बिजनेस
Kusum Lata | Jul 06, 2025, 11:13 AM IST
1.The Ever Ending Cycle of EMI

वेल्थ क्रिएशन और वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी welfin के डायरेक्टर तपन चक्रबर्ती ने लिंक्डइन पर एक लंबे पोस्ट में बताया है कि कैसे EMI के कुचक्र ने भारत के मिडिल क्लास को जकड़ा हुआ है. वो लिखते हैं कि उधार लेने, कमाने और उधार चुकाने के चक्र में भारत की एक बड़ी आबादी फंसी हुई है. वो लिखते हैं कि फोन से लेकर घर के दूसरे सामान और राशन तक EMI पर खरीदा जा रहा है. उधार लेना एकदम सामान्य हो गया है.
2.Shocking Figures of Debt

तपन चक्रबर्ती ने लिखा कि हमारी जीडीपी में घरेलू कर्ज की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत है. इसमें से 32.3 प्रतिशत क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन, बाय नाऊ पे लेटर से हैं. 70 प्रतिशत iPhone EMI पर खरीदे जाते हैं. छोटे लोन लेने वाले 11 प्रतिशत कर्जदार लोन डिफॉल्ट कर चुके हैं. हर पांच में से तीन लोग ऐसे हैं जिनके तीन या उससे ज्यादा लोन चल रहे हैं.
3.Small EMIs Stack Fast

EMI छोटी-छोटी होती हैं. 2000 , 3000, 2500... इस चक्कर में हम कई चीज़ों को एक साथ EMI पर ले लेते हैं. इससे छोटी-छोटी EMI मिलकर बड़ा लोन बन जाती हैं. महीना शुरू होते ही सैलरी का बड़ा हिस्सा EMI में चला जाता है. इससे न बचत हो पाती है, न किसी इमरजेंसी के लिए पैसे बच पाते हैं.
4.Vicious Cycle of EMI impacts everyone

EMI किसी एक की समस्या नहीं रह गई है. जब बचत कम होगी तो इनवेस्टमेंट कम होगा. कर्ज ज्यादा होगा तो डिफॉल्ट भी ज्यादा होगा. ज्यादा तनाव होगा तो काम पर फोकस कम होगा. मिडिल क्लास दबाव में रहेगा तो देश की ग्रोथ रुकेगी. यानी EMI के कुचक्र का असर हर किसी पर पड़ेगा.
5.How to ensure Financial safety

कोई भी लोन लेने से पहले चेक करें कि आपकी टोटल EMI कितनी है. अगर EMI सैलरी के 40 प्रतिशत से ज्यादा है तो खरीदारी न करें. एक सेफ्टी फंड बिल्ड करें. शुरुआत महीने के 500 रुपये बचाने से भी कर सकते हैं. छोटी SIP से शुरुआत करें. समय के साथ इसे बढ़ाएं.