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Budget 2025: आम आदमी की पहुंच से बाहर हुए घर, क्या बजट में पूरा होगा सस्ते आशियाने का सपना?

Budget 2025: दिल्ली-NCR हो या उससे सैकड़ों किलोमीटर दूर कोई छोटा शहर, जमीनों की कीमतों से लेकर घरों के दाम तक को पंख लगे हुए हैं. बजट में रियल एस्टेट कंपनियों से लेकर आम आदमी तक ऐसी नीतियों की उम्मीद लगा रहे हैं, जिससे राहत मिल सके.

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Budget 2025: आम आदमी की पहुंच से बाहर हुए घर, क्या बजट में पूरा होगा सस्ते आशियाने का सपना?
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Budget 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व वाली NDA सरकार अपने तीसरे कार्यकाल का दूसरा पूर्ण बजट पेश करने जा रही है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) जब 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी तो हर वर्ग की निगाहें उन पर गी होंगी. महंगाई की मार से चौतरफा पिस रहे मध्य वर्ग और निम्न मध्य वर्ग इस बार बजट में सरकार से राहतों की बारिश की उम्मीद कर रहा है. राहत की सबसे ज्यादा जरूरत उस सेक्टर में की जा रही है, जिसमें बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के सपनों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है. यह सपना है अपने घर का, जो लगातार उछलती कीमतों के कारण आम आदमी की पहुंच से बाहर होता जा रहा है. रियल एस्टेट सेक्टर के दिग्गज भी घरों की बढ़ती कीमतों के कारण खरीदारों की किल्लत का असर महसूस कर रहे हैं और इसके लिए सरकार की नीतियों में बदलाव  की उम्मीद कर रहे हैं ताकि अफोर्डेबेल हाउसिंग की उम्मीद कर रहे आम आदमी को राहत दी जा सके. चलिए हम आपको बताते हैं कि रियल एस्टेट सेक्टर को सरकार से क्या उम्मीदें हैं.

पिछले बजट में जगाई गई थी उम्मीद
मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव 2024 के बाद जुलाई में पेश पूर्ण बजट में घर खरीदारी को मध्य वर्ग के लिए आसान बनाने का वादा किया था. हालांकि इसे लेकर अभी स्पष्ट नीति नहीं बन पाई है. क्रेडाई पश्चिमी यूपी के सचिव दिनेश गुप्ता के अनुसार, 'पिछले साल रियल एस्टेट सेक्टर ने घरों की मांग और आपूर्ति ने नए पैरामीटर बनाए है, लेकिन इसमें अफोर्डेबल हाउसिंग पीछे छूट गया है. अभी 1, 2 और 2+1 बीएचके यूनिटस के खरीदार के हाथ खाली हैं. ऐसे में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए विशेष नीति निर्धारण की आवश्यकता है. अधिक से अधिक लोगों को आसान और सस्ता होम लोन दिलाने के लिए खास कैटेगरी बनाना चाहिए, जिसमें टैक्स इन्सेनिव बढ़ाने के साथ इनपुट टैक्स क्रेडिट भी वापस लाना चाहिए. इससे सेक्टर के अंतिम उपभोक्ता, घर खरीदार, को राहत मिल सके तथा प्रोमोटस को भी उचित प्रोत्साहन मिल सके.'

