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क्या आपके पास है करोड़ों के बिजनेस का आइडिया? भारत के अगले बड़े बिजनेस टाइकून बनने की रेस शुरू, बदलेगी छोटे शहरों की किस्मत

How to apply for startups funding: अपने प्रमुख टेक इवेंट 'TechSparks 2026' के ज़रिए योरस्टोरी देश के 30 सबसे होनहार शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स (Tech30 2026) की तलाश कर रहा है.'न्यू टेक ऑर्डर' थीम वाले इस पहल में हिस्सा लेकर, छोटे शहरों के प्रतिभाशाली लोगों को बड़ी फंडिंग और मेंटरशिप मिल सकेगी.

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क्या आपके पास है करोड़ों के बिजनेस का आइडिया? भारत के अगले बड़े बिजनेस टाइकून बनने की रेस शुरू, बदलेगी छोटे शहरों की किस्मत

एक आइडिया देकर बन सकते हैं आप करोड़ों के बिजनेस के मालिक (फोटो एआई)

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क्या आपके दिमाग में भी कोई ऐसा अनोखा बिजनेस आइडिया घूम रहा है जो आने वाले समय में लोगों की जिंदगी बदल सकता है? अक्सर पैसे और सही गाइडेंस की कमी के कारण देश के लाखों बेहतरीन आइडिया फाइलों में ही दबे रह जाते हैं. लेकिन अब भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक ऐसा बड़ा धमाका होने जा रहा है जो छोटे शहरों के आम लोगों के सपनों को भी उड़ान दे सकता है. योरस्टोरी अपने प्रमुख प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन 'TechSparks 2026' के तहत भारत के अगले सबसे बड़े 'Tech30 2026' स्टार्टअप्स की तलाश के लिए आवेदन मंगाए हैं. इस नई शुरूआत से देश के बिजनेस लैंडस्केप को पूरी तरह से बदलने की तैयारी की जा रही है, जिसका सीधा असर युवाओं के रोजगार और भविष्य पर पड़ेगा.

सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा पैसा, इस बार 'नया तकनीकी क्रम' रचेगा इतिहास

अब तक माना जाता था कि बेंगलुरु या मुंबई जैसे बड़े शहरों में रहने वाले लोगों को ही स्टार्टअप शुरू करने के लिए फंडिग आसानी से मिल जाती है. लेकिन इस बार TechSparks 2026 की थीम 'नया तकनीकी क्रम' (The New Tech Order) रखी गई है, जो यह दर्शाती है कि कैसे भारतीय डीपटेक अब सिर्फ किताबी वादों से निकलकर वास्ताविक दुनिया में अपना असर दिखा रहा है. अगर आप उत्तर प्रदेश, बिहार या राजस्थान के किसी छोटे गांव-कस्बे से भी हैं और आपके पास कोई ऐसा डीपटेक आइडिया है जो समाज की किसी बड़ी समस्या का समाधान करता है, तो आपके लिए ग्लोबल स्टेज के रास्ते खुल चुके हैं. आम जनता के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि अब नौकरियों के पीछे भागने के बजाय देश का युवा खुद रोजगार पैदा करने वाले मालिक बनने की राह पर चलेगा.

मंदी के इस दौर में नए आइडियाज को मिलेगी संजीवनी बूटी, रिकॉर्ड्स खुद दे रहे हैं गवाही

ग्लोबल मार्केट में नौकरियों के संकट और स्टार्टअप्स में फंडिंग की कमी की खबरों के बीच यह खबर एक नई उम्मीद लेकर आई है. इस नए मंच के जरिए देश के उन 30 सबसे होनहार शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को चुना जएगा जिनमें देश का अगला बड़ा ब्रांड बनने का दम है. इन चुने गए स्टार्टअप्स की घोषणा 13 से 15 अक्टूबर तक TechSparks 2026 इवेंट में की जाएगी. यह कोई साधारण प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि कामयाबी की गारंटी है. पिछले Tech30 ग्रुप्स का ट्रैक रिकॉर्ड देखें तो इन्होंने सामूहिक रूप से दो आईपीओ (IPO), पांच यूनिकॉर्न, नौ सूनिकॉर्न और 45 मिनीकॉर्न दिए हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इन्होंने 53 अलग-अलग जगहों पर कंपनियां खड़ी करके 35,000 से अधिक नौकरियां सृजित की हैं. जब बाजार में ऐसे बिजनेस आते हैं, तो आम कामकाजी लोगों के लिए कमाई के कई नए रास्ते खुलते हैं.

फ्रेशवर्क्स और स्काईरूट जैसी दिग्गज कंपनियों की लीग में शामिल होने का सुनहरा मउका

बिजनेस शुरू करना सिर्फ पैसे का खेल नहीं है, बल्कि सही समय पर सही सलाह मिलना सबसे ज्यादा जरूरी होता है. इस पहल के जरिए चुने गए नए उद्यमियों को देश के सबसे बड़े दिग्गजों से सीधे सीखने का मौका मिलेगा. टेक30 के पुराने रिकॉर्ड्स को देखें तो इसमें Freshworks, Chargebee, Juspay, Innovaccer, Capillary, Skyroot, Pixxel, Qure.ai, Addverb, Hasura, Digantara, Apna, Onsurity और DeepSource जैसी दिग्गज कंपनिया शामिल रही हैं. खास बात यह है कि टेक30 के लगभग दो-तिहाई पूर्व छात्र (64.3%) आज भी सक्रिय रूप से अपनी कंपनियां चला रहे हैं. यह आंकड़ा दिखाता है कि यहाँ सिर्फ कुछ दिनों का फेम नहीं, बल्कि लंबे समय तक टिकने वाला बिजनेस एम्पायर बनाने की कला सिखाई जाती है.

मार्केट में पैसों की बारिश, इस सप्ताह के इन सौदों से समझें आम आदमी पर इसका असर

बहुत से लोग सोचते हैं कि स्टार्टअप की खबरों से उनका कोई सीधा कनेक्शन नहीं है, लेकिन असलियत इसके ठीक उलट है. बाजार में फंडिंग आने का सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ता है. उदाहरण के लिए, इस सप्ताह के सर्वश्रेष्ठ सौदों को ही देख लीजिए, 'एडगे ऑटोमेशन' ने विकास दौर में 230 करोड़ रुपये की बड़ी राशि जुटाई है. वहीं 'एलिवेट एजुकेशन' ने सीरीज डी राउंड में 170 करोड़ रुपये और 'औकेरा' ने अज्ञात राउंड में 90 करोड़ रुपये जुटाए हैं. जब इन कंपनियों के पास करोड़ों रुपये का फंड आता है, तो वे अपनी तकनीक को बेहतर करती हैं, जिससे आम आदमी को मिलने वाली सर्विसेज और ज्यादा आसान, हाई-टेक और बजट के अनुकूल हो जाती हैं.

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