बिजनेस
हैदराबाद के 19 वर्षीय युवा नीहार बिसाबाथिनी ने कॉलेज और स्कूलों के बाहर चुरोस बेचकर अपने सफर की शुरुआत की थी. अपनी मेहनत और अनोखे मेनू के दम पर उन्होंने मात्र कुछ वर्षों में 22 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन वाला ब्रांड 'चुरोल्टो' खड़ा कर दिया, जो आज प्रीमियम मिठाइयों और कैफे संस्कृति को नया रूप दे रहा है
क्या आप भी अपनी नौकरी या पढ़ाई से अलग हटकर कुछ अपना शुरू करने का सपना देख रहे हैं, लेकिन पैसों की कमी या डूबने के डर से कदम पीछे खींच लेते हैं? अक्सर हमें लगता है कि एक बड़ा ब्रांड खड़ा करने के लिए करोड़ों की शुरुआती पूंजी की जरूरत होती है. लेकिन हैदराबाद के एक युवा ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है. सिर्फ 19 साल की उम्र में, जब युवाओं को अपने भविष्य की सही समझ भी नहीं होती, इस लड़के ने सड़कों पर खड़े होकर सामान बेचना शुरू किया और आज देश के सबसे महंगे और प्रीमियम कैफे ब्रांड्स में से एक खड़ा कर दिया है. मीठे के शौकीनों के लिए यह कहानी इसलिए खास है क्योंकि यह सिर्फ स्वाद की नहीं, बल्कि सेहत और एक नए लाइफस्टाइल की भी कहानी है.
हैदराबाद के नीहार बिसाबाथिनी का बचपन रेस्तरां और बिजनेस के माहौल में बीता था, लेकिन जब उन्होंने खुद का कुछ करने की सोची, तो उनके पास कोई बड़ी रकम नहीं थी. नीहार बताते हैं कि जब आप सिर्फ 19 साल के होते हैं और आपके पास खोने के लिए कुछ नहीं होता, तो आप बिल्कुल जमीनी स्तर से शुरुआत करते हैं. उन्होंने स्पैनिश डिश 'चुरोस' (एक तरह की मीठी पेस्ट्री) को चुना और उसे विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के सामने रेहड़ी लगाकर बेचना शुरू कर दिया. करीब छह महीने तक उन्होंने धूप और धूल में खड़े होकर ग्राहकों से सीधा फीडबैक लिया. यही वह समय था जब उन्होंने समझा कि लोग सिर्फ खाना नहीं, बल्कि एक अच्छा अनुभव और बैठने का सुकुन ढूंढते हैं.
छह महीने की कड़ी मेहनत के बाद मिले हौसले से नीहार ने अपना पहला छोटा सा आउटलेट खोला. यह प्रयोग इतना सफल रहा कि वह दुकान रातोंरात शहर में चर्चा का विषय बन गई. स्थिति यह थी कि हर हफ्ते बिक्री के नए रिकॉर्ड टूट रहे थे और हजारों लोग चुरोस खाने पहुंच रहे थे. लेकिन इस सफलता ने एक नई मुसीबत खड़ी कर दी. दुकान पर इतनी ज्यादा भीड़ होने लगी कि लोगों को बैठने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था. नीहार का मुख्य मकसद लोगों को आराम से बिठाकर सर्विस देना था, इसलिए ग्राहकों को खड़ा देखना उनके लिए परेशान करने वाला था. इसके बाद उन्होंने पुरानी जगह से 10 गुना बड़ा स्टोर लिया, लेकिन वहां भी कुछ ही दिनों में पैर रखने की जगह नहीं बची.
जब बड़े शहरों में पैर पसारने की बारी आई, तो नीहार ने बड़े वैश्विक ब्रांड्स की कमियों और उनकी ताकतों पर रिसर्च की. उन्होंने पाया कि हर सफल फूड चेन के पीछे एक मजबूत सेंट्रल किचन होता है. नीहार ने बिना किसी झिझक के अपने पिछले 5 सालों की पाई-पाई जोड़कर बनाई गई पूरी कमाई को एक विशाल केंद्रीय रसोईघर बनाने में लगा दिया, जिसे 'चुर्रोल्टो सेंट्रल' नाम दिया गया. यह किचन इतना आधुनिक और बड़ा है कि यहां एक साथ 200 से अधिक शेफ और कर्मचारी नए आविष्कारों पर काम कर सकते हैं. इस एक कदम से अब वे दक्षिण भारत में करीब 35 नए आउटलेट्स को आसानी से फ्रेश माल सप्लाई करने की छमता रखते हैं.
इस ब्रांड की सबसे बड़ी खासियत इसका कभी न ऊबने देने वाला मेनू है. चुरोल्टो कैफे में हर दिन एक नई मिठाई पेश की जाती है और हर तीन महीने में पूरा मेनू कार्ड बदल दिया जाता है. ग्राहकों के लिए यह अनिश्चितता और नयापन एक रोमांच जैसा बन गया है, जिसके कारण लोग यहां बार-बार आना पसंद करते हैं. यही वजह है कि यहां आने वाले एक आम व्यक्ति का औसत बिल 1600 से 1800 रुपये तक बैठता है. सेहत के प्रति जागरूक लोगों के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि इनकी पेस्ट्री शॉप में सफेद चीनी का इस्तेमाल बंद करके स्टीविया और मोंक फ्रूट जैसे प्राकृतिक विकल्पों का उपयोग किया जाता है, जिससे आपकी सेहत को कोई नुकसान न हो.
नीहार बिसाबाथिनी का यह ब्रांड केवल स्वाद के दम पर नहीं, बल्कि कुछ कड़े नियमों पर चलता है. उनका पहला नियम है कि हर ग्राहक के साथ वैसा ही व्यवहार हो जैसा आप अपनी मां के साथ करते हैं. साथ ही, वे फाइव-स्टार क्वालिटी का खाना फास्ट-फूड की स्पीड से परोसने का दावा करते हैं. वर्तमान में 4 बेहद सफल बिस्ट्रो कैफे चलाने के बाद, अब कंपनी अगले 2 से 3 सालों में 25 नए आउटलेट खोलने की तैयारी में है. इस विस्तार के लिए वे निवेशकों से बातचीत कर रहे हैं और जल्द ही 25 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाने वाले हैं. आम उपभोक्ताओं के लिए इसका मतलब यह है कि जल्द ही उनके अपने शहरों में भी बिना चीनी वाली स्वादिष्ट मिठाइयों के नए ठिकाने मिलने वाले हैं.
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