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राजा राम | Jun 17, 2025, 05:06 PM IST
1.इजरायल-ईरान लड़ाई ने बढ़ाई चिंता

इजरायल और ईरान के बीच चल रही सैन्य झड़पें अब वैश्विक स्तर पर असर दिखा रही हैं. हाल ही में दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन से हमले किये जा रहे हैं. जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. जिसके बाद इसका असर भारत पर भी देखने को मिल सकता है. भारत, अपनी 85% से ज्यादा तेल की जरूरतें आयात से पूरी करता है, ऐसे हालात में खासा प्रभावित हो सकता है.
2.पेट्रोल-डीजल हो सकते हैं महंगे

तेल की कीमतें बढ़ने का पहला असर आम लोगों पर पेट्रोल और डीजल के दामों के रूप में दिख सकता है. अगर सरकार टैक्स में राहत नहीं देती, तो ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ेगी, जिससे महंगाई की सीढ़ी और चढ़ सकती है.
3.पेंट और केमिकल कंपनियों पर दबाव

एशियन पेंट्स, बर्जर पेंट्स जैसी कंपनियां कच्चे तेल से बने सॉल्वेंट्स और रेजिन पर निर्भर रहते हैं. आपको बता दें, कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से इनका प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ सकता है, जिससे यह कंपनियां अपने प्रोडक्ट की कीमतें बढ़ा सकती हैं और डिमांड पर असर पड़ सकता है.
4.उर्वरक कंपनियों की लागत बढ़ेगी

यूरिया और अमोनिया जैसे नाइट्रोजन बेस्ड उर्वरकों के उत्पादन में भी नेचुरल गैस का इस्तेमाल होता है. Crude Oil महंगा होने पर LNG के दाम भी चढ़ सकते हैं. इसके अलावा इससे खाद की कीमतें बढ़ेंगी और सरकार को सब्सिडी का बोझ उठाना पड़ सकता है.
5.केमिकल और प्लास्टिक उद्योग को झटका

इस तनातनी के बीच प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर और सॉल्वेंट्स जैसे उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग में कच्चे तेल से बने डेरिवेटिव्स का इस्तेमाल होता है. इसके अलावा पिडिलाइट, आरती इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों को लागत में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है.
6.तेल कंपनियों को हो सकता है फायदा

हालांकि, इस लड़ाई के दौरान ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी तेल निकालने वाली कंपनियों को Crude Oil की कीमतें बढ़ने से फायदा मिल सकता है, क्योंकि उन्हें अपनी बिक्री के लिए ज्यादा कीमत मिल सकती है. हालांकि, ये सब सरकार के रुख पर इनका लाभ निर्भर करेगा.
7.इलेक्ट्रिक गाड़ियों को मिल सकती है रफ्तार

तेल के दामों में लगातार बढ़ोतरी से EV सेक्टर को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिल सकता है. ग्राहक अब पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियों की जगह बैटरी चालित वाहनों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे EV कंपनियों की मांग में तेजी आ सकती है. बहरहाल, Crude Oil की कीमतों में उछाल भारत के लिए चिंता का विषय है. इससे महंगाई, प्रोडक्शन और सरकारी सब्सिडी पर भी दबाव बढ़ सकता है. इस स्थिति का समाधान सरकार की नीतियों और वैश्विक हालात पर निर्भर करेगा.