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न्यूबॉर्न बेबीज की समस्या से निकला बिजनेस आइडिया और कपल ने खड़ा कर दिया देश का पहला बेबी स्किनकेयर ब्रांड

India's First Baby Skincare Brand Success Story: बेंगलुरु के इश्‍वर्या अय्यर और गणेश सहस्रनाम ने बच्चों की संवेदनशील त्वचा और सेंसेटिविटी की समस्या को बिजनेस अवसर में बदला. दोनों ने अपनी बचत से 2 करोड़ रुपये लगाए. 2.4 साल रिसर्च के बाद बी.बाथ लॉन्च हुआ और अब 1200 से ज्यादा परिवारों तक पहुंच चुका है.

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न्यूबॉर्न बेबीज की समस्या से निकला बिजनेस आइडिया और कपल ने खड़ा कर दिया देश का पहला बेबी स्किनकेयर ब्रांड

न्यूबॉर्न बेबीज के लिए कुछ अलग करने की ठानी और बना दी बेबीज केयर कंपनी (फोटो सोशल मीडिया)

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बच्चे किसी स्किनकेयर प्रोडक्ट को सिर्फ उसके लेबल या उसमें मौजूद सामग्री देखकर पसंद नहीं करते. उसके लिए खुशबू, टेक्सचर, त्वचा पर महसूस होने वाला एहसास और पूरा सेंसेरी अनुभव भी मायने रखता है. इसी बात ने बेंगलुरु की इश्‍वर्या अय्यर और उनके पति गणेश सहस्रनाम को एक ऐसा बिजनेस शुरू करने के लिए प्रेरित किया, जिसका फोकस सिर्फ सुरक्षित सामग्री नहीं बल्कि सेंसेरी सेफ्टी पर है.

स्टार्टअपपेडिया की 3 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में स्थापित बी.बाथ खुद को भारत का पहला सेंसेरी-सेफ बेबी स्किनकेयर ब्रांड बताता है. कंपनी का कहना है कि इसके प्रोडक्ट बायोलॉजिकली अट्यून, क्लिनिकली टेस्टेड और अर्ली चाइल्डहुड एजुकेटर द्वारा डिजाइन किए गए हैं.

इस कहानी का खास पहलू यह है कि यहां बिजनेस का आइडिया किसी मार्केट सर्वे से नहीं, बल्कि बच्चों के व्यवहार और परिवार के निजी अनुभव से निकला. इश्‍वर्या ने एक दशक से ज्यादा समय तक मोंटेसरी, वॉल्डॉर्फ और स्पेशल-नीड्स क्लासरूम में काम किया. इसी दौरान उन्होंने देखा कि किसी बच्चे के लिए खुशबू या टेक्सचर जैसी छोटी चीज भी बड़ा सेंसेरी अनुभव बन सकती है.

फिर जब वह खुद मां बनीं तो उनके बेटों को एक्जिमा और एलर्जिक राइनाइटिस की समस्या हुई. लगातार ऐसे प्रोडक्ट की तलाश, जिसे बच्चे स्वीकार करें और उनकी एलर्जी को न बढ़ाए, आखिरकार बिजनेस आइडिया में बदल गई.

बेंगलुरु की मार्केटिंग नहीं, 2 करोड़ की अपनी बचत दांव पर लगाई

बी.बाथ की शुरुआत किसी बड़े निवेशक की फंडिंग से नहीं हुई. इश्‍वर्या और गणेश ने अपनी बचत से 2 करोड़ रुपये का बूटस्ट्रैप्ड कैपिटल लगाया. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों ने 2023 में ब्रांड स्थापित करने का फैसला किया और इसके बाद करीब 2.4 साल सेंसेरी-सेफ फॉर्मूलेशन तैयार करने में लगाए.

गणेश के पास मैन्युफैक्चरिंग, फॉर्मुलेशन, कंप्लायंस और सप्लाई चेन नेटवर्क का 18 साल से ज्यादा का अनुभव है. उन्होंने क्वालिटी एश्योरेंस, रॉ मटेरियल सोर्सिंग और फैक्ट्री स्केल-अप जैसे क्षेत्रों में भी काम किया है. दूसरी तरफ इश्‍वर्या का अनुभव अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन और बच्चों के व्यवहार को समझने में रहा है.

यही दोनों की विशेषज्ञता इस ब्रांड का आधार बनी. एक तरफ बच्चों के व्यवहार और सेंसेरी जरूरतों की समझ थी, दूसरी तरफ फॉर्मुलेशन और मैन्युफैक्चरिंग का अनुभव.

