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NSE IPO allotment status check: 15 सितंबर को कई आईपीओ निवेशकों के लिए अहम दिन है. रेंटोमोजो, करमतारा इंजीनियरिंग, एलसीसी प्रोजेक्ट्स, स्टीमहाउस समेत कई इश्यू के शेयर अलॉटमेंट की प्रक्रिया आज है. निवेशक बीएसई, एनएसई, केफिन टेक और एमयूएफजी इंटाइम इंडिया से अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं.
आईपीओ में आवेदन करना आसान है, लेकिन असली इंतजार अलॉटमेंट के दिन होता है. जिस निवेशक ने किसी इश्यू में पैसा लगाया है, उसके लिए 15 सितंबर का दिन इसलिए अहम है क्योंकि कई कंपनियों के शेयर अलॉटमेंट की प्रक्रिया आज होने वाली है.
खास बात यह है कि सभी आईपीओ का अलॉटमेंट स्टेटस एक ही जगह से चेक नहीं होगा. कुछ कंपनियों के लिए बीएसई और एनएसई के अलावा रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर भी जानकारी मिलेगी. यानी निवेशक को यह पता होना चाहिए कि उसका आवेदन कहां और कैसे चेक करना है.
दिए गए सोर्स के मुताबिक, रेंटोमोजो का आईपीओ कुल 72.88 गुना सब्सक्राइब हुआ. इसमें क्यूआईबी हिस्से को 177.29 गुना, एनआईआई हिस्से को 67.93 गुना, रिटेल निवेशकों के हिस्से को 15.59 गुना और एम्प्लॉयी के लिए रिजर्व हिस्से को 21.03 गुना सब्सक्रिप्शन मिला.
करमतारा इंजीनियरिंग के आईपीओ में भी जबरदस्त डिमांड देखने को मिली. यह इश्यू कुल 62.63 गुना भर गया. क्यूआईबी पोर्शन 159.59 गुना, एनआईआई पोर्शन 48.55 गुना और रिटेल निवेशकों का हिस्सा 13.26 गुना सब्सक्राइब हुआ.
इसका आम निवेशक के लिए सीधा मतलब है कि ज्यादा सब्सक्रिप्शन होने पर रिटेल कैटेगरी में शेयर मिलना आसान नहीं रहता. इसलिए सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि आईपीओ कितने गुना भरा, अलॉटमेंट मिलने की संभावना कैटेगरी और उपलब्ध शेयरों पर भी निर्भर करती है.
स्टीमहाउस इंडिया के आईपीओ को कुल 30.49 गुना सब्सक्रिप्शन मिला. इसमें क्यूआईबी हिस्सा 43.91 गुना, एनआईआई हिस्सा 44.30 गुना और रिटेल पोर्शन 16.90 गुना सब्सक्राइब हुआ.
एलसीसी प्रोजेक्ट्स का आईपीओ भी निवेशकों के बीच काफी डिमांड में रहा. यह कुल 48.51 गुना भर गया. इसमें क्यूआईबी हिस्सा 78.69 गुना, एनआईआई हिस्सा 62.99 गुना और रिटेल निवेशकों का हिस्सा 25.56 गुना सब्सक्राइब हुआ.
यही वजह है कि इन इश्यू में आवेदन करने वाले निवेशकों की नजर अब अलॉटमेंट स्टेटस पर है. अगर शेयर अलॉट नहीं होते हैं तो आवेदन के लिए ब्लॉक किया गया पैसा आगे रिलीज होने की प्रक्रिया में जाएगा.
मणिपाल पेमेंट एंड आइडेंटिटी सॉल्यूशंस का आईपीओ कुल 1.42 गुना सब्सक्राइब हुआ. इसमें क्यूआईबी हिस्से को 1.26 गुना, एनआईआई हिस्से को 1.22 गुना और रिटेल निवेशकों के हिस्से को 2.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला.
वहीं एसेट रिकंस्ट्रक्शन का आईपीओ कुल 20.10 गुना सब्सक्राइब हुआ. क्यूआईबी हिस्से में 52.65 गुना, एनआईआई हिस्से में 15.69 गुना और रिटेल हिस्से में 3.39 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया.
इन आंकड़ों से एक दिलचस्प अंतर दिखाई देता है. सभी आईपीओ में निवेशकों की दिलचस्पी एक जैसी नहीं रही. मणिपाल पेमेंट का कुल सब्सक्रिप्शन 1.42 गुना रहा, जबकि रेंटोमोजो 72.88 गुना तक पहुंच गया. यानी आईपीओ बाजार में कंपनी-दर-कंपनी निवेशकों की पसंद में बड़ा अंतर है.
