Advertisement

बिना फंडिंग 29 साल की लड़की ने खड़ा कर दिया बिजनेस, अमेजन प्राइम-नायका ही नहीं, अडानी तक को बनाया अपना क्लाइंट

Digital Marketing Agency Business: काजोल भेड़ा ने 2020 में कोविड के दौर में स्क्रिब्ल्ड की शुरुआत की. सीमित संसाधनों से शुरू हुआ यह कारोबार आज करीब 50 लोगों की टीम वाला प्रॉफिटेबल बिजनेस बन चुका है. नायका, अडानी और अमेजन प्राइम जैसे बड़े ब्रांडों के साथ काम कर चुका है.

Latest News
बिना फंडिंग 29 साल की लड़की ने खड़ा कर दिया बिजनेस, अमेजन प्राइम-नायका ही नहीं, अडानी तक को बनाया अपना क्लाइंट

कैसे काजोल भेड़ा ने खड़ा किया प्रॉफिटेबल बिजनेस? (फोटो एआई)

Add DNA as a Preferred Source

Indian women entrepreneur success story: सिर्फ नौकरी करना ही कमाई का रास्ता नहीं है, कभी-कभी किसी इंडस्ट्री की बदलती जरूरत को समय रहते पहचान लेना भी बड़ा बिजनेस खड़ा कर सकता है. 29 साल की काजोल भेड़ा की कहानी इसी बात का उदाहरण है. कोविड के दौर में जब कई कारोबार अपनी रफ्तार खो रहे थे, उसी समय काजोल ने डिजिटल कंटेंट और ब्रांड कम्युनिकेशन में एक मौका देखा. 2020 में शुरू हुई उनकी कंपनी स्क्रिब्ल्ड आज बूटस्ट्रैप्ड और प्रॉफिटेबल एजेंसी बन चुकी है, जो भारत के साथ यूएई में भी काम कर रही है.

कोविड में दिखा डिजिटल दुनिया का नया मौका

काजोल भेड़ा को शुरू से ही अपना कुछ करने की इच्छा थी. उन्होंने मार्केटिंग की तरफ आने से पहले कई इंटर्नशिप कीं और यूके में मीडिया प्रोडक्शन की पढ़ाई की. दिसंबर 2019 में भारत लौटने के बाद वह नौकरी तलाश रही थीं, लेकिन तभी उन्हें मार्केटिंग और कंटेंट इंडस्ट्री में एक बड़ा गैप दिखाई दिया.

फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक, काजोल ने महसूस किया कि ब्रांड जो कहना चाहते हैं और एजेंसियां जो डिलीवर कर रही हैं, उनके बीच बड़ा अंतर है. इसी सोच ने स्क्रिब्ल्ड की नींव रखी. उसी समय शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया कंटेंट का दौर तेज हो रहा था. कोविड के दौरान ऑनलाइन दुनिया पर लोगों की निर्भरता और बढ़ी. काजोल ने इसी बदलाव को बिजनेस के मौके में बदलने का फैसला किया.  

एक क्लाइंट और एक इंटर्न से शुरू हुआ सफर

काजोल की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि शुरुआत किसी बड़े निवेश या विशाल टीम से नहीं हुई थी. एडटेक टुडे को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि स्क्रिब्ल्ड की शुरुआत सिर्फ एक इंटर्न और एक क्लाइंट के साथ हुई थी.

उस समय कोविड की वजह से कंपनियां मार्केटिंग बजट को लेकर काफी सतर्क थीं. ऐसे माहौल में एक युवा फाउंडर के लिए बिना पुराने नेटवर्क और बड़े पोर्टफोलियो के क्लाइंट का भरोसा जीतना आसान नहीं था.

लेकिन यहीं से उनका बिजनेस मॉडल साफ हुआ. ज्यादा पैसा खर्च करने के बजाय काम की क्वालिटी, क्रिएटिविटी और क्लाइंट के नतीजों पर फोकस किया गया. एडटेक टुडे के मुताबिक, शुरुआती दौर में छोटे डिजिटल बदलावों का असर भी काजोल के लिए इस बात का सबूत बना कि कम संसाधनों में भी वैल्यू बनाई जा सकती है. 

