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होम-ऑटो लोन लेना होगा मुश्किल! नए नियम से 62% लोगों पर पड़ेगा असर, जानिए किसे होगी सबसे ज्यादा दिक्कत

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ECL Direction-2026 के बाद बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिससे कम CIBIL स्कोर वाले ग्राहकों के लिए लोन लेना और मुश्किल हो सकता है.

Gaurav Barar | Jun 08, 2026, 06:04 PM IST

1.कमजोर CIBIL स्कोर वालों के लिए होगी मुश्किल

कमजोर CIBIL स्कोर वालों के लिए होगी मुश्किल
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ECL Direction-2026 के बाद बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है. इस नए नियम के लागू होने से बैंकों को संभावित नुकसान के लिए पहले से ही ज्यादा वित्तीय प्रावधान करना होगा. इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं, विशेषकर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जिनका क्रेडिट प्रोफाइल या CIBIL स्कोर कमजोर है. (Image- magnific)

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2.चुकानी पड़ सकती हैं अधिक ब्याज दरें

चुकानी पड़ सकती हैं अधिक ब्याज दरें
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आने वाले समय में ऐसे ग्राहकों के लिए होम लोन, ऑटो लोन और एजुकेशन लोन लेना न सिर्फ मुश्किल हो जाएगा, बल्कि उन्हें इसके लिए अधिक ब्याज दरें भी चुकानी पड़ सकती हैं. (Image- pixabay)

3.लोन हासिल करना होगी एक बड़ी चुनौती 

लोन हासिल करना होगी एक बड़ी चुनौती 
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बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का CIBIL स्कोर 730 से कम है, तो भविष्य में लोन हासिल करना एक बड़ी चुनौती होगी. ऐसे मामलों में बैंक या तो लोन आवेदन खारिज कर सकते हैं या फिर जोखिम की भरपाई के लिए अतिरिक्त गारंटी और कोलेटरल की मांग कर सकते हैं. (Image- unsplash)

4.62 प्रतिशत लोगों का सिबिल 730 से कम

62 प्रतिशत लोगों का सिबिल 730 से कम
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चिंता की बात यह है कि TransUnion CIBIL की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में वर्तमान में लगभग 62 प्रतिशत लोन आवेदक इसी श्रेणी यानी 730 से कम CIBIL में आते हैं. ऐसे में एक बहुत बड़े वर्ग के लिए वित्तीय मदद जुटाना कठिन हो जाएगा. (Image- magnific)

5.क्या है ECL नियम और कब से होगा लागू?

क्या है ECL नियम और कब से होगा लागू?
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RBI का एक्सपेक्टेड क्रेडिट लॉस फ्रेमवर्क 1 अप्रैल 2027 से पूरी तरह प्रभावी होगा. अब तक बैंक किसी लोन के एनपीए बनने यानी ग्राहक द्वारा लगातार 90 दिनों तक ईएमआई न चुकाने के बाद उसके लिए प्रावधान करते थे. (Image- magnific)

6.नई व्यवस्था क्या होगी?

नई व्यवस्था क्या होगी?
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नए नियमों के तहत बैंकों को लोन डूबने का इंतजार नहीं करना होगा. उन्हें लोन देते समय और उसके बाद भी भविष्य में होने वाले संभावित डिफॉल्ट का पहले ही अनुमान लगाना होगा और उसी के अनुसार फंड अलग रखना होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से बैंकों के मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा और बैंकिंग सेक्टर पर करीब 42,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय प्रभाव पड़ सकता है.

7.डिफॉल्ट पर कई गुना बढ़ेगा वित्तीय बोझ

डिफॉल्ट पर कई गुना बढ़ेगा वित्तीय बोझ
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नए ECL नियमों के तहत बैंकों को डिफॉल्ट की अवधि के हिसाब से काफी सख्त प्रावधान करने होंगे. उदाहरण के लिए, यदि ₹25 लाख का होम लोन है, तो 30 दिन का डिफॉल्ट में वर्तमान में बैंकों को करीब ₹10,000 का प्रावधान करना होता है, जो नए नियम में बढ़कर ₹25,000 हो जाएगा. (Image- magnific)

8.60 और 90 दिन के लिए भी बदले नियम

60 और 90 दिन के लिए भी बदले नियम
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31 से 60 दिन के डिफॉल्ट में प्रावधान ₹10,000 से सीधे उछलकर ₹1.25 लाख तक पहुंच सकता है. 90 दिन से अधिक के डिफॉल्ट में ₹3.75 लाख (15%) अलग रखने होते हैं, जो आगे चलकर ₹5 लाख हो जाएंगे.

9.बैंक कैसे करेंगे जोखिम का आकलन 

बैंक कैसे करेंगे जोखिम का आकलन 
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भविष्य के जोखिम को मापने के लिए बैंक अब केवल वर्तमान स्थिति नहीं देखेंगे. वे ग्राहक के पुनर्भुगतान रिकॉर्ड, CIBIL स्कोर में उतार-चढ़ाव, आय की स्थिरता, रोजगार जाने के जोखिम, लोन-टू-वैल्यू रेशियो और मौजूदा कर्ज के बोझ जैसे कई इंडिकेटर्स का बारीकी से विश्लेषण करेंगे. 

10.प्रीमियम ग्राहकों पर रहेगा पूरा ध्यान!

प्रीमियम ग्राहकों पर रहेगा पूरा ध्यान!
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इस सख्ती के कारण बैंकों का पूरा ध्यान अब 'प्रीमियम ग्राहकों' पर टिक जाएगा, जिनका CIBIL स्कोर 730 या उससे अधिक है. देश में ऐसे करीब 7 करोड़ ग्राहक हैं. इन बेहतर प्रोफाइल वाले लोगों को ब्याज दरों में छूट और आसान शर्तों पर लोन मिलेगा, जबकि जोखिम वाले ग्राहकों से बैंक ज्यादा ब्याज वसूलेंगे.
 

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