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लंदन की डिग्री, नेहरू-गांधी परिवार से नाता, फिर भी चुना 'नाई' का काम और खड़ी कर दी 500 करोड़ की सल्तनत

How to build franchise business model: लंदन की डिग्री और नेहरू-गांधी परिवार से कनेक्शन होने के बावजूद एक शख्स ने 'नाई' का काम चुना. शुरुआती दिनों में कंपनी में झाड़ू-पोंछा तक किया, लेकिन अपनी जिद्द से आज 1000 से ज्यादा आउटलेट्स और 500 करोड़ का बिजनेस खड़ा कर दिया.

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 लंदन की डिग्री, नेहरू-गांधी परिवार से नाता, फिर भी चुना 'नाई' का काम और खड़ी कर दी 500 करोड़ की सल्तनत

भारत के सबसे अमीर नाई की कहानी जानते हैं आप? (फोटो एआई)

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क्या कोई ऐसा इंसान जिसके पास लंदन की बड़ी डिग्री हो और जिसका उठना-बैठना देश के सबसे बड़े राजनैतिक घराने नेहरू-गांधी परिवार के साथ हो, वो बाल काटने का काम चुन सकता है? सुनने में यह किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है, लेकिन यह हकीकत है. सफलता की बड़ी-बड़ी कहानियों में अक्सर महंगे सूट और आलीशान दफ्तर ही दिखाई देते हैं, पर असली प्रेरणा वही होती है जो जमीन की मिट्टी और कड़े संघर्ष से जुड़ी हो. यह दास्तान एक ऐसे ही जुनूनी उद्यमी की है जिसने अपनी जिद्द के दम पर पूरे देश के हेयर कटिंग बिजनेस का चेहरा ही बदलकर रख दिया.

सफलता की कहानियों में अक्सर आलीशान ऑफिस और महंगे सूट की तस्वीरें दिखती हैं, लेकिन असली प्रेरणा वह है जो मिट्टी की खुशबू से जुड़ी हो. यह कहानी है एक ऐसे व्यक्ति की, जिसने कभी एक कंपनी में झाड़ू-पोंछा किया, तीन साल तक कड़ा संघर्ष देखा और आज 1000 से ज्यादा आउटलेट्स के जरिए अपनी एक अलग पहचान बनाई है.

फर्श से अर्श तक का वो सफर जब हाथ में झाड़ू और आंखों में बड़े सपने थे

जी हां, यहां बात हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीब की हो रही है. आज भले ही दुनिया उनके ब्रांड के पीछे दीवानी हो, लेकिन इस 500 करोड़ के साम्राज्य की नींव बेहद गुमनामी और कड़े संघर्ष के बीच रखी गई थी. एक दौर ऐसा भी था जब जेब खाली थी और आने वाले कल का कोई ठिकाना नहीं था. इस सफर की शुरुआत में उन्होंने एक कंपनी में करीब तीन साल तक सफाई और झाड़ू-पोंछे का काम भी किया. उस मुश्किल वक़्त में जब आम इंसान हार मान लेता है, इस बंदे के भीतर कुछ बड़ा करने की आग लगातार जल रही थी. उन्होंने उसी दौर में यह समझ लिया था कि जिस काम को समाज छोटा समझकर छोड़ देता है, अगर उसमें थोड़ी सी क्वालिटी और प्रोफ़ेशनलिज्म जोड़ दिया जाए, तो पूरी की पूरी इंडस्ट्री पर राज किया जा सकता है. उन्होंने सफाई के काम को भी एक सिस्टम की तरह देखा और बिजनेस की बारिकियों को समझा.

जावेद हबीब के दादा नेहरू के आधिकारिक हेयरड्रेसर थे

मशहूर हेयर स्टाइलिस्ट जावेद हबीब के दादा, नजीर अहमद, भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आधिकारिक हेयरड्रेसर (नाई) थे. नजीर अहमद ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी के बाल भी काटे थे और वह भारत के अंतिम वायसराय, लॉर्ड माउंटबेटन के भी व्यक्तिगत नाई थे. उनका परिवार राष्ट्रपति भवन में ही रहता था और जावेद हबीब का जन्म भी वहीं हुआ था.

