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अगले 30 दिनों में शेयर बाजार का बड़ा खेल, इन 4 मोर्चों पर चूके तो डूब सकती है गाढ़ी कमाई

Stock Market Current situation:शेयर बाजार के मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच अगले 30 दिन छोटे निवेशकों के लिए अग्निपरीक्षा जैसे हैं. बाजार में बड़ा खेल शुरू हो चुका है और विक्स, एफआईआई-डीआईआई फ्लो, सेक्टर रोटेशन और अर्निंग सीजन के 4 मोर्चों पर अगर सावधानी नहीं बरती, तो गाढ़ी कमाई डूब सकती है.

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अगले 30 दिनों में शेयर बाजार का बड़ा खेल, इन 4 मोर्चों पर चूके तो डूब सकती है गाढ़ी कमाई

क्या अगले 30 दिनों में कमाई के ये 4 नए रास्ते खोल रहा है शेयर मार्केट? (फोटो एआई)

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Next 30 days stock market strategy: शेयर बाजार में आज जो हलचल देखने को मिली है, उसने एक बार फिर आम निवेशकों के मन में डर और आशंकाएं पैदा कर दी हैं. लेकिन बाजार के जाने-माने एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय का मानना है कि यह तो बस एक शुरुआत है. उनके मुताबिक, असली हलचल तो आने वाले 30 दिनों में देखने को मिलेगी, जहां बाजार एक बड़ा खेल खेलने की तैयारी में है. अगर छोटे निवेशक इस दौरान सही रणनीति नहीं अपनाते हैं, तो उनके पोर्टफोलियो को भारी नुकसान हो सकता है.

देव ने साफ चेतावनी दी है कि बाजार में इस समय चार ऐसे बड़े मोर्चे सक्रिय हो चुके हैं, जिनकी अनदेखी किसी भी आम निवेशक की पूरी जमा-पूंजी को संकट में डाल सकती है. अगर आप इस बाजार में टिके रहना चाहते हैं और अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो एक्सपर्ट के बताए इन चार इशारों को ध्यान से समझना होगा.

पहला मोर्चा: विक्स (VIX) का बढ़ता ग्राफ और देवकृष्ण पांडेय की चेतावनी

मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय का कहना है कि जब बाजार में अस्थिरता बढ़ती है, तो सबसे पहले विक्स (VIX) यानी वोलाटिलिटी इंडेक्स में हलचल होती है. इसे बाजार का फियर इंडेक्स भी कहा जाता है. आज के बाजार के रुख को देखते हुए पांडेय ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में विक्स में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जो सीधे तौर पर निवेशकों की घबराहट को बढ़ाएगा.

आम निवेशकों पर इसका सीधा असर यह होता है कि वे डर में आकर गलत फैसले ले लेते हैं. देवकृष्ण पांडेय की सलाह है कि जब विक्स का स्तर ऊंचा हो, तो बाजार में एक झटके में बड़ी रकम लगाने की गलती कभी न करें. इस मोर्चे पर समझदारी इसी में है कि आप लंपसम निवेश के बजाय एसआईपी या टुकड़ों में खरीदारी का रास्ता चुनें ताकि बाजार के इस डर का फायदा आपके पक्ष में आ सके.

दूसरा मोर्चा: एफआईआई और डीआईआई (FII/DII) फ्लो की खींचतान पर रखें नजर

बाजार के इस बड़े खेल में देवकृष्ण पांडेय ने दूसरे सबसे महत्वपूर्ण मोर्चे के रूप में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) के फंड फ्लो को रेखांकित किया है. पांडेय के अनुसार, बाजार की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं या फिर घरेलू म्यूचुअल फंड्स और संस्थाएं खरीदारी करके इसे संभाल रही हैं.

आम जनता के लिए यह मोर्चा इसलिए जरूरी है क्योंकि इसी पैसे के दम पर शेयर्स के दाम ऊपर या नीचे जाते हैं. देवकृष्ण पांडेय का मानना है कि अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज होती है, तो बाजार में गिरावट गहरा सकती है. इसलिए अगले 30 दिनों तक आपको यह देखना होगा कि बड़े प्लेयर्स किस तरफ रुख कर रहे हैं, ताकि आप भी उसी हिसाब से अपने निवेश को सुरक्षित रख सकें.

तीसरा मोर्चा: सेक्टर रोटेशन का चक्रवात, कहीं गलत दांव तो नहीं लग गया?

देवकृष्ण पांडेय ने एक और छिपे हुए मोर्चे की तरफ इशारा किया है जिसे 'सेक्टर रोटेशन' कहा जाता है. आज बाजार में जो बदलाव दिख रहे हैं, उनसे साफ है कि बड़े फंड मैनेजर्स अब उन सेक्टर्स से मुनाफावसूली कर रहे हैं जो बहुत महंगे हो चुके हैं, और उस पैसे को उन सेक्टर्स में डाल रहे हैं जो अभी तक नहीं चले हैं.

छोटे निवेशकों को आगाह करते हुए पांडेय कहते हैं कि अगर आप किसी एक ही सेक्टर से प्यार कर बैठेंगे, तो नुकसान तय है. मान लीजिए कि बाजार अब आईटी या फॉर्मा से हटकर बैंकिंग या इंफ्रास्ट्रक्चर की तरफ मुड़ रहा है, तो आपको भी अपने निवेश को उसी हिसाब से बदलना होगा. इस मोर्चे पर अगर आप चूक गए और पुराने ट्रेंड के भरोसे बैठे रहे, तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

चौथा मोर्चा: कमाई (Earnings) का सीजन, नतीजों की कसौटी पर परखें शेयर

अगले 30 दिनों का सबसे बड़ा इम्तिहान कंपनियों के तिमाही नतीजे यानी अर्निंग सीजन होने वाला है. देवकृष्ण पांडेय के मुताबिक, किसी भी कंपनी के शेयर की असली ताकत उसकी कमाई होती है. इस सीजन में देश की दिग्गज कंपनियों से लेकर मिडकैप कंपनियों के वित्तीय नतीजे सामने आएंगे, जो बाजार को एक नई दिशा देंगे.

देवकृष्ण पांडेय का कहना है कि इस मोर्चे पर आम निवेशकों को बहुत सतर्क रहना होगा. जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से खराब आएंगे, उनके शेयर तेजी से गिर सकते हैं. पांडेय की राय है कि सिर्फ नाम देखकर किसी शेयर को अपने पास न रखें, बल्कि इस अर्निंग सीजन में कंपनी के मुनाफे और कर्ज की स्थिति को देखकर ही उसमें बने रहने या निकलने का फैसला लें.

एक्सपर्ट की एक्सक्लूसिव अंतर्दृष्टि: रिटेल लिक्विडिटी बनेगी आपका ढाल

देवकृष्ण पांडेय ने इस पूरे माहौल के बीच आम निवेशकों को एक सकारात्मक भरोसा भी दिया है. उनका मानना है कि भले ही विदेशी निवेशक बाजार में अस्थिरता पैदा करें, लेकिन भारतीय रिटेल निवेशकों द्वारा हर महीने किया जाने वाला निवेश बाजार के लिए एक मजबूत दीवार की तरह खड़ा है. अगले 30 दिनों के इस बड़े खेल में यह घरेलू लिक्विडिटी ही छोटे निवेशकों को बड़े क्रैश से बचाएगी. इसलिए घबराने के बजाय, संयम के साथ अच्छे शेयर्स में बने रहना ही इस समय की सबसे बड़ी जीत होगी.

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