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चीनी वेबसाइट से थोक माल मंगाकर क्या भारत में शुरू कर सकते हैं बिजनेस? एक्सपर्ट से समझिए कितना है आसान और कितना मुश्किल

how to import wholesale goods from china: चीन की थोक वेबसाइटों से सीधे माल मंगाकर बेचने का सपना भारत के कड़े टैक्स और कानूनी नियमों के कारण भारी नुकसान का सबब बन सकता है. बिना जीएसटी, आईईसी कोड और फेमा नियमों की सही जानकारी के चीन से व्यापार करना सीधे टैक्स विभाग के रडार पर ला सकता है.

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चीनी वेबसाइट से थोक माल मंगाकर क्या भारत में शुरू कर सकते हैं बिजनेस? एक्सपर्ट से समझिए कितना है आसान और कितना मुश्किल

चाइना  के वेबसाइट से सीधे भारत में माल मंगा कर सेल की जा सकती है? (फोटो एआई)

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  • कस्टम ड्यूटी का कानूनी पेंच फंसा सकता है आपको
  • बिजनेस में मुनाफा और जोखिम जरूर समझ लें
  • एक्सपर्ट से समझें चाइनीज माल मंगाने का पूरा खेल 
  • कम लागत में बड़ी कमाई क्या हो सकती है?

India-china cross border e-commerce business regulations:  क्या आपने भी सोशल मीडिया पर रील्स स्क्रॉल करते हुए ऐसे वीडियो देखे हैं जो दावा करते हैं कि आप चीन की 5 बड़ी वेबसाइटों से सीधे बेहद सस्ते दामों पर थोक (बल्क) में सामान खरीद सकते हैं और भारत में उसे कई गुना मुनाफे पर बेच सकते हैं? इस मामले में सीए सुदेशना बसु का कहना है कि दिखने में यह बहुत आसान और जादुई बिजनेस प्लान लगता है. लेकिन सच्चाई उतनी सरल नहीं है जितनी एक मिनट की रील में दिखाई देती है. भारत सरकार के कड़े नियम और आयात कानून इस पूरी प्रक्रिया को बेहद जटिल और रिस्की बना देते हैं. बिना सोचे-समझे उठाया गया एक कदम आपके पूरे बजट को बिगाड़ सकता है.

सोशल मीडिया का वो सच जो व्यापारी आपसे छुपा जाते हैं

सुदेशना बताती हैं कि इंटरनेट पर अलीबाबा, मेड-इन-चाइना, ग्लोबल सोर्सेज, डीएचगेट और 1688 जैसी वेबसाइटों को लेकर भारी चर्चा रहती है. दावा किया जाता है कि यहां से कोई भी भारतीय थोक में सामान मंगा सकता है. लेकिन इस दावे के पीछे छिपे सबसे बड़े पेच को लोग छुपा जाते हैं. जब आप व्यावसायिक स्तर (कमर्शियल परपज) के लिए चीन से थोक में माल मंगाते हैं, तो आप केवल एक 'ग्राहक' नहीं रह जाते, बल्कि आप एक 'आयातक' (इंपोर्टर) बन जाते हैं. भारत सरकार की नजर में यह एक कमर्शियल ट्रेड है, जिसे बिना कानूनी प्रक्रियाओं के करना पूरी तरह गैर-कानूनी है.

भारत के वे कड़े नियम जो आपका कंटेनर बंदरगाह पर ही फंसा सकते हैं

यदि आप चीन की इन थोक वेबसाइटों से माल मंगवाने की सोच रहे हैं, तो सबसे पहले आपको भारत के बिजनेस रूल्स और कानूनी ढांचे को समझना होगा. सुदेशना कहती हैं कि बिना इन दस्तावेजों के आपका माल भारतीय बंदरगाह (पोर्ट) या कस्टम विभाग से आगे नहीं बढ़ पाएगा:

आईईसी कोड की अनिवार्यता:  भारत में किसी भी देश से व्यावसायिक आयात करने के लिए आपके पास विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी किया गया आयात-निर्यात कोड (Import Export Code - IEC) होना अनिवार्य है. इसके बिना कोई भी व्यावसायिक शिपमेंट भारत में प्रवेश नहीं कर सकती.

