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Kusum Lata | Dec 04, 2025, 02:25 PM IST
1.What is D-SIB | D-SIB का क्या मतलब है?

D-SIB या डी-सिब का मतलब है डॉमेस्टिक सिस्टमैटिकली इम्पॉर्टेंट बैंक. आसान भाषा में कहें तो ऐसे बैंक जो भारत की अर्थ व्यवस्था के लिए बेहद ज़रूरी हैं और इनके डूबने का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. इन बैंकों के डूबने का सीधा मतलब ये होगा कि भारत पर आर्थिक संकट आ गया है और ऐसा होने पर पूरे देश में पैनिक क्रिएट हो सकता है. D-SIB बैंकों को अंग्रेज़ी में Too Big To Fail बैंक भी कहा जाता है, मतलब ये कि ये बैंक इतने बड़े हैं कि ये डूब नहीं सकते हैं और इनके डूबने का मतलब अर्थव्यवस्था का डूबना होगा.
2.Which Banks are too big to fail in India | कौन से हैं भारत के सबसे महत्वपूर्ण बैंक

साल 2008 में भयानक आर्थिक मंदी आई थी. अमेरिका से शुरू हुई इस मंदी ने पूरी दुनिया को अपनी जद में ले लिया था. ये मंदी इतनी भयानक थी कि लाखों लोगों की नौकरी छिन गई है, पूरी दुनिया में कई बैंक डूब गए थे. इस मंदी से उबरने में पूरी दुनिया को तीन से चार साल लग गए थे. इस मंदी से सीख लेते हुए अलग-अलग देशों के सेंट्रल बैंक्स ने D-SIB लिस्ट निकालना शुरू किया, ऐसे बैंकों की लिस्ट जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए ज़रूरी हैं. RBI ने साल 2014 में D-SIB का फ्रेमवर्क तैयार किया, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि D-SIB के पास इतना कैपिटल हो कि वो नुकसान झेल सके और नुकसान की स्थिति में भी सिस्टमैटिक डिसरप्शन को रोक सके यानी आर्थिक व्यवस्था को बिखरने से रोक सके. RBI 2015 से ये लिस्ट जारी करनी शुरू की है. पहले दो साल यानी 2015 और 2016 में RBI ने केवल SBI और ICICI Bank को महत्वपूर्ण बैंकों की लिस्ट में रखा था, साल 2017 से HDFC Bank को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया.
3.How are D-SIB Identified | कैसे होती है D-SIB की पहचान?

D-SIB की पहचान के लिए RBI एक दो-स्टेप प्रोसेस को फॉलो करता है. इसके लिए RBI हर बैंक का मूल्यांकन नहीं करता. बल्कि केवल उन बैंकों का आंकलन करता है जो आकार में बड़े हैं. इसके लिए RBI उन बैंकों को चुनता है जिनकी संपत्ति भारत की GDP के 2 प्रतिशत से ज्यादा हो. इसके ये देखते हुए कि क्या बैंक का कोई सब्स्टिट्यूट हो सकता है, क्या वो इंटरकनेक्टेड है आदि.. RBI उस बैंक के लिए एक कम्पोजिट स्कोर तैयार करता है और उस स्कोर के आधार पर तय किया जाता है कि बैंक डी-सिब है या नहीं.
4.Which Bank is the Safest among D-SIB | D-SIB में सबसे सुरक्षित बैंक कौन सा है?

D-SIB को RBI 5 अलग-अलग बकेट्स में बांटता है. ताकि ये पता हो कि कौन सा बैंक ज्यादा महत्वपूर्ण है और किसका डूबना ज्यादा खतरनाक है. बकेट 5 का मतलब है सबसे महत्वपूर्ण बैंक और बकेट 1 का मतलब है सबसे कम. D-SIB में शामिल तीन बैंकों में से SBI को बकेट 4 में रखा गया है. माने ये अर्थव्यवस्था के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बैंक है, HDFC Bank को बकेट 2 और ICICI बैंक को बकेट 1 में रखा गया है.
5. Why Banks are Categorized as D-SIB | D-SIB लिस्ट आती क्यों है?

RBI जिन बैंकों को D-SIB लिस्ट में रखती है, उन पर कड़ृी नज़र रखती है. इन बैंकों को बाकी बैंकों के मुकाबले बड़ा कैपिटल बफर रखना होता है. कैपिटल बफर यानी बैंक के कामकाज के लिए ज़रूरी कैश के अलावा भी कैश रखना. जैसे अगर आपका काम 100 रुपये में हो भी जाए तो भी आप 500 रुपये लेकर चलते हैं. ऐसे में 400 रुपये आपका कैपिटल बफर होगा. D-SIB में लिस्ट हुए बैंकों को कॉमन इक्विटी टियर 1 कैपिटल (CET1) नाम का अतिरिक्त फंड भी रखना होता है. जैसे बकेट 4 में लिस्टेड SBI को एडिशनल 0.80 प्रतिशत CET1, बकेट 2 में लिस्टेड HDFC Bank को अतिरिक्त 0.40 प्रतिशत CET1 और बकेट 1 में लिस्टेड ICICI Bank को अतिरिक्त 0.20 प्रतिशत CET1 रखना अनिवार्य होगा. ये अनिवार्यता 1 अप्रैल 2027 से लागू होगी.