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गोल्ड में 'डेथ क्रॉस' का खतरा क्या डुबो देगा आपका इंवेस्टमेंट? एक्सपर्ट से समझिए सराफा बाजार क्या दे रहा संकेत

Gold Price Crash Truth: बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) की तकनीकी चेतावनी है कि सोने में लंबे समय तक चली तेजी के बाद अब एक बड़े 'करेक्शन' (सुधार) का दौर आ सकता है. असल में जब भी सोने के चार्ट पर 'डेथ क्रॉस' जैसे पैटर्न बनते हैं, तो कीमतें अपनी पिछली तेजी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रिट्रेस (सुधार) कर सकती हैं.

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गोल्ड में 'डेथ क्रॉस' का खतरा क्या डुबो देगा आपका इंवेस्टमेंट? एक्सपर्ट से समझिए सराफा बाजार क्या दे रहा संकेत

सोने में क्या 'डेथ क्रॉस' तोड़ देगा निवेशकों का भरोसा? (फोटो एआई)

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  •  गोल्ड में बना खतरनाक डेथ क्रॉस क्या है?
  •  बैंक ऑफ अमेरिका की बड़ी चेतावनी क्या है?
  •  क्या सोना बेचने का सही समय आ गया है?
  •  निवेशकों के लिए बाजार से क्या संकेत मिल रहे?
  •  सोने की चाल और आम लोगों पर इसका असर

Gold price trend analysis: क्या आपने हाल ही में सोने में निवेश किया है या शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने का प्लान बना रहे हैं? अगर हां, तो रुकिए. बाजार में एक ऐसी हलचल मची है जिसने बड़े-बड़े निवेशकों की नींद उड़ा दी है. गोल्ड के चार्ट पर एक ऐसा पैटर्न बना है जिसे तकनीकी भाषा में डेथ क्रॉस कहा जाता है. बैंक ऑफ अमेरिका ने इसे लेकर एक चेतावनी जारी की है, जिसके बाद से ही बाजार में पैनिक का माहौल है. आखिर यह डेथ क्रॉस है क्या और इसका आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा? कमोडेटी मार्केट स्पेशलिस्ट बृजनंदन दुबे से चलिए समझते हैं कि ये डेथ क्रॉस क्या है और इस समय निवेशकों के लिए सराफा बाजार क्या चेतावनी दे रहा है.

डेथ क्रॉस का असली मतलब क्या है?

आसान भाषा में समझें तो जब सोने की शॉर्ट-टर्म औसत कीमत उसकी लॉन्ग-टर्म औसत कीमत से नीचे चली जाती है, तो इसे डेथ क्रॉस कहते हैं. तकनीकी जानकारों के लिए यह एक संकेत होता है कि बाजार में तेजी का दौर खत्म हो सकता है और आगे मंदी आ सकती है. बैंक ऑफ अमेरिका का मानना है कि यह स्थिति सोने की चमक को कुछ समय के लिए फीका कर सकती है. हालांकि, इसे पूरी तरह से मंदी न समझें, लेकिन यह निश्चित रूप से सतर्क रहने का समय है.

बैंक ऑफ अमेरिका की चेतावनी क्या है?

बैंक ऑफ अमेरिका के तकनीकी विश्लेषकों ने बताया कि सोने के चार्ट पर 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) गिरकर 200-दिवसीय SMA के नीचे चला गया है, जिसे तकनीकी भाषा में 'डेथ क्रॉस' कहा जाता है. ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, जब-जब सोने में यह पैटर्न दिखा है, तब-तब आने वाले कुछ हफ्तों या महीनों में कीमतों पर बिकवली का भारी दबाव देखा गया है. अनुमानित औसत कीमत में कटौती: बैंक ने अपनी 2026 की औसत गोल्ड प्राइस के पूर्वानुमान में संशोधन करते हुए इसे घटाकर 4,360 डॉलर प्रति औंस कर दिया है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के सख्त रुख और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की वजह से शॉर्ट-टर्न में सोने की चमक फीकी पड़ सकती है.  और नीचे फिसलने का जोखिम: रिपोर्ट के अनुसार, यदि करेक्शन का यह दौर लंबा खिंचता है, तो सोने की कीमतें और नीचे के सपोर्ट स्तरों (जैसे $3,700 से $3,600 या उससे नीचे के स्तरों) का परीक्षण कर सकती हैं.  

1980 और 2011 जैसी ऐतिहासिक मंदी क्या थी?  