आज करीब 50 लोगों की टीम, फिर भी बूटस्ट्रैप्ड

फोर्ब्स इंडिया की जनवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, स्क्रिब्ल्ड में करीब 50 लोगों की टीम है और कंपनी बूटस्ट्रैप्ड, प्रॉफिटेबल और ग्रो कर रही है.

यानी कंपनी ने अपने विस्तार के लिए मुख्य रूप से बाहरी फंडिंग पर निर्भर रहने के बजाय अपने बिजनेस से कमाई करके आगे बढ़ने का रास्ता चुना. यही इस कहानी का सबसे बड़ा बिजनेस सबक है.

स्क्रिब्ल्ड रिटेनर और प्रोजेक्ट दोनों आधार पर ब्रांडों के साथ काम करती है. कंपनी का पोर्टफोलियो अब सिर्फ छोटे या नए कारोबार तक सीमित नहीं है. उसने नायका, अडानी ग्रुप, अमेजन प्राइम और दूसरे बड़े नामों के साथ प्रोजेक्ट किए हैं. 

अडानी के लिए ऐसा काम जिसने पहचान बदल दी

स्क्रिब्ल्ड के चर्चित कामों में अडानी एयरपोर्ट्स के साथ किया गया ओसप्री कैंपेन खास है.

फोर्ब्स इंडिया के अनुसार, अडानी एयरपोर्ट्स के ड्यूटी फ्री बिजनेस की पहचान को नए तरीके से पेश करने के लिए स्क्रिब्ल्ड ने ब्रांड आइडेंटिटी और विजुअल स्टोरीटेलिंग पर काम किया. इसमें लोगो, ब्रांड बुक और पूरी आइडेंटिटी तैयार करने का काम शामिल था.

काजोल ने फोर्ब्स इंडिया को बताया कि इस रीब्रांडिंग के बाद मुंबई ड्यूटी फ्री में ओसप्री नाम यात्रियों को दिखाई देने लगा. उनके मुताबिक इस काम से ड्यूटी फ्री बिजनेस को सेल्स, ट्रैक्शन और अटेंशन के स्तर पर बड़ा फायदा मिला.  

अमेजन प्राइम के साथ काम ने दिखाया दूसरा हुनर

स्क्रिब्ल्ड ने अमेजन प्राइम के लिए भी कैंपेन किए हैं. फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक, एजेंसी ने अमेजन प्राइम के कई शोज को जेन जेड ऑडियंस तक पहुंचाने के लिए काम किया.

एडटेक टुडे की रिपोर्ट में काजोल ने अमेजन प्राइम की माई फॉल्ट लंदन कैंपेन का उदाहरण देते हुए बताया कि इन्फ्लुएंसर और मीम कंटेंट को सोशल मीडिया की भाषा के साथ जोड़ा गया. उनके अनुसार, फिल्म तीन हफ्तों तक प्राइम इंडिया पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले टाइटल के तौर पर रही. यानी स्क्रिब्ल्ड का मॉडल सिर्फ सुंदर विज्ञापन बनाने तक सीमित नहीं है. फोकस इस बात पर है कि कैंपेन लोगों तक पहुंचे, उनसे कनेक्ट करे और बिजनेस के लिए नतीजा पैदा करे.

नायका से लेकर यूएई तक पहुंचा कारोबार

काजोल की कंपनी के काम का दायरा अब काफी बढ़ चुका है. फोर्ब्स इंडिया ने स्क्रिब्ल्ड के क्लाइंट और प्रोजेक्ट्स में नायका, अडानी, अमेजन प्राइम के साथ एचडीएफसी बैंक, हल्दीराम्स और जॉनी वॉकर जैसे नामों का भी उल्लेख किया है.