जीएसटी रजिस्ट्रेशन और कस्टम ड्यूटी: थोक माल पर आपको न केवल सीमा शुल्क (Customs Duty) देना होगा, बल्कि आईजीएसटी (IGST) का भुगतान भी करना पड़ेगा. चीन से आने वाले कई सामानों पर भारत सरकार भारी एंटी-डंपिंग ड्यूटी भी लगाती है ताकि घरेलू उद्योगों को बचाया जा सके.

प्रतिबंधित और लाइसेंस प्राप्त वस्तुएं: हर सामान को भारत में सीधे नहीं मंगाया जा सकता. इलेक्ट्रॉनिक्स, खिलौने, और रसायनों जैसे उत्पादों के लिए बीआईएस (BIS) सर्टिफिकेशन और भारत सरकार के संबंधित विभागों से विशेष सुरक्षा क्लीयरेंस की आवश्यकता होती है.

पर्सनल अकाउंट से चीन को पेमेंट देने का मतलब समझते हैं आप?

सीए सुदेशना बताती है कि पर्सनल अकाउंट से चीन में पेमेंट करने पर फेमा कानून के तहत हो कड़ी कार्रवाई सकती है. एक सबसे बड़ी वित्तीय गलती जो नए व्यापारी अक्सर करते हैं, वह है अपने पर्सनल सेविंग अकाउंट से विदेशी सप्लायर को भुगतान करना. सीए सुदेशना बसु इस पर विशेष चेतावनी देते हुए कहती हैं कि भारत में विदेशी मुद्रा का कोई भी लेनदेन 'फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट' (FEMA) के कड़े नियमों के तहत आता है. अगर आप वैध बैंकिंग चैनलों और बिजनेस करंट अकाउंट के बिना चीन पैसा भेजते हैं, तो यह सीधे मनी लॉन्ड्रिंग और फेमा कानून का उल्लंघन माना जा सकता है, जिसके लिए प्रवर्तन निदेशालय या टैक्स विभाग का नोटिस सीधे आपके घर पहुंच सकता है.

बिना तैयारी के शुरुआत करने पर आम लोगों पर क्या पड़ेगा सीधा असर

चीन से सीधे थोक माल मंगाने का सबसे बड़ा असर आपके बैंक खाते और मानसिक शांति पर पड़ता है. कई छोटे उद्यमी सस्ते के चक्कर में लाखों रुपये का ऑर्डर दे बैठते हैं. जब माल भारतीय बंदरगाह पर पहुंचता है, तब उन्हें पता चलता है कि कस्टम ड्यूटी, वेयरहाउसिंग चार्ज और जरूरी दस्तावेजों की कमी के कारण उनका माल जब्त होने की कगार पर है. कई बार तो कस्टम क्लीयरेंस का खर्च माल की असली कीमत से भी दोगुना हो जाता है. इसके अलावा, विदेशी लेनदेन में धोखाधड़ी की स्थिति में भारतीय कानूनों के तहत चीनी सप्लायर पर कार्रवाई करना लगभग असंभव होता है.

वो वित्तीय पहलू जो चीन के सप्लायर आपको कभी नहीं बताएंगे

एक आम व्यापारी जो सबसे बड़ी गलती करता है, वह है शिपिंग टर्म्स को न समझना और लागत का गलत आकलन करना. सोशल मीडिया पर दिखने वाली कम कीमतें अक्सर केवल चीन के कारखाने की होती हैं, जिसे व्यापारिक भाषा में 'Ex-Works' कहा जाता है. इसमें चीन से भारत तक का भारी समुद्री या हवाई भाड़ा, पोर्ट चार्जेस, कस्टम क्लीयरेंस एजेंट की फीस, बैंक के फॉरेक्स कन्वर्शन चार्ज और स्थानीय ट्रांसपोर्टेशन शामिल नहीं होता. जब आप इन सभी छिपे हुए खर्चों को जोड़ते हैं, तो वह 'सस्ता चीनी माल' भारतीय थोक बाजार से भी अधिक महंगा साबित होने लगता है, जिससे आपका मुनाफा पूरी तरह खत्म हो जाता है.

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