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Nifty 50 outlook Tuesday September: शुक्रवार की भारी बिकवाली के बाद घरेलू बाजार में संभलने के संकेत दिखे हैं. निफ्टी का अहम सपोर्ट 23,230 पर है, जबकि महंगे क्रूड और कमजोर रुपये से दबाव बना हुआ है. मंगलवार के प्री-ओपनिंग में निवेशकों को चुनिंदा और सतर्क रणनीति अपनाने की जरूरत है.
शेयर बाजार में शुक्रवार की भारी बिकवाली ने निवेशकों को एक बार फिर डरा दिया. कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 740 अंक तक टूट गया और निफ्टी भी 23,300 के आसपास पहुंच गया. लेकिन कहानी का दूसरा हिस्सा ज्यादा महत्वपूर्ण है. दिन के निचले स्तरों से बाजार ने जोरदार वापसी की और आखिर में नुकसान काफी सीमित रह गया.
अब बड़ा सवाल यह है कि यह सिर्फ करेक्शन है या बाजार में किसी बड़ी गिरावट की शुरुआत हो चुकी है. फिलहाल उपलब्ध संकेतों को देखें तो बाजार का ढांचा कमजोर जरूर है, लेकिन अभी इसे क्रैश कहना जल्दबाजी होगी. असली फैसला आज यानी मंगलवार 15 सितंबर को होगा, क्योंकि कल सोमवार को गणेश चतुर्थी के चलते एनएसई और बीएसई बंद था. चलिए कमोडिटी और मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय से बाजार के प्रीओपनिंग से पहले कि स्टॉक्स आज क्या रंग दिखा सकते हैं.
शुक्रवार की शुरुआत बेहद कमजोर रही. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था. महंगे तेल से भारत की महंगाई, चालू खाते और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की चिंता ने बाजार को हिला दिया.
लेकिन दिन बढ़ने के साथ क्रूड में कुछ नरमी आई और बाजार के निचले स्तरों पर खरीदारी लौटी. सेंसेक्स दिन के निचले स्तर से करीब 620 अंक संभला, जबकि निफ्टी भी लगभग 200 अंक की रिकवरी करके बंद हुआ. यही शुक्रवार की सबसे अहम बात है. यानी बिकवाली मजबूत है, लेकिन हर निचले स्तर पर खरीदार भी मौजूद हैं. इसे बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है. हालांकि यह अभी ट्रेंड बदलने का पक्का सबूत नहीं है.
तकनीकी तस्वीर अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुई है. एसबीआई सिक्योरिटीज के सुदीप शाह के मुताबिक निफ्टी का आरएसआई 40 के नीचे है और इंडेक्स 20 दिन तथा 50 दिन के ईएमए से नीचे कारोबार कर रहा है. इसका मतलब शॉर्ट टर्म में बाजार पर अभी भी मंदी का दबाव बना हुआ है.
निफ्टी के लिए 23,250 से 23,230 का जोन अहम सपोर्ट माना जा रहा है. अगर यह स्तर टिकता है तो निचले स्तरों पर खरीदारी से रिकवरी की कोशिश हो सकती है. लेकिन 23,230 के नीचे टिकाऊ कमजोरी आई तो 23,080 के आसपास अगला दबाव दिखाई दे सकता है. दूसरी तरफ 23,600 से 23,620 के ऊपर मजबूती आने पर 23,800 तक पुलबैक की गुंजाइश बन सकती है.
इसलिए मंगलवार का सबसे बड़ा संकेत सिर्फ यह नहीं होगा कि निफ्टी हरे रंग में खुला या लाल रंग में. ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि 23,230 के आसपास खरीदार कितनी मजबूती दिखाते हैं और 23,600 से ऊपर बाजार टिक पाता है या नहीं.
यहां किसी एक शेयर को सीधे खरीदने या बेचने की सलाह देना सही नहीं होगा. लेकिन शुक्रवार के कारोबार ने कुछ सेक्टरों और शेयरों में कमजोरी जरूर दिखाई है, जहां निवेशकों को ज्यादा सावधानी की जरूरत है.
निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 2.30 फीसदी गिरा. हिंदाल्को, जेएसडब्ल्यू स्टील और टाटा स्टील जैसे शेयरों पर दबाव रहा. रियल्टी इंडेक्स भी 2 फीसदी से ज्यादा गिरा. ऑटो, एनर्जी, ऑयल एंड गैस और पीएसयू बैंक इंडेक्स भी कमजोर रहे.
हिंदाल्को करीब 3.21 फीसदी गिरकर प्रमुख नुकसान वाले शेयरों में रहा. कोचीन शिपयार्ड करीब 9 फीसदी गिरा, जिसके पीछे आईसीआईसीआईडायरेक्ट डॉट कॉम की रेटिंग को बाय से होल्ड किए जाने की खबर थी. ऐसे शेयरों में केवल इसलिए नई खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है कि भाव एक दिन में काफी गिर चुका है.
खास तौर पर कमजोर सेक्टर में गिरते शेयर को सिर्फ “सस्ता हो गया” मानकर पकड़ना इस समय नुकसानदायक हो सकता है. पहले यह देखना जरूरी है कि गिरावट रुक रही है या लगातार नए निचले स्तर बन रहे हैं.
बाजार की सबसे दिलचस्प तस्वीर संस्थागत निवेश के आंकड़ों में दिखाई दे रही है. 11 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई ने कैश मार्केट में 930.90 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने 1,968.17 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की.
यह फर्क काफी महत्वपूर्ण है. विदेशी पैसा फिलहाल दबाव बना रहा है, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशक निचले स्तरों पर खरीदारी कर रहे हैं. यही वजह है कि बाजार में तेज गिरावट के बाद रिकवरी देखने को मिल रही है.
फिर भी इसे पूरी तरह तेजी का संकेत नहीं माना जा सकता. सितंबर में अब तक एफआईआई की कुल नेट खरीदारी सिर्फ 578.75 करोड़ रुपये रही है, जबकि डीआईआई की नेट खरीदारी 24,986.96 करोड़ रुपये रही है. यानी घरेलू पैसा बाजार को सहारा दे रहा है, लेकिन विदेशी बिकवाली और वैश्विक जोखिम पूरी तस्वीर को कमजोर बनाए हुए हैं.
कमोडिटी और बाजार विशेषज्ञ देवकृष्ण पांडेय के हालिया सोने के विश्लेषण में एमसीएक्स पर करीब 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम को महत्वपूर्ण सपोर्ट बताया गया था. इसके नीचे करीब 1.49 लाख रुपये अगला मजबूत सपोर्ट और 1.55 लाख रुपये के ऊपर टिकने पर 1.60 लाख रुपये की संभावना बताई गई थी.
इस कमोडिटी नजरिए से एक महत्वपूर्ण बात निकलती है. जब सोना, तेल और दूसरी कमोडिटीज में तेज हलचल होती है तो उसका असर सिर्फ कमोडिटी बाजार तक सीमित नहीं रहता. महंगा क्रूड भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्था के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है. इससे रुपये, महंगाई, बॉन्ड यील्ड और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है.
इसलिए शेयर निवेशकों को इन दिनों सिर्फ निफ्टी का चार्ट देखकर फैसला नहीं करना चाहिए. क्रूड और रुपया भी रोज की निगरानी में होने चाहिए.
शुक्रवार को रुपया 95.55 प्रति डॉलर पर बंद हुआ और पूरे सप्ताह करीब 1.1 फीसदी कमजोर हुआ. यह चार महीनों में रुपये की सबसे तेज साप्ताहिक गिरावट थी. बढ़ते तेल दाम और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड इसके बड़े कारणों में रहे.