2025 में स्क्रिब्ल्ड ने फुट लॉकर इंडिया का डिजिटल और सोशल मीडिया मैंडेट भी हासिल किया था. एडवरटाइजिंग रिपोर्टर के अनुसार, कंपनी को फुट लॉकर इंडिया की डिजिटल मौजूदगी और सोशल फर्स्ट कैंपेन संभालने की जिम्मेदारी मिली. सबसे अहम बात यह है कि कारोबार अब भारत से आगे यूएई तक पहुंच चुका है. फोर्ब्स इंडिया के अनुसार, स्क्रिब्ल्ड ने यूएई में विस्तार किया है और दुबई तथा भारत दोनों जगह के ब्रांडों के साथ काम कर रही है. ([Forbes India][2])

काजोल की सबसे बड़ी सीख पैसा नहीं, सही काम चुनना

किसी भी नए बिजनेस के लिए सबसे मुश्किल सवाल सिर्फ यह नहीं होता कि पैसा कहां से आएगा. सवाल यह भी होता है कि कौन सा काम लेना है और किस काम को मना करना है.

काजोल के मुताबिक, स्क्रिब्ल्ड बनाने के दौरान उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक सही काम के लिए हां और गलत काम के लिए ना कहना सीखा. उनका मानना है कि हर क्लाइंट के साथ काम करना जरूरी नहीं है.

युवा उद्यमियों के लिए यह बात काफी काम की है. शुरुआती दौर में अक्सर हर प्रोजेक्ट अच्छा लगता है क्योंकि कमाई की जरूरत होती है. लेकिन हर छोटा काम लंबे समय में बिजनेस को मजबूत नहीं करता. काजोल की रणनीति बताती है कि कम क्लाइंट लेकर बेहतर काम करना भी ग्रोथ का रास्ता हो सकता है.  

छोटी शुरुआत से बड़ा बिजनेस बनाने का असली फॉर्मूला

काजोल भेड़ा की कहानी को सिर्फ एक महिला उद्यमी की सफलता के तौर पर देखना इस कहानी को छोटा कर देगा. इसका बड़ा सबक उन लोगों के लिए है जो बिना बड़ी पूंजी के सर्विस बिजनेस शुरू करना चाहते हैं.

स्क्रिब्ल्ड की शुरुआत के पीछे तीन चीजें दिखाई देती हैं. पहली, बदलती मार्केट जरूरत को जल्दी पहचानना. दूसरी, कम संसाधनों में काम शुरू करना. तीसरी, क्लाइंट को सिर्फ सर्विस देने के बजाय उसके बिजनेस की समस्या को समझना.

यही वजह है कि डिजिटल मार्केटिंग, कंटेंट, डिजाइन, सोशल मीडिया और ब्रांडिंग जैसी सर्विस इंडस्ट्री उन युवाओं के लिए भी अवसर बन सकती है जिनके पास शुरुआत में बड़ा ऑफिस या भारी निवेश नहीं है.

अब भारत की सबसे बड़ी इंडिपेंडेंट एजेंसी बनने का लक्ष्य

काजोल का लक्ष्य अब सिर्फ स्क्रिब्ल्ड को बड़ा करना नहीं है. फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक, उनका लॉन्ग टर्म विजन स्क्रिब्ल्ड को भारत की सबसे बड़ी इंडिपेंडेंट एजेंसी बनाना है. यूएई विस्तार के बाद ग्लोबल मार्केट में आगे बढ़ना भी उनकी योजना का हिस्सा है. काजोल के लिए स्क्रिब्ल्ड सिर्फ एक कंपनी का नाम नहीं, बल्कि ऐसा ब्रांड बनाने की कोशिश है जिसकी पहचान उसके किए गए काम से बने.

इस कहानी का सबसे उपयोगी सबक यही है कि बड़ा बिजनेस शुरू करने के लिए हमेशा बड़ी पूंजी जरूरी नहीं होती. कई बार सही समय पर सही बदलाव को पहचानना, अपनी स्किल को बिजनेस में बदलना और कम खर्च में लगातार बेहतर काम करना ज्यादा अहम होता है.

अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगल, फेसबुक, x,   इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से. 

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement