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महंगे ग्रीन शेयर खरीदने का बजट नहीं? ₹1,000 के बॉन्ड से हर महीने होगी शानदार कमाई, बिना शेयर खरीदे बनें हाइड्रोजन ट्रेन के हिस्सेदार 

Green energy investment options: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रैक पर उतरना साफ-सुथरे भविष्य का बड़ा संकेत है. लेकिन महंगे ग्रीन स्टॉक्स के कारण आम लोग इस क्रांति से नहीं जुड़ पा रहे हैं. अब मात्र ₹1,000 के माइक्रो ग्रीन बॉन्ड्स के जरिए छोटे निवेशक भी सुरक्षित और बेहतर रिटर्न पा सकते हैं.

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महंगे ग्रीन शेयर खरीदने का बजट नहीं? ₹1,000 के बॉन्ड से हर महीने होगी शानदार कमाई, बिना शेयर खरीदे बनें हाइड्रोजन ट्रेन के हिस्सेदार 

देश के रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स में सीधे पैसा लगाने का सबसे आसान और सस्ता रास्ता (फोटो एआई)

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* देश में पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू
* महंगे ग्रीन स्टॉक्स का विकल्प तैयार
* ₹1,000 से माइक्रो बॉन्ड्स की शुरुआत
* बैंक एफडी से ज्यादा सुरक्षित रिटर्न
* पर्यावरण और जेब दोनों को फायदा

Future energy stocks alternative low risk investment: भारतीय रेलवे ने अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन को पटरी पर उतारकर एक नया इतिहास रच दिया है. प्रदूषण मुक्त सफर की तरफ यह देश का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है. लेकिन इस बड़ी खबर के बीच एक आम इंसान के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि देश में इतनी बड़ी ग्रीन एनर्जी क्रांति आ रही है, तो इसका फायदा मेरी जेब को कैसे मिलेगा?

अक्सर जब भी पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा या रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स में पैसे लगाने की बात आती है, तो लोगों के दिमाग में सीधे टाटा या अडानी जैसी बड़ी कंपनियों के महंगे शेयर घूमने लगते हैं. लेकिन सच यह है कि भारी रिस्क और महंगे स्टॉक्स के अलावा भी एक ऐसा रास्ता है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.

डॉ. राजीव नायर (क्लीन एनर्जी एक्सपर्ट और पॉलिसी एनालिस्ट) का कहना है कि भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का चलना सिर्फ एक शुरुआत है. देश को 2030 तक बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स के लिए भारी फंड की जरूरत है. सरकार और कॉर्पोरेट्स जब छोटे निवेशकों के लिए माइक्रो बॉन्ड्स लाते हैं, तो इससे देश की तरक्की में आम जनता की सीधी भागीदारी तय होती है. 

पहली हाइड्रोजन ट्रेन का आपकी रसोई और बटुए से क्या है कनेक्शन

जब देश में धुएं वाली गाड़ियों की जगह पानी से बनने वाले ईंधन (हाइड्रोजन) पर ट्रेनें चलने लगेंगी, तो भारत का विदेशों से आने वाले महंगे तेल पर निर्भरता कम होगी. इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. आम जनता के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में महंगाई पर लगाम लगेगी और परिवहन सस्ता होगा. सरकार अब पूरा जोर इस बात पर दे रही है कि कैसे इस नई तकनीक से आम भारतीय को सीधे जोड़ा जाए ताकि पर्यावरण के साथ-साथ आपके घर की फाइनांसियल स्थिति भी सुधरे.

महंगे ग्रीन शेयर नहीं, अब 'माइक्रो ग्रीन बॉन्ड्स' से शुरू करें कमाई

अमित शर्मा (सीनियर फाइनांसियल एडवाइजर, मनीग्रो वेल्थ)का कहना है कि आमतौर पर लोग समझते हैं कि ग्रीन एनर्जी में पैसा लगाने के लिए शेयर बाजार के महंगे स्टॉक्स ही इकलौता रास्ता हैं. लेकिन 'माइक्रो ग्रीन बॉन्ड्स' ने इस सोच को बदल दिया है. यह मिडिल क्लास के लिए एक गेम-चेंजर है, जहाँ सिर्फ ₹1,000 से शुरुआत करके फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की तुलना में 1.5 से 2 फीसदी तक ज्यादा और सुरक्षित रिटर्न कमाया जा सकता है. 

लौग अक्सर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से डरते हैं. अगर आप भी भारी जोखिम नहीं उठाना चाहते, तो आपके लिए 'माइक्रो ग्रीन बॉन्ड्स' (Micro Green Bonds) एक बेहतरीन जरिया बनकर उभर रहे हैं. यह एक तरह का लोन होता है जो आप देश के ग्रीन प्रोजेक्ट्स को देते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए आपको लाखों रुपये की जरूरत नहीं है, बल्कि आप मात्र ₹1,000 की बेहद छोटी रकम से इसकी शुरुआत कर सकते हैं. यह ठीक वैसा ही है जैसे आप किसी सरकारी योजना में सुरक्षित निवेश करते हैं.

बैंक एफडी को भूल जाइए, यहां मिलेगा सुरक्षित और ज्यादा रिटर्न

मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय बताते हैं कि आज के समय में जब बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी पर मिलने वाला ब्याज महंगाई दर के मुकाबले काफी कम नजर आता है, तब ये माइक्रो ग्रीन बॉन्ड्स एक समझदारी भरा फैसला साबित हो सकते हैं. चूंकि ये बॉन्ड्स सीधे सरकार या बड़े कॉर्पोरेट्स द्वारा देश के रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स (जैसे सोलर प्लांट या विंड एनर्जी) को फंड करने के लिए जारी किए जाते हैं, इसलिए इनमें डूबने का खतरा न के बराबर होता है. आपको तय समय पर एक निश्चित और बेहतर ब्याज मिलता है, जो आपके बैंक अकाउंट में सीधे क्रेडिट होता है.

देश की तरक्की में हिस्सेदारी और भविष्य की सुरक्षा

जब आप इन छोटे ग्रीन बॉन्ड्स में पैसा लगाते हैं, तो आपका पैसा सीधे देश की नदियों को साफ करने, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और हाइड्रोजन फ्यूल प्लांट लगाने में इस्तेमाल होता है. इसका एक छुपा हुआ पहलू यह भी है कि आने वाली पीढ़ी को आप न सिर्फ एक स्वच्छ पर्यावरण दे रहे हैं, बल्कि अपने वर्तमान को भी आर्थिक रूप से सुरक्षित कर रहे हैं. बिना किसी शेयर मार्केट के झंझट के, देश की इस नई औद्योगिक क्रांति का हिस्सा बनने का इससे आसान और किफायती तरीका दूसरा नहीं हो सकता.

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल पाठकों की जागरूकता और ज्ञानवर्धन के लिए है. यह किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष वित्तीय सलाह, निवेश की सिफारिश या शेयर/बॉन्ड खरीदने का सुझाव नहीं है. 'माइक्रो ग्रीन बॉन्ड्स' या किसी भी अन्य वित्तीय साधन में निवेश करने से पहले कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें. बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है, इसलिए अपनी वित्तीय स्थिति और रिस्क लेने की क्षमता को समझकर ही कोई निर्णय लें.

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