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राजा राम | Feb 10, 2026, 03:43 PM IST
1.नियमों को सरल और पारदर्शी बनाने की तैयारी

ड्राफ्ट इनकम-टैक्स रूल्स, 2026 के तहत PAN कार्ड से जुड़े नियमों को सरल और पारदर्शी बनाने की तैयारी है, जिसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की वित्तीय गतिविधियों पर पड़ेगा.
2. इनकम-टैक्स रूल्स, 2026

1 अप्रैल से लागू होने वाले नए इनकम टैक्स नियमों को लेकर सरकार ने ड्राफ्ट इनकम-टैक्स रूल्स, 2026 जारी किए हैं. इसके साथ ही ड्राफ्ट टैक्स रिटर्न फॉर्म भी सार्वजनिक किए गए हैं और आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं. सरकार का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल, समझने योग्य और पारदर्शी बनाना है.
3.मौजूदा मॉनेटरी लिमिट बढ़ाई गई

ड्राफ्ट नियमों में PAN कार्ड से जुड़े कई अहम बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं. खास बात यह है कि छोटे लेन-देन में राहत दी गई है, जबकि बड़े ट्रांजैक्शन पर निगरानी और सख्त की जाएगी. इसके लिए कई जगहों पर मौजूदा मॉनेटरी लिमिट बढ़ाई गई है.
4.बैंकिंग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव

बैंकिंग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. नए प्रस्ताव के अनुसार, किसी एक या एक से अधिक बैंक खातों में सालभर में 10 लाख रुपये या उससे ज्यादा की कैश जमा या निकासी पर ही PAN देना जरूरी होगा. अभी एक दिन में 50 हजार रुपये से ज्यादा कैश डिपॉजिट पर PAN अनिवार्य है.
5.वाहन खरीद को लेकर भी नियमों में ढील

वाहन खरीद को लेकर भी नियमों में ढील दी गई है. ड्राफ्ट के मुताबिक, मोटरसाइकिल या फोर व्हीलर की कीमत 5 लाख रुपये से ज्यादा होने पर ही PAN देना होगा. इससे कम कीमत की गाड़ियों के खरीदारों को PAN देने की जरूरत नहीं होगी.
6.होटल, रेस्टोरेंट और इवेंट से जुड़े भुगतान में भी राहत

होटल, रेस्टोरेंट और इवेंट से जुड़े भुगतान में भी राहत प्रस्तावित है. यदि भुगतान 1 लाख रुपये से अधिक होता है, तभी PAN जरूरी होगा. फिलहाल यह सीमा 50 हजार रुपये है. रियल एस्टेट सेक्टर में PAN की सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है. प्रॉपर्टी की खरीद, बिक्री, गिफ्ट या जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट इसी सीमा में आएंगे.
7.इंश्योरेंस सेक्टर में भी बदलाव सुझाए गए हैं

इंश्योरेंस सेक्टर में भी बदलाव सुझाए गए हैं. इंश्योरेंस कंपनी के साथ अकाउंट-बेस्ड संबंध बनाने के लिए PAN अनिवार्य होगा, जबकि पहले प्रीमियम सीमा के आधार पर यह तय होता था. इन प्रस्तावित नियमों से साफ है कि सरकार छोटे करदाताओं को राहत देते हुए बड़े वित्तीय लेन-देन पर सख्त नजर रखना चाहती है.