अगर आपने बीएसई के आईपीओ में आवेदन किया है तो बीएसई की वेबसाइट (https://www.bseindia.com/static/investors/application_statuschecksystem.asp)पर जाकर अलॉटमेंट स्टेटस देखा जा सकता है. यहां इश्यू टाइप में इक्विटी चुनना होगा. इसके बाद ड्रॉपडाउन से संबंधित आईपीओ का नाम चुनकर एप्लिकेशन नंबर या पैन दर्ज करना होगा. सर्च करने के बाद आवेदन की जानकारी सामने आ जाएगी.
एनएसई पर अलॉटमेंट से जुड़ी जानकारी देखने के लिए आईपीओ वाले पेज पर जाना होगा. वहां इक्विटी एंड एसएमई आईपीओ बिड डिटेल्स का विकल्प चुनकर इश्यू सिंबल में कंपनी का नाम सेलेक्ट करना होगा. इसके बाद पैन नंबर और एप्लिकेशन नंबर डालकर सबमिट करना होगा. निवेशक को एप्लिकेशन नंबर और पैन जैसी जानकारी संभालकर रखनी चाहिए. गलत जानकारी डालने पर स्टेटस देखने में परेशानी हो सकती है.
कुछ आईपीओ के लिए रजिस्ट्रार की वेबसाइट भी अलॉटमेंट स्टेटस चेक करने का अहम जरिया है. रेंटोमोजो, एलसीसी प्रोजेक्ट्स और स्टीमहाउस का स्टेटस केफिन टेक पर चेक किया जा सकता है.
इसके लिए केफिन टेक की आईपीओ स्टेटस वेबसाइट पर जाकर ड्रॉपडाउन से कंपनी का नाम चुनना होगा. इसके बाद पैन, एप्लिकेशन नंबर या डीपी क्लाइंट आईडी जैसी जानकारी भरकर सबमिट करना होगा.
वहीं मणिपाल पेमेंट, एसेट रिकंस्ट्रक्शन और करमतारा इंजीनियरिंग के लिए एमयूएफजी इंटाइम इंडिया की वेबसाइट पर अलॉटमेंट स्टेटस देखा जा सकता है. यहां आईपीओ चुनने के बाद पैन, एप्लिकेशन नंबर, डीपी/क्लाइंट आईडी या अकाउंट नंबर/आईएफएससी में से किसी एक विकल्प के जरिए स्टेटस चेक किया जा सकता है.
आईपीओ में आवेदन करने वाले हर निवेशक को शेयर मिलना जरूरी नहीं है. खासकर ऐसे इश्यू में जहां सब्सक्रिप्शन कई गुना ज्यादा रहा हो, अलॉटमेंट की प्रक्रिया निवेशकों के लिए लकी ड्रॉ जैसी स्थिति पैदा कर सकती है.
अगर शेयर अलॉट नहीं होते हैं तो आवेदन के लिए ब्लॉक की गई रकम रिलीज होने की प्रक्रिया में जाती है. अगर शेयर मिल जाते हैं तो निवेशक के डीमैट अकाउंट में संबंधित शेयर क्रेडिट किए जाते हैं.
यहां एक बात समझना जरूरी है कि आईपीओ में शेयर मिलना और उससे मुनाफा होना दो अलग-अलग बातें हैं. अलॉटमेंट मिलने के बाद भी लिस्टिंग और बाजार में शेयर की कीमत उसके प्रदर्शन को तय करेगी.
15 सितंबर को इन आईपीओ में आवेदन करने वाले निवेशकों को सबसे पहले अपना अलॉटमेंट स्टेटस चेक करना चाहिए. रेंटोमोजो और करमतारा इंजीनियरिंग जैसे ज्यादा सब्सक्राइब हुए इश्यू में शेयर मिलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जबकि अलग-अलग कैटेगरी में सब्सक्रिप्शन का स्तर भी काफी अलग रहा है.
इसलिए सिर्फ आईपीओ का नाम या कुल सब्सक्रिप्शन देखकर फैसला न लें. अपना एप्लिकेशन नंबर, पैन और डीपी डिटेल तैयार रखें और संबंधित बीएसई, एनएसई, केफिन टेक या एमयूएफजी इंटाइम इंडिया प्लेटफॉर्म पर स्टेटस जांचे. यही सबसे सीधा तरीका है यह जानने का कि आपके आवेदन के बदले शेयर मिले हैं या नहीं.
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