आम ग्राहक के लिए इसका मतलब यह है कि किसी प्रोडक्ट की कीमत सिर्फ बोतल या पैकेजिंग से तय नहीं होती. लंबे समय तक चलने वाला बेबीकेयर प्रोडक्ट तैयार करने के पीछे रिसर्च, टेस्टिंग और क्लिनिकल वैलिडेशन पर भी काफी पैसा खर्च हो सकता है.

बच्चों के लिए प्रोडक्ट बनाने में 200 से ज्यादा परिवारों की मदद

बी.बाथ ने अपने प्रोडक्ट तैयार करने के दौरान 200 से ज्यादा परिवारों को शामिल किया. गणेश के मुताबिक, पहले एसकेयू डिजाइन करने में इन परिवारों की मदद ली गई. इसके बाद 72 परिवारों के साथ चार सप्ताह का क्लिनिकल ट्रायल किया गया.

इसके अलावा मैस्कॉट स्पिनकंट्रोल और फेयर लैब्स से स्वतंत्र टेस्टिंग भी कराई गई. कंपनी ने ऐसे मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के साथ काम किया, जिसके पास जीएमपी, जीएलपी, आईएसओ और एफडीए कंप्लायंस से जुड़ी सुविधाएं थीं.

यहां एक महत्वपूर्ण छिपा हुआ एंगल भी है. बी.बाथ का मॉडल केवल यह कहने पर निर्भर नहीं है कि किसी प्रोडक्ट में क्या नहीं है. कंपनी का दावा है कि वह बच्चे के प्रोडक्ट को स्वीकार करने की क्षमता को भी डिजाइन प्रक्रिया का हिस्सा बना रही है. यानी समस्या को सिर्फ केमिकल सेफ्टी की तरह देखने के बजाय इस्तेमाल के अनुभव से जोड़ा गया है.

हालांकि शुरुआत आसान नहीं थी. कई फॉर्मूलेशन फेल हुए. कंपनी का इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग सेटअप योजना के अनुसार काम नहीं कर पाया और बाद में को-लाइसेंसिंग का रास्ता अपनाया गया. इंस्टाग्राम आधारित मार्केटिंग भी ब्रांड के लिए सही साबित नहीं हुई. वेबसाइट, मेटा और गूगल विज्ञापनों तथा रिटेंशन मार्केटिंग के लिए एजेंसियों पर भी पैसा खर्च हुआ, लेकिन इनमें भी कुछ प्रयास असफल रहे.

फिर मिली पहली बड़ी मान्यता

बी.बाथ के लिए बड़ा मोड़ तब आया जब उसके सभी पांच बेबी एसकेयू को ईडब्ल्यूजी वेरिफाइड सर्टिफिकेशन मिला. इसके बाद क्लाउड नाइन मैटरनिटी हॉस्पिटल्स के भीतर रिटेल लॉन्च भी सफल रहा. कंपनी के अनुसार, उसके हर प्रोडक्ट में इन-हाउस फॉर्मुलेशन कंट्रोल, क्लिनिकल टेस्टिंग, डर्मेटोलॉजिस्ट अप्रूवल, पीडियाट्रिशियन रिव्यू, पीएच टेस्टिंग और ईडब्ल्यूजी वेरिफिकेशन किया जाता है.

बी.बाथ के बेबी रेंज में पांच प्रोडक्ट हैं. इनमें मॉइस्चराइजिंग वॉश एंड शैम्पू, नर्चरिंग फेस एंड बॉडी ऑयल, कम्फर्ट एंड रिलीफ लोशन, हाइड्रेटिंग फेस बटर और स्कैल्प नौरिशिंग हेयर ऑयल शामिल हैं. इसके अलावा फैमिली रेंज में आठ प्रोडक्ट हैं.

इश्‍वर्या के अनुसार, इनमें शीया बटर, जोजोबा, आर्गन, ओट एक्सट्रैक्ट, स्नो मशरूम एक्सट्रैक्ट, हायलूरोनिक एसिड, सेरामाइड और नायसिनामाइड जैसे प्रमुख इंग्रीडिएंट्स इस्तेमाल किए जाते हैं. कंपनी का कहना है कि उसके प्रोडक्ट्स में सल्फेट्स, पैराबेन्स, फॉर्मल्डिहाइड, सिंथेटिक फ्रेगरेंस, फ्थेलेट्स, पीईजी, पीपीजी, फोम बूस्टर्स, टैल्क कंटैमिनेंट्स और नैनोपार्टिकल्स नहीं हैं. सभी प्रोडक्ट पूरी तरह फ्रेगरेंस-फ्री हैं. यहां ग्राहक के लिए सबसे अहम बात कीमत भी है. बी.बाथ के प्रोडक्ट्स की कीमत 499 रुपये से 1,399 रुपये के बीच है. यानी यह मास मार्केट के बजाय प्रीमियम बेबीकेयर सेगमेंट को टारगेट कर रहा है.