खुद को 'नाई' कहने में शर्म नहीं बल्कि गर्व का अहसास है

जावेद हबीब ने भी अपने पुश्तैनी काम को एक बड़े कॉर्पोरेट ब्रांड में तब्दील कर दिया. आज जब लोग थोड़ी सी कामयाबी मिलते ही अपनी जड़ें भूल जाते हैं, यह शख्स आज भी खुद को गर्व से 'नाई' कहता है. यही वो सादगी है जिसने देश के मिडिल क्लास ग्राहकों का दिल जीत लिया. उन्होंने हेयर कटिंग और ब्युटी सर्विस को गली-मोहल्ले की तंग दुकानों से बाहर निकाला और एयर-कंडीशंड सैलून के जरिए सीधे आम आदमी के बजट में फिट कर दिया. जब ग्राहकों को कम पैसों में वीआईपी वाली सर्विस मिलने लगी, तो देखते ही देखते पूरे देश में इनका सिक्का जम गया.

जब कामयाबी इतनी बड़ी हो जाए कि लोग नाम चुराने लगें

जावेद हबीब की बिजनेस एम्पायर की सफलता का सबसे बड़ा सबूत आज बाजार में देखने को मिलता है. जब कोई ब्रांड बेहद लोकप्रिय हो जाता है, तो नकली लोग भी सक्रिय हो जाते हैं. जावेद खुद बताते हैं कि देश के कई कोनों में इस ब्रांड के नाम पर हजारों इल्लीगल यानी बिना परमिशन के फ्रैंचाइजी दुकानें चल रही हैं. बाजार का यह खेल दिखाता है कि इस नाम की डिमांड आम जनता के बीच किस कदर है. लोग इस नाम पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं, इसीलिए छोटे दुकानदार भी इनके नाम का बोर्ड लगाकर धंधा चमकाना चाहते हैं. यह इस ब्रांड के लिए एक बड़ी चुनौती तो है ही, लेकिन साथ ही यह इस बात का भी प्रमाण है कि ब्रांड की वैल्यू कितनी जबरदस्त है.

जावेद हबीब की सफलता के 3 सुनहरे सबक  

1. जावेद कहते हैं कि उनकी सफलता के पीछे तीन ही सबक हैं. पहला अपनी जड़ों को कभी नहीं भूले वो. सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी खुद को 'नाई' कहने में जो सादगी है, वही ग्राहकों का भरोसा जीतती है. लोग आपसे जुड़ते हैं, आपके ब्रांड से नहीं.

2.  सिस्टम बनाएं, दुकान नहीं: अगर आप 1000 आउटलेट्स खोलना चाहते हैं, तो आपको एक ऐसी प्रक्रिया बनानी होगी जो आपके बिना भी उतनी ही कुशलता से काम करे. उन्होंने झाड़ू-पोंछा करने से लेकर मालिक बनने तक 'सिस्टम' की बारीकियों को समझा.

3.कठिनाइयों को अवसर में बदलें: आज उनके नाम पर जो इल्लीगल फ्रैंचाइजी चल रही हैं, वह यह दर्शाती है कि मार्केट में आपके काम की कितनी जबरदस्त मांग है. एक लीडर के तौर पर, इसे अपने कंट्रोल में लेकर इसे और बेहतर बनाने की जरूरत होती है

आपके लिए इस पूरी कहानी का सीधा संदेश क्या है?

इस अद्भुत कामयाबी से आम इंसान को बहुत कुछ सीखने को मिलता है. पहली बात तो यह कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बस उसे करने का आपका नजरिया बड़ा होना चाहिए. दूसरी बात, अगर आपको लाइफ में 1000 आउटलेट्स तक पहुंचना है, तो दुकानदारी नहीं बल्कि एक मजबूत सिस्टम बनाना होगा जो आपके बिना भी काम कर सके. और सबसे आखिरी बात, जब बाजार में आपकी नकल होने लगे, तो समझ जाइये कि आप कामयाबी के उस मुकाम पर हैं जहां लोग आपकी बराबरी नहीं कर पा रहे हैं. यह कहानी साबित करती है कि तकदीर सिर्फ किस्मत के भरोसे नहीं, बल्कि अपनी मेहनत की स्याही से खुद लिखी जाती है.

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