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बॉम्बे के स्लम से निकलकर कैसे दुबई के सबसे अमीर शख्स बने रिजवान साजन? आज हैं ₹16,709 करोड़ के साम्राज्य के मालिक

आज हम आपको दुबई के सबसे अमीर भारतीय शख्स से मिलवाने जा रहे हैं जिन्होंने मुंबई के स्लम से उठकर अपना हजारों करोड़ का साम्राज्य खड़ा किया है, जानें कौन हैं दुबई के रियल इस्टेट किंग रिजवान साजन...

जया पाण्डेय | Nov 06, 2025, 09:45 AM IST

1.दुबई के सबसे अमीर भारतीय के सफलता की कहानी

दुबई के सबसे अमीर भारतीय के सफलता की कहानी
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मुंबई के घाटकोपर की भीड़-भाड़ वाली गलियों से निकलकर दुबई के सबसे अमीर भारतीय बनने तक का रिजवान साजन का सफर आज के ज़माने की गरीबी से अमीरी की कहानी जैसा है. आज यह 60 वर्षीय अरबपति ₹16,709 करोड़ (2 अरब अमेरिकी डॉलर) के साम्राज्य के शिखर पर खड़ा है और उनकी निजी संपत्ति ₹20,833 करोड़ (2.5 अरब अमेरिकी डॉलर) है.

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2.छोटी उम्र में उठ गया पिता का साया

छोटी उम्र में उठ गया पिता का साया
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मुंबई के घाटकोपर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे रिजवान साजन का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा. जब वह सिर्फ 16 साल के थे, तभी उनके पिता का अचानक निधन हो गया, जिससे उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी और परिवार का आर्थिक बोझ उठाना पड़ा. साजन ने घर चलाने के लिए बॉक्स फाइलें बनाना शुरू किया. थोड़ी स्थिति तो सुधरी लेकिन रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना एक चुनौती बन गया था.

3.कुवैत में जॉब ऑफर से चमक गई किस्मत

कुवैत में जॉब ऑफर से चमक गई किस्मत
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दो साल बाद किस्मत ने उनके चाचा के रूप में मुस्कुराकर उन्हें कुवैत में नौकरी का प्रस्ताव दिया. साजन ने फोर्ब्स इंडिया को बताया, 'यह मेरी लॉटरी थी.' मुंबई में वह लगभग ₹6,000 प्रति माह कमा रहे थे, कुवैत में उनका नया वेतन बढ़कर ₹18,000 हो गया, जो उस समय लगभग 150 कुवैती दीनार था. एक ट्रेनी सेल्समैन के रूप में शुरुआत करते हुए वह मैनेजर लेवल तक पहुंचे, जहां उनकी सैलरी 150 से बढ़कर 1,500 दीनार हो गई.

4.रास नहीं आई सफलता, जल्द ही अर्श से फर्श पर पहुंचे रिजवान साजन

रास नहीं आई सफलता, जल्द ही अर्श से फर्श पर पहुंचे रिजवान साजन
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इसमें लगभग 50,000 दीनार का मासिक बिक्री कमीशन जोड़ दें तो साजन को अचानक ऐसा महसूस हुआ कि वह एक सपने में जी रहे हैं. अपनी नई-नई मिली संपत्ति से उन्होंने एक टोयोटा लैंड क्रूजर खरीदी, बांद्रा में एक घर खरीदा और अपनी बहन की शादी का खर्च भी उठाया. हालांकि वह जितने तेजी से सफलता की शिखर पर पहुंचे उतनी ही तेजी से उन्हें ऐसा झटका लगा जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी.

5.सद्दाम हुसैन की वजह से वापस भागना पड़ा मुंबई

सद्दाम हुसैन की वजह से वापस भागना पड़ा मुंबई
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अगस्त 1990 में सद्दाम हुसैन ने कुवैत पर हमला कर दिया जिससे पूरा क्षेत्र अशांत हो गया. साजन को अपना सब कुछ छोड़कर मुंबई वापस भागना पड़ा. उन्होंने बताया, 'यह मेरे जीवन का दूसरा महत्वपूर्ण मोड़ था. मैं शून्य पर वापस आ गया था. लेकिन जैसा कि इतिहास ने सिद्ध किया कि यह उनकी महानतम उन्नति की शुरुआत भी थी.
 

6.डेन्यूब साम्राज्य का निर्माण

डेन्यूब साम्राज्य का निर्माण
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साल 1993 में रिज़वान साजन कुछ हज़ार दिरहम और एक सपने के साथ दुबई पहुंचे. उसी साल उन्होंने डैन्यूब ग्रुप की स्थापना की, जो निर्माण सामग्री का कारोबार करने वाली एक मामूली व्यापारिक फर्म थी. बाद में उन्होंने याद करते हुए कहा, 'यह एक ब्रोकरेज व्यवसाय था, जहां मैं कमीशन कमाता था.' जल्द ही उन्होंने बड़े पैमाने पर निर्माण सामग्री का व्यापार शुरू कर दिया. यह एक ऐसा फैसला था जो परिवर्तनकारी साबित हुआ. उनकी टाइमिंग लाजवाब थी.  दुबई निर्माण क्षेत्र में तेज़ी के दौर से गुज़र रहा था और साजन की अथक मेहनत ने डैन्यूब को इसके केंद्र में ला खड़ा किया.

7.रिजवान साजन ने लगातार किया अपने बिजनेस का विस्तार

रिजवान साजन ने लगातार किया अपने बिजनेस का विस्तार
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2006 में साजन ने सैनिटरी सॉल्यूशन देने वाला एक ब्रांड मिलानो लॉन्च किया. दो साल बाद 2008 में डैन्यूब होम लॉन्च किया जिससे उन्होंने होम फर्निशिंग के क्षेत्र में कदम रखा. 2012 तक उन्होंने एल्युमीनियम कंपोजिट पैनल्स में विशेषज्ञता वाले एक उद्यम अलुकोपैनल के साथ फिर से विस्तार किया. इसके बाद 2014 में कंपनी ने रियल एस्टेट में प्रवेश किया. इसके बाद तो उन्होंने फिर से मुड़कर नहीं देखा. 

8.फिल्मी कहानी से कम नहीं रिजवान साजन की सक्सेस स्टोरी

फिल्मी कहानी से कम नहीं रिजवान साजन की सक्सेस स्टोरी
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2025 तक रिजवान साजन संयुक्त अरब अमीरात में सबसे अमीर भारतीय हैं और अमीरात के टॉप दस सबसे अमीर अरबपतियों में गिने जाते हैं. मुंबई के घाटकोपर में एक साधारण परवरिश से लेकर दुबई में अरबों डॉलर के साम्राज्य का नेतृत्व करने तक का उनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. साजन कहते हैं, 'यूएई अवसरों की धरती थी और रहेगी.इसने हम विदेशियों को न सिर्फ खुद को विकसित करने में मदद की है बल्कि यूएई के समाज और अर्थव्यवस्था में भी योगदान दिया है.'

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