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फोन और लैपटॉप की ईएमआई भरने में हुई देरी तो क्या कंपनियां कर पाएंगी डिवाइस लॉक, जानिए क्या कहता है नया कानून

Digital device locking rules: आरबीआई के नए नियमों के तहत अब केवल एक ईएमआई छूटने पर आपका फोन या लैपटॉप लॉक नहीं किया जा सकेगा. वित्त कंपनियों को 30 से 60 दिनों की देरी होने पर ही चरणबद्ध तरीके से रिमोट लॉकिंग तकनीक का उपयोग करने की अनुमति दी गई है.

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फोन और लैपटॉप की ईएमआई भरने में हुई देरी तो क्या कंपनियां कर पाएंगी डिवाइस लॉक, जानिए क्या कहता है नया कानून

अब किस्त भरने में देरी होने पर भी तुरंत लॉक नहीं होंगे गैजेट्स (फोटो एआई)

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  • एक ईएमआई छूटने पर फोन लॉक नहीं
  • 60 दिन की देरी पर ही पूर्ण प्रतिबंध
  • आपातकालीन सेवाएं हमेशा रहेंगी चालू
  • समय पर भुगतान पर तुरंत राहत
  • वसूली के नाम पर उत्पीड़न पर रोक

क्या आपने कभी सोचा है कि महीने की पहली तारीख को सैलरी आने से पहले अगर बैंक अकाउंट में पैसों की कमी हो जाए और आपके फोन की ईएमआई बाउंस हो जाए, तो क्या होगा? अब तक कई लोग इस डर के साए में जीते थे कि कहीं उनका महंगा स्मार्टफोन या ऑफिस का काम आने वाला लैपटॉप अचानक से एक 'डिब्बा' न बन जाए. फाइनेंस कंपनियां और बैंक अक्सर जरा सी चूक पर तकनीक का सहारा लेकर डिवाइस को रिमोट से तुरंत लॉक कर देते थे, जिससे आम आदमी का रोजमर्रा का जीवन ठप पड़ जाता था. लेकिन अब भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने इस मनमानी पर लगाम कसने के लिए एक बेहद राहत भरी और सख्त तैयारी कर ली है, जो नए साल यानी 1 जनवरी 2027 से लागू होने जा रही है.

जब एक छोटी सी चूक बन जाती थी बड़ा मानसिक तनाव

कल्पना कीजिए कि आप ऑफिस के किसी ज़रूरी काम में व्यस्त हैं या सफर के दौरान आपको डिजिटल पेमेंट करनी है, और अचानक स्क्रीन पर मैसेज फ्लैश होता है कि आपकी एक ईएमआई न चुका पाने के कारण आपका डिवाइस लॉक कर दिया गया है. यह सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि आम आदमी की इज्जत और रोज की भागदौड़ पर सीधा प्रहार था. कई बार तो ऐसा भी होता था कि लोग कर्ज चुका भी देते थे, लेकिन सिस्टम अपडेट न होने के कारण उन्हें घंटों या दिनों तक परेशानी झेलनी पड़ती थी. आरबीआई के पास ऐसी ढेरों शिकायतें पहुंच रही थीं, जहां वित्तीय संस्थान ग्राहकों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करने या बिना चेतावनी के उनके गैजेट्स को ब्लॉक करने के हथकंडे अपना रहे थे.

तीस और साठ दिन का नया फॉर्मूला लाएगा राहत

नए नियमों के अनुसार, अब कोई भी बैंक या फाइनेंस कंपनी महज एक महीने की किस्त छूटते ही आपका स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप बंद नहीं कर पाएगी. आरबीआई के स्पष्ट निर्देश हैं कि रिमोट लॉक तकनीक का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है जब लोन खाता लगातार तीस दिनों से ज्यादा समय से डिफॉल्ट यानी ओवरड्यू चल रहा हो. इसके बाद भी तुरंत पूरी तरह ताला नहीं जड़ा जाएगा. यदि भुगतान में साठ दिनों से अधिक की देरी होती है, तभी डिवाइस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का कदम उठाया जा सकता है. इसका मतलब साफ है कि आपको अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने और बकाया चुकाने के लिए पर्याप्त वैधानिक समय मिलेगा, जिससे पैनिक सिच्युएशन से बचा जा सके.

आपातकालीन सेवाओं पर ताला लगाने का हक किसी को नहीं

इस नई नीति का सबसे मानवीय और व्यावहारिक पहलू यह है कि अगर किसी वजह से आपका डिवाइस आंशिक रूप से प्रतिबंधित भी किया जाता है, तब भी कुछ बुनियादी और जीवन-जरूरी सेवाएं कभी बंद नहीं की जा सकतीं. इसमें आपकी इनकमिंग कॉल्स, एसएमएस सेवाएं, आपातकालीन संचार और एसओएस फंक्शन जैसे विकल्प पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे. इसका मतलब है कि मुसीबत के वक्त आप अपने परिवार से संपर्क साध सकेंगे या कोई जरूरी ओटीपी प्राप्त कर सकेंगे. इसके अलावा, जैसे ही आप अपना बकाया भुगतान चुकता करेंगे, डिवाइस बिना किसी देरी के सामान्य रूप से काम करने लगेगा, और यदि इसमें कोई अनावश्यक देरी हुई तो कंपनियों को ग्राहकों को मुआवजा तक देना पड़ सकता है.

वसूली के नाम पर मानसिक उत्पीड़न का अंत

यह पूरा बदलाव सिर्फ तकनीकी लॉकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के लिए एक बड़ी मानसिक जीत है जो लोन रिकवरी एजेंटों के दबाव और अपमानजनक रवैये से परेशान रहते थे. अनौपचारिक सर्वेक्षण बताते हैं कि लोग पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लेने के चक्रव्यूह में फंसते जा रहे हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत आर्थिकी चरमरा जाती है. आरबीआई का यह सख्त रुख यह सुनिश्चित करता है कि वित्तीय संस्थान तकनीक का इस्तेमाल ग्राहकों को डराने या प्रताड़ित करने के हथियार के रूप में न करें. आम आदमी के लिए यह खबर राहत की सांस लेकर आई है, क्योंकि अब गैजेट्स खरीदने के बाद भी उपभोक्ता की अपनी डिजिटल गरिमा और बुनियादी अधिकार सुरक्षित रहेंगे.

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