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लोन रिजेक्ट होने पर भी ये शख्स बन गया रियल एस्टेट का किंग, जानिए डॉक्टरी छोड़ कैसे खड़ा किया 1.6 बिलियन डॉलर का एम्पायर

Wealth creation strategies for startups: हीरानंदानी ग्रुप के सह-संस्थापक डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने एक पॉडकास्ट में अपनी संघर्षपूर्ण यात्रा साझा की है. शून्य से शिखर तक पहुंचने की इस कहानी में उन्होंने बताया कि कैसे वित्तीय तंगी और लोन रिजेक्शन के बावजूद उन्होंने रियल एस्टेट साम्राज्य की नींव रखी.

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लोन रिजेक्ट होने पर भी ये शख्स बन गया रियल एस्टेट का किंग, जानिए डॉक्टरी छोड़ कैसे खड़ा किया 1.6 बिलियन डॉलर का एम्पायर

सफलता से डरे बिना कैसे खड़ा किया अरबों का साम्राज्य: एक रियल एस्टेट लीजेंड की मास्टरक्लास (फोटो सोशल मीडिया)

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  • डॉक्टर बनने का सपना छोड़ रियल एस्टेट में रखा कदम.
  •  बैंक से लोन रिजेक्शन का सामना कर खड़ा किया साम्राज्य.
  •  वित्तीय संघर्षों के बीच धैर्य और दूरदर्शिता की जीत.
  •  पारिवारिक बिजनेस और विरासत बनाने की अनसुनी सीख.
  •  नए उद्यमियों के लिए सफलता का व्यवहारिक मंत्र.

जब हम किसी बड़ी बिल्डिंग या पॉश इलाके को देखते हैं, तो अक्सर उसके पीछे की चमक-धमक ही नजर आती है. लेकिन क्या आपने कभी उन रातों के बारे में सोचा है जब कोई उद्यमी अपनी कंपनी को डूबने से बचाने के लिए संघर्ष कर रहा होता है? डॉ. निरंजन हीरानंदानी की कहानी सिर्फ सीमेंट और ईंटों के निर्माण की नहीं, बल्कि उन जज्बातों की है जो एक आम आदमी को बिजनेस लीडर बनाते हैं.

 डॉक्टरी का सपना और जीवन का यू-टर्न 

जीवन की विडंबना देखिए, डॉ. निरंजन हीरानंदानी कभी डॉक्टर बनना चाहते थे. आज वे भले ही स्टेटोस्कोप नहीं थामते, लेकिन उन्होंने रियल एस्टेट की नब्ज को बखूबी पकड़ लिया है. उनके शुरुआती करियर के दिन कॉर्पोरेट जगत के कड़े पाठों से भरे थे. बहुत कम लोग जानते हैं कि एक सफल उद्यमी बनने के लिए उन्होंने कितनी बार अपनी प्राथमिकताओं को बदला. उन्होंने न केवल अपने सपनों को बदला, बल्कि अपने हालातों के हिसाब से खुद को ढालना सीखा. यह हमें सिखाता है कि करियर का लक्ष्य पत्थर की लकीर नहीं होता, बल्कि उसे समय के साथ बदलना बुद्धिमानी है.

अस्वीकृति का दर्द और कामयाबी का स्वाद 

किसी भी बिजनेस की शुरुआत में सबसे बड़ा डर लोन रिजेक्शन का होता है. डॉ. हीरानंदानी के लिए भी यह सफर आसान नहीं था. जब बैंक ने उन्हें ऋण देने से मना किया, तो उनके सामने दो ही रास्ते थे या तो वे हार मान लेते या फिर अपनी योजना को और मजबूत करते. उन्होंने दूसरे रास्ते को चुना. उनका अनुभव बताता है कि जब आप वित्तीय संकट में होते हैं, तो आपकी असल परीक्षा शुरू होती है. एक आम आदमी के लिए इसका सबक साफ है अगर आपके पास विजन है, तो छोटी-मोटी असफलताएं सिर्फ आपकी तैयारी का हिस्सा हैं.

कितना है मौजूदा दौर में उनकी कंपनी का टर्नओवर?

डॉ. निरंजन हीरानंदानी की व्यक्तिगत नेटवर्थ लगभग 1.4 बिलियन डॉलर से 1.6 बिलियन डॉलर (भारतीय रुपयों में करीब 12,000 से 18,000 करोड़ रुपये के बीच) आंकी गई है,  कंपनी के हालिया बड़े प्रोजेक्ट्स उनके व्यापार के स्तर को दर्शाते हैं. द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार हाल ही में अलीबाग में घोषित 'हीरानंदानी सैंड्स' (Hiranandani Sands) टाउनशिप का अकेले का रेवेन्यू पोटेंशियल (राजस्व क्षमता) ही 17,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया गया है.  

फोर्ब्स के अनुसार हीरानंदानी ग्रुप अब केवल रियल एस्टेट तक सीमित नहीं है. उनका व्यापार डेटा सेंटर्स, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक पार्कों, ऊर्जा (energy infrastructure) और वित्तीय सेवाओं (Hiranandani Financial Services) तक फैला हुआ है. उनकी वित्तीय सेवा इकाई (HFSPL) के पास भी हजारों करोड़ का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) है, जो उनके विशाल औद्योगिक विस्तार का संकेत देता है. विभिन्न क्षेत्रों (Real Estate, Data Centers, Logistics, Finance) में काम करते हैं और उनके कई प्रोजेक्ट्स ही 15,000-20,000 करोड़ रुपये की रेवेन्यू क्षमता वाले हैं, तो यह स्पष्ट है कि उनका कुल ग्रुप कारोबार और संपत्ति का मूल्यांकन बहुत विशाल है.  

लीडरशिप की असली परिभाषा और विरासत का निर्माण 

हीरानंदानी ग्रुप का साम्राज्य महज एक बिजनेस मॉडल नहीं है. उन्होंने अपनी बात में साफ किया कि लीडरशिप का मतलब सिर्फ हुकुम चलाना नहीं, बल्कि टीम को साथ लेकर चलना है. जब बात पारिवारिक विरासत की आती है, तो वे इसे एक बोझ की तरह नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं. आज के समय में जब स्टार्टअप्स बहुत जल्दी सफल होने की होड़ में हैं, डॉ. हीरानंदानी का यह नजरिया कि बिजनेस को टिकने के लिए समय देना पड़ता है, बहुत जरूरी है.

आम आदमी के लिए इसका मतलब क्या है? 

इस कहानी का सबसे छिपा हुआ पहलू यह है कि धन सृजन (wealth creation) रातों-रात नहीं होता. डॉ. निरंजन की सफलता का रहस्य उनके धैर्य में है. हम अक्सर अपने दैनिक जीवन में छोटी-मोटी बाधाओं पर घबरा जाते हैं, लेकिन यदि हम यह समझ लें कि हर बड़ा खिलाड़ी कभी न कभी हारा था, तो हम अपने फैसलों को लेकर और अधिक आत्मविश्वासी हो सकते हैं. उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि सफलता केवल संसाधन होने से नहीं, बल्कि सही मानसिक मजबूती (mindset) से आती है. चाहे आप एक स्टूडेंट हों, नौकरीपेशा हों या फिर अपना छोटा सा काम शुरू करने की सोच रहे हों, उनकी सीख यह है कि हार न मानना ही सबसे बड़ी जीत है.
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