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क्या है चीन का 996 Rule जिसे नारायण मूर्ति बताते हैं बेस्ट, यूजर्स बोले- यूरोप का 10,5,5 भी देख लीजिए

इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति ने एक बार फिर हफ्ते में 70 घंटे काम का वकालत की है. उन्होंने इस बार चीन के ‘9-9-6’ मॉडल का उदाहरण दिया है. जिसमें कर्मचारी सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक हफ्ते में 6 दिन काम करते हैं.

रईश खान | Nov 17, 2025, 09:32 PM IST

1.चीन के किस मॉडल की वकालत कर रहे मूर्ति

चीन के किस मॉडल की वकालत कर रहे मूर्ति
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चीन के इस मॉडल का दुनियाभर में काफी विरोध होता है. लोग इसे कर्मचारियों के साथ शोषण मानते हैं. लेकिन नारायण मूर्ति ने इसका समर्थन करके एक बार फिर देशव्यापी बहस छेड़ दी है.

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2.मूर्ति ने कौन सी कहानी बताई?

मूर्ति ने कौन सी कहानी बताई?
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मूर्ति ने बताया कि उनकी कंपनी Catamaran का कुछ स्टाफ पिछले साल चीन गया था. जहां वो चीन को समझने के लिए टियर 1, टियर 2 और टियर 3 शहरों में रुका. वहां कहावत है, 9, 9, 6. जिसका अर्थ है- सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक हफ्ते में 6 दिन काम करना.

3.'पीएम मोदी ने 100 घंटे करते हैं काम'

'पीएम मोदी ने 100 घंटे करते हैं काम'
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मूर्ति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हफ्ते में 100 घंटे काम करते हैं. यह युवाओं के लिए मिसाल है. अगर भारत को भी चीन की तरह इकॉनमी को मजबूत करना है तो उसको वर्क कल्चर बदलना होगा.

4.नारायण मूर्ति ने इंटरनेट पर मचाई हलचल

नारायण मूर्ति ने इंटरनेट पर मचाई हलचल
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मूर्ति के इस बयान ने एक बार फिर इंटरनेट पर हलचल मचा दी है. यूजर्स उनके बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा- सर भारतीय पहले ही खराब बुनियादी ढांचे और जीवनयाप की ऊंची लागत से जूझ रहे हैं.

5.क्या बोले यूजर्स?

क्या बोले यूजर्स?
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एक यूजर ने कहा, 'विचार तो अच्छा है सर, लेकिन चीन के 996 मॉडल की सैलरी, बुनियादी ढांचा और जीवनयापन के बारे में भी बता देते. भारत को 72 घंटे काम नहीं, ऐसी सैलरी चाहिए जो किराया, फीस और ग्रोसरी, अस्पताल का बोझ उठा सके.’

6.'कृपया भारत को सही दिशा दिखाएं'

'कृपया भारत को सही दिशा दिखाएं'
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एक अन्य यूजर ने लिखा, 'आप यूरोप का 10,5,5 मॉडल जानते हैं क्या? जिसका मतलब सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक हफ्ते में 5 दिन ही काम करते हैं. वे वॉक पर भी जाते हैं, ट्रैकिंग करने और दोस्तों से मिलने भी जाते हैं. मतलब जिंदगी का फुल आनंद लेते हैं. अंकल, कृपया भारत को सही दिशा दिखाएं. हम जीना चाहते हैं!'

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