलांसिंग की तरफ कदम बढ़ाया और धीरे-धीरे इंटरनेशनल क्लाइंट्स के साथ काम करना शुरू किया. यहीं से उनकी कहानी आम नौकरी से अलग हो जाती है. उन्होंने सिर्फ छोटे-मोटे लोकल प्रोजेक्ट तक खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि ग्लोबल क्लाइंट्स के साथ काम करने की दिशा में आगे बढ़ीं.
लालित कौर की फ्रीलांसिंग का काम सिर्फ सामान्य ऑनलाइन प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है. उनके बारे में शेयर किए गए वीडियो में बताया गया है कि वह इंटरनेशनल क्लाइंट्स के लिए गूगल, मेटा और एक्स को मैनेज करती हैं. इसका मतलब यह है कि उनका काम डिजिटल प्लेटफॉर्म और इंटरनेशनल क्लाइंट्स की जरूरतों से जुड़ा है. आज के समय में यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसे भारत में बैठकर भी ग्लोबल स्तर पर किया जा सकता है. यही पहलू नौकरी तलाश रहे युवाओं और घर से काम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए खास मायने रखता है. अगर किसी व्यक्ति के पास डिजिटल स्किल है तो उसका बाजार सिर्फ उसके शहर या देश तक सीमित नहीं रहता.
लालित कौर की कहानी का सबसे बड़ा पहलू उनकी कमाई नहीं बल्कि वह परिस्थिति है जिसमें उन्होंने यह काम खड़ा किया. फेसियल पैरालिसिस के असर के साथ उनके चेहरे पर भी इसका प्रभाव है. एक हाथ और एक पैर के काम नहीं करने की चुनौती के बावजूद उन्होंने अपने काम को इंटरनेशनल क्लाइंट्स तक पहुंचाया. यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है. फ्रीलांसिंग का मतलब आसान कमाई नहीं है. इंटरनेशनल क्लाइंट्स के साथ काम करने के लिए लगातार कम्युनिकेशन, डिजिटल स्किल, समय की पाबंदी, काम की क्वालिटी और क्लाइंट की जरूरत समझना जरूरी होता है.यानी लालित कौर की कहानी सिर्फ मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद काम करने की नहीं है, बल्कि अपनी स्किल को ग्लोबल मार्केट तक ले जाने की भी है.
लालित कौर के सफर का सबसे ज्यादा चर्चा में आने वाला हिस्सा उनकी सालाना 1 करोड़ रुपये की कमाई है. सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में उनके सफर को इसी उपलब्धि के साथ सामने रखा गया है.हालांकि किसी एक व्यक्ति की कमाई को हर फ्रीलांसर के लिए सामान्य कमाई मानना सही नहीं होगा. फ्रीलांसिंग की इनकम स्किल, क्लाइंट, प्रोजेक्ट, अनुभव और काम के स्तर के हिसाब से काफी अलग हो सकती है.
लेकिन यहां असली सवाल यह है कि अगर एक व्यक्ति भारत में बैठकर इंटरनेशनल क्लाइंट्स के लिए डिजिटल काम कर सकता है, तो दूसरे लोग भी अपनी स्किल को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं.
लालित कौर की कहानी से सबसे उपयोगी सीख यह नहीं है कि फ्रीलांसिंग करके हर व्यक्ति 1 करोड़ रुपये कमा सकता है. असली सीख यह है कि कमाई का बाजार अब सिर्फ ऑफिस की नौकरी तक सीमित नहीं है.
कंटेंट, सोशल मीडिया मैनेजमेंट, डिजिटल मार्केटिंग, डिजाइन, वीडियो एडिटिंग, प्रोग्रामिंग और दूसरी डिजिटल स्किल रखने वाले लोग इंटरनेशनल क्लाइंट्स के लिए काम कर सकते हैं.
लेकिन इसके लिए पहले अपनी स्किल मजबूत करनी होगी. उसके बाद छोटे प्रोजेक्ट से शुरुआत करके पोर्टफोलियो बनाना और धीरे-धीरे विदेशी क्लाइंट्स तक पहुंचना ज्यादा प्रैक्टिकल रास्ता है.
लालित कौर की कहानी इसलिए अलग है क्योंकि उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौतियों को अपने करियर का आखिरी पड़ाव नहीं बनने दिया. उन्होंने काम करने का तरीका बदला और इंटरनेशनल मार्केट को अपना अगला रास्ता बनाया.
लालित कौर की कहानी उन लोगों के लिए खास संदेश देती है जो किसी शारीरिक चुनौती, करियर ब्रेक या मुश्किल परिस्थिति के कारण खुद को पीछे समझने लगते हैं. उनका सफर बताता है कि काम करने का तरीका बदल सकता है, लेकिन स्किल और इच्छाशक्ति के दम पर नए रास्ते खोजे जा सकते हैं. इंटरनेशनल फ्रीलांसिंग कोई रातोंरात करोड़पति बनाने वाला फॉर्मूला नहीं है, लेकिन सही डिजिटल स्किल के साथ यह ग्लोबल कमाई का रास्ता जरूर बन सकता है.
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