रियल एस्टेट को भी मिले उद्योगों जैसी सब्सिडी
रियल एस्टेट सेक्टर में भी अन्य उद्योगों की तरह सब्सिडी देने की मांग की जा रही है. रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा होने पर घर बनाने वाले को जमीन और बिल्डिंग मैटेरियल की बढ़ती कॉस्ट को खरीदार के खाते से सब्सिडी के जरिये कम करके उसकी जेब को राहत देने का मौका मिल सकता है. इससे घरों को अफोर्डेबल बनाने में मदद मिलेगी और खरीदारों की संख्या बढ़ने से रियल एस्टेट सेक्टर को बूम मिलेगा. निराला वर्ल्ड के सीएमडी सुरेश गर्ग के अनुसार, 'बजट घर खरीदारों को घर खरीदने तथा प्रोमोटर्स को निर्माण हेतु प्रोत्साहित करने वाला होना चाहिए. रियल एस्टेट सेक्टर की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए प्रॉपर्टी खरीदने पर इन्सेनटिव बढ़ाने चाहिए जिसमें इनकम टैक्स की धारा 24 में मिलने वाली छूट की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख तक करना चाहिए. रियल एस्टेट सेक्टर को उद्योग का दर्जा मिलने की मांग हर वर्ष आती है और अब रियल एस्टेट रेगुलेटर स्थापित होने के बाद सरकार को अनुमति दे देनी चाहिए.'

होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने का समय
रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े लोगों का मानना है कि होम लोन के ब्याज पर इनकम टैक्स में मिलने वाली छूट की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए. इससे किराये पर रहने वाले लोगों को घर खरीदने की प्रेरणा मिलेगी. आरजी ग्रुप के निदेशक हिमांशु गर्ग के अनुसार, 'सरकार की सकारात्मक नीतियों से रियल एस्टेट सेक्टर में रुके हुए प्रोजेक्ट फिर से बनने लगे हैं. फर्स्ट टाइम होम बायर को मिलने वाला लाभ सेकंड टाइम होम बायर पर भी लागू होने से घर खरीदारी तेजी होगी. होम लोन के ब्याज पर मिलने वाला टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने का सही समय है. जीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट को वापस लाना चाहिए, जिसका लाभ बिल्डर होम बायर्स को देते थे.' रेनॉक्स ग्रुप के प्रबंध निदेशक शैलेन्द्र शर्मा का कहना है,'डायरेक्ट टैक्स और होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए. सरकार को जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट वापस लाना चाहिए. इसका लाभ घर खरीदारों को ही मिलेगा. 1200 वर्ग फुट तक के घरों को अफोर्डेबल होम्स की श्रेणी में लाना चाहिए और विशेष छूट के तहत इनका बजट 40-60 लाख तक रखना चाहिए.'

इको फ्रेंडली और अफोर्डेबल होम्स के लिए हो खास प्रावधान
रियल एस्टेट सेक्टर का मानना है कि लोग अब सस्ते घर के साथ ही उनके इको फ्रेंडली होने को भी तरजीह दे रहे हैं. सभी बड़े शहर बढ़ते प्रदूषण से जूझ रहे हैं, जिसमें इस तरह के घरों की मांग बढ़ रही है. ऐसे में इन घरों के लिए खास प्रावधान होने चाहिए. ईरोस ग्रुप के निदेशक अवनीश सूद का कहना है,'रियल एस्टेट सेक्टर को सस्टैनबल डेवलपमेंट के लिए सही प्रोत्साहन की जरूरत है. ग्रीन और इको फ्रेंडली घरों के लिए विशेष छूट का प्रावधान रहना चाहिए, जिससे प्रमोटर घर खरीदने वालों को अधिक लाभ दे सके. रियल एस्टेट को इंडस्ट्री स्टेट्स मिलने से बड़े आवासीय परियोजना के लिए टैक्स फ्री बॉन्ड इश्यू करने की राह खुलेगी.' केडब्लू ग्रुप के निदेशक पंकज कुमार जैन के अनुसार,'अफोर्डबल हाउसिंग लिंक्ड सब्सिडी स्कीम जैसी योजना से 30-60 लाख वाले बजट घरों का निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा. इससे बड़े वर्ग के खरीदारों को घर लेने का विकल्प मिल पाएगा. सरकार को लागत नियंत्रित करने के लिए पीपीपी मॉडल का तरीका तलाशना चाहिए. अफोर्डेबल सेगमेंट के लिए कार्पेट एरिया के पुनर्निर्धारण और होम लोन पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने की भी जरूरत है.'

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