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राजा राम | Feb 04, 2026, 07:48 PM IST
1.ब्याज दरों में हल्की कटौती संभव

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (PF) को लेकर अहम अपडेट सामने आ सकता है. वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPFO जल्द ही पीएफ पर मिलने वाली ब्याज दरों का फैसला करने वाला है. शुरुआती संकेत बताते हैं कि इस बार ब्याज दरों में हल्की कटौती संभव है, जिससे कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग पर असर पड़ सकता है.
2.ब्याज दर 8 प्रतिशत से 8.20 प्रतिशत तय की जा सकती है

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) मार्च के पहले सप्ताह में अपनी 239वीं सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक आयोजित कर सकता है. इसी बैठक में 2025-26 के लिए पीएफ ब्याज दरों को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्याज दर 8 प्रतिशत से 8.20 प्रतिशत के दायरे में तय की जा सकती है.
3.फंड की स्थिरता बनाए रखना

पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में EPFO ने पीएफ पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर घोषित की थी. उस समय संगठन का उद्देश्य अपने फंड की स्थिरता बनाए रखना था. हालांकि, बदलती आर्थिक परिस्थितियों और नई योजनाओं के चलते इस बार समीकरण कुछ अलग नजर आ रहे हैं.
4.एक न्यूनतम वित्तीय बफर

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत बड़ी संख्या में नए कर्मचारी EPFO से जुड़ रहे हैं. ऐसे में भविष्य में बढ़ते भुगतान दायित्वों को देखते हुए EPFO एक न्यूनतम वित्तीय बफर बनाए रखना चाहता है, जिसके लिए ब्याज दरों में मामूली कटौती एक विकल्प हो सकता है.
5.अंतिम मंजूरी वित्त मंत्रालय से मिलती है

CBT की सिफारिश के बाद पीएफ की ब्याज दर को अंतिम मंजूरी वित्त मंत्रालय से मिलती है. इसके बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय इसे अधिसूचित करता है. अधिसूचना जारी होते ही तय ब्याज राशि पीएफ सब्सक्राइबर्स के खातों में ट्रांसफर की जाती है.
6.ब्याज दर का प्रस्ताव CBT को भेजेगी

इससे पहले EPFO की फाइनेंस, इन्वेस्टमेंट और ऑडिट कमेटी (FIAC) फरवरी के अंतिम सप्ताह में बैठक करेगी. यह कमेटी मौजूदा वित्त वर्ष में निवेश पर मिले रिटर्न का आकलन कर ब्याज दर का प्रस्ताव CBT को भेजेगी.
7.बदलाव की उम्मीद की जा रही है

इसी CBT बैठक में एक और बड़ा मुद्दा चर्चा में रह सकता है. EPFO के तहत सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाने के लिए वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने पर विचार किया जा सकता है. यह सीमा वर्ष 2014 से अब तक नहीं बदली गई है.गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में EPFO को चार महीने के भीतर वेतन सीमा पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था. बढ़ती महंगाई और वेतन स्तर के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी अनिवार्य पीएफ कवरेज से बाहर हो गए हैं, जिसे लेकर अब नीति स्तर पर बदलाव की उम्मीद की जा रही है.