1980 की मंदी उच्च महंगाई और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाकर 20% तक ले जाने के कारण आई थी, जबकि 2011 का संकट अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग डाउनग्रेड और यूरोपीय कर्ज संकट से उपजा था. वर्तमान 2026 में वैसी महामंदी के आसार नहीं हैं. हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव, क्रूड ऑयल के ऊंचे दाम और वैश्विक वित्तीय बाजारों में वोलेटिलिटी जरूर बनी हुई है, लेकिन मजबूत कॉर्पोरेट फंडामेंटल्स और केंद्रीय बैंकों की सक्रिय नीतियों के कारण उन ऐतिहासिक महामंदी जैसे हालात दोहराने की संभावना फिलहाल नहीं दिखती है.

इसका आम आदमी पर क्या होगा असर?

अब आप सोच रहे होंगे कि इसका मुझपर क्या असर पड़ेगा? अगर आप एक आम आदमी हैं जिसने निवेश के तौर पर सोना खरीद रखा है, तो हो सकता है कि आपको आने वाले कुछ हफ्तों में पोर्टफोलियो में गिरावट दिखे. लेकिन घबराने की जरुरत नहीं है. सोना अक्सर लंबी अवधि का खेल होता है. जो लोग शॉर्ट टर्म में मुनाफा कमाने की सोच रहे थे, उन्हें यह गिरावट भारी पड़ सकती है. वहीं, अगर आप घर में इस्तेमाल के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, तो यह गिरावट आपके लिए एक मौके की तरह भी हो सकती है.

क्या सोना बेच देना ही सही रास्ता है?

ज्यादातर लोग डरकर अपना सोना बेचने की गलती कर बैठते हैं. बैंक ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट चेतावनी जरूर है, पर यह कोई अंतिम फैसला नहीं है. बाजार में उतार-चढ़ाव तो आते रहते हैं. अगर आप पैनिक में आकर सोना बेचते हैं, तो हो सकता है आप घाटे में सौद बेच दें. बेहतर यह है कि आप अपनी वित्तीय स्थिति देखें. अगर आपको पैसों की कोई अर्जेंट जरुरत नहीं है, तो बेहतर होगा कि आप बाजार के शांत होने का इंतजार करें. 

लेकिन क्या निवेशकों की कमाई पूरी तरह डूब जाएगी?

मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय का कहना है कि इसे पैसे डूबने या महामंदी के रूप में नहीं, बल्कि एक हेल्दी करेक्शन (Healthy Correction) या बाइंग अपॉर्चुनिटी के रूप में देखा जाना चाहिए. लंबी अवधि का बुलिश रुख भी समझना होगा. बैंक ऑफ अमेरिका अभी भी लॉन्ग-तेर्म दृष्टिकोण से सोने को लेकर सकारात्मक है और आने वाले समय में इसके मजबूत बने रहने की उम्मीद है.  स्टेप्ड एक्युमुलेशन (Staged Accumulation): एक्सपर्ट्स की सलाह है कि निवेशकों को घबराकर पैनिक में अपनी होल्डिंग्स नहीं बेचनी चाहिए, बल्कि इस गिरावट का उपयोग टुकड़ों में (SIPS या Staggered manner में) सोना या गोल्ड माइनिंग स्टॉक खरीदने के लिए करना चाहिए.  

सोना कब खरीदें और क्या है असली खेल?

यहाँ एक बात जो कोई नहीं बता रहा है, वह यह है कि डेथ क्रॉस हमेशा गिरावट की ही गारंटी नहीं होता. कभी-कभी यह एक ऐसी स्थिति होती है जहाँ बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स बाजार को नीचे लाते हैं ताकि वो सस्ता सोना खरीद सकें. जिसे हम डेथ क्रॉस मानकर डर रहे हैं, वह बड़े खिलाड़ियों के लिए एक खरीदारी का मौका हो सकता है. मेरा सुझाव है कि अगर आप लंबे समय के लिए सोना जोड़ना चाहते हैं, तो एक साथ पैसा लगाने के बजाय किस्तों में खरीदारी करें. इससे रिस्क कम हो जाता है.

एक्सपर्ट का निष्कर्ष और सुझाव क्या है?

मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय के अनुसार सोने की कीमतों में यह बदलाव एक चेतावनी है, कोई आपदा नहीं. निवेश बाजार जोखिमों से भरा है और ऐसी खबरें आती रहती हैं. सबसे जरुरी है कि आप अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ एक ही चीज में न लगाएं. अगर डेथ क्रॉस के बाद सोना और गिरता है, तो यह घबराहट का नहीं, बल्कि निवेश को औसत (average) करने का समय हो सकता है. ठंडे दिमाग से लिया गया फैसला ही आपको बाजार के इस शोर में बचा सकता है.

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