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इन 7 होलसेल मार्केट के दम पर चल रहा है 2.5 लाख करोड़ का इंटिरियर बिजनेस, ई-कॉमर्स दिग्गजों का भी है ठिकाना

Top home decor wholesale markets: भारत का होम डेकोर बाजार वर्तमान में करीब 30 अरब डॉलर (2.5 लाख करोड़ रुपये) से अधिक का हो चुका है. इस रिपोर्ट में देश के उन टॉप 7 थोक बाजारों का विश्लेषण है, जहां से माल खरीदकर आज के बड़े ई-कॉमर्स दिग्गजों और डी2सी ब्रांड्स ने अपनी नींव रखी.

इन 7 होलसेल मार्केट के दम पर चल रहा है 2.5 लाख करोड़ का इंटिरियर बिजनेस, ई-कॉमर्स दिग्गजों का भी है ठिकाना

इंटीरियर डिजाइनर्स का फेवरेट थोक बाजार कहां है? (फोटो एआई)

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Where do the fancy items that decorate your homes come from? घर को खूबसूरत और आलीशान दिखाने की चाहत ने आज भारतीय बाजार में एक नई क्रांति ला दी है. क्या आप जानते हैं कि जिन आलीशान और फैंसी होम डेकोरेशन के आइटम्स को आप बड़े-बड़े शोरूम या नामी ऑनलाइन वेबसाइट्स से हजारों रुपये में खरीदते हैं, उनकी असल शुरुआत कहां से होती है?

देश की बड़ी-बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों, डी2सी स्टार्टअप्स और नामी डेकोर ब्रांड्स ने अपनी शुरुआती सप्लाई चेन इन्हीं बाजारों से स्थापित की थी. आईबीईएफ (IBEF) और नेस्कॉम की हालिया उद्योग रिपोर्टों के डेटा के अनुसार, भारत का होम डेकोर बाजार आज 30 बिलियन डॉलर (करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये) के आंकड़े को पार कर चुका है और यह सालाना 15 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रहा है. आइए जानते हैं देश के उन 7 सबसे बड़े थोक बाजारों के बारे में, जिन्होंने हजारों नए उद्यमियों को करोड़पति बना दिया और आप भी यहां से माल खरीदकर मीशो और शॉप्सी जैसे प्लेटफॉर्म पर बेच कर घर बैठे लाखों कमा सकते हैं.

1. सदर बाजार और भागीरथी पैलेस (नई दिल्ली)

दिल्ली का सदर बाजार और लाइटों के लिए मशहूर भागीरथी पैलेस देश का सबसे बड़ा थोक हब माना जाता है. इस बाजार की संकरी गलियों में वो ताकत है जो पूरे देश के रीटेल मार्केट को कंट्रोल करती है.

सप्लाई चेन का सच:  ऑनलाइन मार्केटप्लेस (जैसे मीशो और शुरुआती दौर में फ्लिपकार्ट के कई बड़े सेलर) आज भी वॉल हैंगिंग, 3D सीनरी, आर्टिफिशियल पौधे, और फैंसी लाइट्स यहीं से थोक भाव में उठाते हैं. जो सामान यहां 50 से 100 रुपये में मिलता है, वह ऑनलाइन ब्रांडेड पैकेजिंग के साथ 500 से 800 रुपये में बिकता है.

अगर कोई आम उपभोक्ता सीधे यहां का रुख करता है, तो उसे रीटेल शोरूम के मुकाबले 70 से 80 फीसदी तक कम दाम में अपने घर के लिए बेहतरीन सजावटी सामान मिल जाता है, जिससे उनके हजारों रुपये बचते हैं.

2. क्रॉफर्ड मार्केट (मुंबई)

मुंबई का यह ऐतिहासिक बाजार केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी भारत के लिए होम डेकोर और इंटीरियर का सबसे बड़ा केंद्र है.

कारोबारियों का पसंदीदा अड्डा: मुंबई और पुणे के बड़े-बड़े इंटीरियर डिजाइनर और लग्जरी बुटीक स्टोर्स के मालिक अपनी शुरुआती इन्वेंट्री यहीं से प्लान करते हैं. यहां मिलने वाले इंपोर्टेड शोपीस, फेयरी लाइट्स और चाइनीज व कोरियन सिरेमिक पॉट्स की रीटेल मार्जिन 200 गुना तक होती है. नए जमाने के इंस्टाग्राम रीसेलर्स ने इसी मार्केट के दम पर अपना बिजनेस खड़ा किया है.