5.57 अरब डॉलर का बाजार, लेकिन असली मौका कहां है?

स्टार्टअपपेडिया ने मोर्डोर इंटेलिजेंस के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत का बेबी केयर प्रोडक्ट्स मार्केट 2026 में 5.57 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. इसके 2031 तक 11.78 फीसदी सीएजीआर से बढ़कर 9.72 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.

डिस्पोजेबल इनकम में बढ़ोतरी, शहरीकरण, बच्चों की सेहत और हाइजीन को लेकर बढ़ती जागरूकता और प्रीमियम बेबीकेयर पर खर्च करने की बढ़ती क्षमता इस बाजार को आगे बढ़ा रही है.

यहीं बी.बाथ के बिजनेस मॉडल का सबसे दिलचस्प हिस्सा दिखाई देता है. बाजार में पहले से ही नेचुरल, क्लीन और फ्री-फ्रॉम प्रोडक्ट्स मौजूद हैं. बी.बाथ ने सेंसेरी सेफ्टी को अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है.

इसका मतलब आम माता-पिता के लिए यह नहीं है कि हर महंगा या सेंसेरी-सेफ बताया गया प्रोडक्ट जरूरी तौर पर उनके बच्चे के लिए बेहतर होगा. बच्चे की त्वचा और एलर्जी की स्थिति अलग हो सकती है. लेकिन बाजार के नजरिए से यह दिखाता है कि पैरेंट्स अब सिर्फ प्रोडक्ट की कीमत या ब्रांड नाम नहीं, बल्कि इस्तेमाल के अनुभव को भी महत्व दे रहे हैं.

1200 परिवारों से 11.1 लाख रुपये रेवेन्यू, अब अगला लक्ष्य बड़ा

बी.बाथ ने अक्टूबर 2025 में बाजार में प्रवेश किया था. स्टार्टअपपेडिया के अनुसार, अब तक कंपनी 1200 से ज्यादा परिवारों को सर्व कर चुकी है और लगभग 11.1 लाख रुपये का कुल रेवेन्यू दर्ज किया है. कंपनी के लिए सबसे मजबूत कन्वर्जन चैनल क्लिनिक आधारित फिजिकल रिटेल रहा है. फिलहाल क्लाउड नाइन में दो रिटेल प्वाइंट्स हैं और बेंगलुरु के केआईएमएस हॉस्पिटल में शॉप-इन-शॉप मौजूदगी भी है.

अब कंपनी मार्च 2027 तक और क्लाउड नाइन क्लिनिक स्टोर्स, मैटरनिटी हॉस्पिटल्स और बेबी स्टोर्स तक पहुंच बढ़ाने की तैयारी कर रही है. उसका लक्ष्य मार्च 2027 तक हर महीने 30 लाख रुपये का रेवेन्यू हासिल करना है. कंपनी आगे बेबी रेंज से निकलकर पूरे परिवार के लिए स्किनकेयर सिस्टम बनाने की योजना पर भी काम कर रही है. गणेश के मुताबिक, भविष्य में अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने पर भी विचार है. इससे मार्जिन पर कंट्रोल और प्रोडक्ट डेवलपमेंट की स्पीड बेहतर हो सकती है.

इस पूरे सफर से निकलने वाला सबसे बड़ा बिजनेस सबक यही है कि समस्या जितनी व्यक्तिगत हो, उसका बाजार उतना ही बड़ा हो सकता है, बशर्ते उसके पीछे वास्तविक जरूरत मौजूद हो. इश्‍वर्या ने बच्चों के साथ वर्षों के अनुभव और अपने परिवार की परेशानी को एक ऐसे गैप के रूप में देखा, जिसे बाकी कंपनियां उतनी प्राथमिकता नहीं दे रही थीं.

हालांकि 2 करोड़ रुपये लगाने के मुकाबले 11.1 लाख रुपये का अब तक का रेवेन्यू बताता है कि यह अभी शुरुआती दौर का बिजनेस है. आगे असली परीक्षा यह होगी कि क्या बी.बाथ अपने प्रीमियम प्राइसिंग, क्लिनिकल दावों और सेंसेरी-सेफ पोजिशनिंग को बड़े पैमाने पर ग्राहकों तक पहुंचाकर 30 लाख रुपये मासिक रेवेन्यू के लक्ष्य तक ले जा पाता है.

लेकिन एक बात साफ है. बेंगलुरु के इस पति-पत्नी ने बेबी स्किनकेयर में एक ऐसी जरूरत को बिजनेस मॉडल बनाया है, जिसे उन्होंने पहले घर और क्लासरूम में महसूस किया था. यही इस स्टार्टअप की सबसे अलग कहानी है.

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