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direct vs regular mutual fund return difference: आज आपको म्यूचुअल फंड के बारे में बताएंगे जिससे आपको रिटर्न में घाटा न उठाना पड़े. अक्सर लोग एक जैसी एसआईपी में पैसा लगता हैं लेकिन सालों बाद रिटर्न में दूसरों को मुकाबले लाखों का नुकसान उठाते हैं.क्योंकि मामूली लगने वाला एक्सपेंस रेश्यो उनकी कमाई
जब हम म्यूचुअल फंड में पैसे लगाते हैं, तो हम अक्सर यही सोचते हैं कि अच्छा रिटर्न पाने के लिए सिर्फ सही फंड चुनना और हर महीने समय पर एसआईपी भरना ही काफी है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दो अलग-अलग लोग एक ही समय पर, एक ही फंड में और एक जैसी रकम की एसआईपी शुरू करें, फिर भी मेच्योरिटी के समय दोनों के खातों में लाखों रुपये का बड़ा अंतर आ जाए? कमोडिटी और मार्केट एक्सपर्ट देवकृष्ण पांडेय कहते हैं कि यह कोई जादू नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक ऐसा छिपा हुआ खर्च है जिसे ज्यादातर आम निवेशक नजरअंदाज कर देते हैं और यही छोटी सी अनदेखी आपके सपनों के फंड को भारी नुकसान पहुंचा सकती है.
यह पूरा खेल एक्सपेंस रेश्यो यानी व्यय अनुपात का है, जो डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड्स के बीच बहुत बड़ा फर्क पैदा कर देता है. जब आप किसी एएमसी यानी परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी के पास फंड का प्रबंधन करने के लिए जाते हैं, तो वह आपके निवेश से हर साल एक छोटा सा शुल्क काटती है. यह शुल्क फंड के संचालन, रिसर्च और मैनेजमेंट के खर्चे उठाने के लिए होता है. रेगुलर प्लान में यह शुल्क थोड़ा ज्यादा होता है क्योंकि इसमें किसी वितरक या एजेंट का कमीशन जुड़ा होता है, जबकि डायरेक्ट प्लान में कोई बिचौलिया न होने के कारण यह खर्च काफी कम हो जाता है. यही मामूली सा अंतर 10 साल की लंबी अवधि में आपके रिटर्न को इस तरह प्रभावित करता है कि आपके हाथ आने वाली कुल रकम में लाखों रुपये की कमी आ सकती है.
| योजना का नाम | 10 साल की एसआईपी पर रिटर्न | 10,000 रुपये की एसआईपी की कुल वैल्यू | व्यय अनुपात (TER) |
|---|---|---|---|
| क्वांट स्मॉल कैप (रेगुलर) | 24.51% | लगभग 43.25 लाख रुपये | 1.33% |
| क्वांट स्मॉल कैप (डायरेक्ट) | 25.65% | लगभग 46.69 लाख रुपये | 0.63% |
| निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप (रेगुलर) | 21.43% | लगभग 36.68 लाख रुपये | 1.13% |
| निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप (डायरेक्ट) | 22.47% | लगभग 38.76 लाख रुपये | 0.52% |
| क्वांट मल्टी एसेट एलोकेशन (रेगुलर) | 21.08% | लगभग 35.98 लाख रुपये | 1.54% |
| क्वांट मल्टी एसेट एलोकेशन (डायरेक्ट) | 22.43% | लगभग 38.67 लाख रुपये | 0.55% |
अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाती है. मान लीजिए किसी ने क्वांट स्मॉल कैप फंड में हर महीने 10,000 रुपये की एसआईपी चलाई. रेगुलर योजना के तहत यही पैसा दस साल में बढ़कर करीब 43.25 लाख रुपये होता, जबकि डायरेक्ट योजना के माध्यम से निवेश करने पर यह लगभग 46.69 लाख रुपये तक पहुंच जाता. यानी सीधे तौर पर तीन लाख रुपये से ज्यादा का फासला सिर्फ इसलिए पैदा हो गया क्योंकि निवेशक ने सही प्लान चुनने में थोड़ी सी चूक कर दी. निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप हो या फिर इन्वेस्को इंडिया मिड कैप, हर जगह डायरेक्ट प्लान ने निवेशकों को बेहतर मुनाफा दिया है क्योंकि वहां कम खर्च की वजह से पैसा तेजी से ग्रो करता है.
देव कहते हैं सवाल यह उठता है कि आम आदमी किसके साथ जाए? वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग अपने पोर्टफोलियो की खुद निगरानी करने, बाजार को समझने और समय-समय पर सही फंड चुनने का समय और ज्ञान रखते हैं, उनके लिए डायरेक्ट प्लान वरदान साबित हो सकता है. इसके विपरीत, जिन निवेशकों को शेयर बाजार की बारीकियों की ज्यादा समझ नहीं है और वे किसी पेशेवर सलाहकार की मदद लेना चाहते हैं, वे रेगुलर प्लान चुनते हैं. हालांकि, सलाह की यह फीस लंबी अवधि में आपकी कुल पूंजी पर असर डालती है, इसलिए यह फैसला पूरी तरह से निवेशक की अपनी वित्तीय समझ और सहूलियत पर निर्भर करता है.
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