मुंबई जैसे महंगे शहर में मिडिल क्लास परिवारों के लिए यह बाजार किसी वरदान से कम नहीं है, जहां वे बजट के अंदर अपने आशियाने को प्रीमियम लुक दे सकते हैं.

3. चिकपेट मार्केट (बेंगलुरु)

दक्षिण भारत का सिलिकॉन वैली भले ही हाई-टेक हो, लेकिन जब बात घर सजाने के थोक सामान की आती है, तो चिकपेट का कोई मुकाबला नहीं है.

स्टार्टअप्स का बैकबोन: बेंगलुरु के कई बड़े होम फर्निशिंग और डेकोर स्टार्टअप्स ने शुरुआती दिनों में अपने वेंडर इसी बाजार से चुने थे. यहां की होम टेक्सटाइल, कुशन कवर्स, पर्दे और ब्रास (पीतल) के एंटीक आइटम्स की सप्लाई सीधे दक्षिण भारत के आलीशान फ्लैट्स तक होती है.

स्थानीय लोग बिना किसी बिचौलिए के सीधे मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर कॉरपेट, कुशन और पर्दे खरीद पाते हैं, जिससे उनका बजट नहीं बिगड़ता.

4. जोहरी बाजार और त्रिपोलिया बाजार (जयपुर)

राजस्थानी हस्तशिल्प और शाही लुक वाले होम डेकोर की मांग आज पूरी दुनिया में है. जयपुर के इन बाजारों ने देश के बड़े ट्रेडिशनल और एथनिक ब्रांड्स को जन्म दिया है.

ब्रांड्स की सफलता की कहानी: लजयपुर के डिजिटल बी2बी प्लेटफॉर्म्स और बड़े मैन्युफैक्चरर्स ने भारत के 70 लाख कारीगरों को जोड़कर एक बड़ा नेटवर्क बनाया है. जयपुरी बेडशीट, ब्लू पॉटरी, मीनाकारी शोपीस और बड़े दर्पण (मिरर) जो आप बड़े ऑनलाइन ब्रांड्स पर देखते हैं, वे मूल रूप से यहीं से सोर्स किए जाते हैं. यहां 300 रुपये में मिलने वाली कारीगरी महानगरों के शोरूम में 3,000 रुपये तक में बिकती है.

सीधे कारीगरों से सामान खरीदने का मौका मिलने से ग्राहकों को शुद्ध और असली हस्तशिल्प बहुत ही वाजिब दामों पर मिल जाता है.

5. न्यू मार्केट और बड़बाजार (कोलकाता)

पूर्वी भारत का यह सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र अपने विंटेज और पारंपरिक कलाकृतियों के लिए जाना जाता है.

थोक व्यापार का बड़ा खेल: कोलकाता का बड़बाजार जूट के बने वाल हैंगिंग्स, पारंपरिक टेराकोटा (मिट्टी के सजावटी सामान) और कॉलोनियल एरा (ब्रिटिश काल) के डिजाइन वाले लैंप्स का मुख्य सप्लायर है. कोलकाता के कई बड़े एक्सपोर्टर्स और ऑनलाइन क्युरेटेड स्टोर्स ने यहीं से अपनी सप्लाई चेन की शुरुआत की थी. दुर्गा पूजा या दिवाली जैसे त्योहारों पर आम लोग बहुत ही मामूली कीमत पर अपने घरों को जगमगा सकते हैं.

6. मुरादाबाद और खुर्जा का थोक हब (उत्तर प्रदेश)

भले ही ये दो अलग शहर हैं, लेकिन होम डेकोर के मामले में इन्हें जुड़वां थोक बाजार माना जाता है. मोरदाबाद पीतल (ब्रास) और मेटल डेकोर के लिए दुनिया भर में मशहूर है, जबकि खुर्जा सिरेमिक और क्रॉकरी का गढ़ है.

दिग्गजों का गुप्त सोर्स: अमेज़न और फ्लिपकार्ट के टॉप होम डेकोर सेलर और बड़े-बड़े कॉर्पोरेट गिफ्टिंग हाउस सीधे इन फैक्ट्रियों से माल उठाते हैं. जो सिरेमिक पॉट खुर्जा में 30 रुपये का बनता है, वह दिल्ली-मुंबई के लाइफस्टाइल स्टोर्स में 450 रुपये का बिकता है. डेटा बताते हैं कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा होम डेकोर एक्सपोर्टर है, जिसमें इस बेल्ट का सबसे बड़ा योगदान है.