रुपया कमजोर होने से भारत के लिए आयात महंगा हो सकता है. सबसे पहले इसका असर तेल जैसे बड़े आयात बिल पर दिखाई देता है. इसके बाद महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बन सकता है.
यही वजह है कि अगर मंगलवार को क्रूड फिर 108 से 110 डॉलर के आसपास जाता है और रुपया 96 के करीब दबाव में आता है, तो शेयर बाजार की रिकवरी मुश्किल हो सकती है. इसके उलट क्रूड में बड़ी नरमी और रुपये में स्थिरता बाजार के लिए राहत का संकेत होगी.
फिलहाल उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर बाजार को क्रैश घोषित करना सही नहीं होगा. शुक्रवार को निफ्टी और सेंसेक्स अपने दिन के निचले स्तरों से काफी ऊपर बंद हुए. घरेलू संस्थागत खरीदारी भी लगातार बाजार को सहारा दे रही है.
लेकिन खतरा पूरी तरह टला भी नहीं है. निफ्टी लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ और शुक्रवार के कारोबार में 16 में से 15 प्रमुख सेक्टर कमजोर रहे. छोटे और मिडकैप शेयरों में गिरावट लार्जकैप के मुकाबले ज्यादा रही. इसलिए मौजूदा स्थिति को “क्रैश” से ज्यादा “कमजोर बाजार में तेज करेक्शन और ऊंची वोलैटिलिटी” के तौर पर देखना ज्यादा सही है.
मंगलवार को सबसे पहले निफ्टी का 23,230 का स्तर देखना जरूरी होगा. इसके नीचे टिकने पर कमजोरी बढ़ सकती है. 23,600 से 23,620 के ऊपर मजबूती आने पर तस्वीर थोड़ी बेहतर होगी.
दूसरा संकेत ब्रेंट क्रूड का होगा. 100 डॉलर से काफी ऊपर बना क्रूड भारतीय बाजार के लिए लगातार जोखिम है. तीसरा संकेत रुपये का होगा. चौथा एफआईआई और डीआईआई की खरीद-बिक्री होगी.
और पांचवां सबसे बड़ा संकेत बैंकिंग और आईटी जैसे बड़े सेक्टरों की भागीदारी होगी. अगर बाजार सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों के सहारे ऊपर जाता है और चौड़ाई कमजोर रहती है तो उसे मजबूत रिकवरी मानना जल्दबाजी होगी.
ऐसे बाजार में शुक्रवार को गिरा हुआ शेयर मंगलवार को सस्ता दिख सकता है, लेकिन सस्ता और सही वैल्यू एक ही चीज नहीं होती. अगर किसी शेयर का पूरा सेक्टर दबाव में है तो सिर्फ कीमत गिरने को खरीदारी का संकेत मानना जोखिम बढ़ा सकता है.
दूसरी तरफ मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के निवेशक हर गिरावट को घबराहट के बजाय वैल्यू खोजने के मौके के तौर पर देख सकते हैं. लेकिन एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय चरणबद्ध खरीदारी और पर्याप्त कैश रखना इस तरह के अनिश्चित माहौल में ज्यादा व्यावहारिक रणनीति हो सकती है.
शुक्रवार की गिरावट ने बाजार की कमजोरी जरूर दिखाई, लेकिन उसी दिन निचले स्तरों से आई तेज रिकवरी ने यह भी बता दिया कि खरीदार पूरी तरह गायब नहीं हुए हैं. इसलिए अभी सबसे बड़ा खतरा क्रैश से ज्यादा अस्थिरता और सेक्टर आधारित गिरावट का है.
मंगलवार को 23,230 का सपोर्ट और 23,600 से 23,620 का रेजिस्टेंस बाजार की दिशा समझने में अहम रहेंगे. साथ ही क्रूड, रुपया और एफआईआई की बिकवाली पर नजर रखना जरूरी होगा. जब तक ये तीनों दबाव कम नहीं होते, तेज उछाल को भी सावधानी से देखना बेहतर होगा.
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