सीधे मैन्युफैक्चरिंग हब होने के कारण स्थानीय रीटेलर्स को सस्ता माल मिलता है, जिससे अंतिम उपभोक्ता तक भी चीजें किफायती दाम में पहुंचती हैं.

7. लाड बाजार (हैदराबाद)

चारमीनार के पास स्थित यह बाजार अपने ऐतिहासिक और निजामी स्टाइल के इंटीरियर सामानों के लिए प्रसिद्ध है.

विरासत से व्यापार: दक्षिण भारत के बड़े वेडिंग प्लानर्स और थीम-बेस्ड रेस्तरां चलाने वाले कारोबारी यहां से थोक में झूमर, लाख के बने आर्टिफैक्ट्स और एंटिक वाल पीस खरीदते हैं. बड़े डेकोर सप्लायर्स के लिए यह बाजार भारी मार्जिन कमाने का सबसे सुरक्षित जरिया रहा है.

पुराने जमाने की शाही सजावट का शौक रखने वाले आम लोग कम खर्च में अपने घर को राजसी लुक दे पाते हैं.

डिजिटल बदलाव और आम जनता को सीधा फायदा

इस पूरी व्यवस्था में पिछले कुछ सालों में एक बहुत बड़ा और छिपा हुआ बदलाव आया है. पहले इन थोक बाजारों पर कुछ बड़े पारंपरिक व्यापारियों का एकाधिकार (मोनोपॉली) होता था, जिससे आम खरीदार या छोटे दुकानदार को सही कीमत नहीं मिल पाती थी. लेकिन अब, डिजिटल इंडिया और बी2बी स्टार्टअप्स के आने से पूरी सप्लाई चेन पारदर्शी हो गई है.

अब एक आम गृहिणी या छोटा रीसेलर भी घर बैठे सीधे इन बाजारों के सप्लायर्स से जुड़कर 15 से 35 फीसदी तक की सीधी बचत कर पा रहा है. इसका सीधा असर यह हुआ है कि मिडिल क्लास घरों में भी अब वो लग्जरी आइटम्स दिखने लगे हैं, जो कभी सिर्फ अमीरों के घरों की शोभा बढ़ाते थे.

जानिए क्या बताती हैं इन मार्केट्स से जुड़ी रिपोर्ट्स

इन्वेस्ट इंडिया और IBEF (इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन) की रिपोर्ट के अनुसार भारत के होम डेकोर, हस्तशिल्प (Handicrafts) और टेक्सटाइल मार्केट साइज 30 अरब डॉलर से अधिक की ग्रोथ और 15% CAGR है.  

नेस्कॉम (NASSCOM) और रेडसीर (RedSeer) की ई-कॉमर्स रिपोर्ट बताती है कि भारत में डी2सी (D2C) ब्रांड्स की ग्रोथ, सप्लाई चेन के डिजिटलाइजेशन और ऑनलाइन सेलर्स द्वारा थोक बाजारों (जैसे खुर्जा, मुरादाबाद, दिल्ली और जयपुर) से की जाने वाली डायरेक्ट सोर्सिंग के लिए इन संस्थाओं की ई-कॉमर्स उद्योग सबसे सटीक माध्यम हैं.

MSME मंत्रालय (Government of India): उत्तर प्रदेश के 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) हब के तहत मुरादाबाद के मेटल क्राफ्ट और खुर्जा के सिरेमिक उद्योग के प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट डेटा की जानकारी msme.gov.in या ODOP की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है.

दिल्ली व्यापार महासंघ के अनुसार दिल्ली के सदर बाजार और भागीरथी पैलेस जैसे ऐतिहासिक थोक बाजारों के व्यापारिक टर्नओवर और देशव्यापी सप्लाई चेन नेटवर्क के अनुमानित आंकड़ों के लिए दिल्ली और मुंबई के स्थानीय मर्चेंट एसोसिएशंस की ओर से जारी बयान और बिजनेस जर्नल्स (जैसे इकोनॉमिक टाइम्स या फाइनेंशियल एक्सप्रेस) के ग्राउंड रिपोर्ट्स मुख्य आधार हैं.

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