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मोहम्मद साबिर | Jun 01, 2026, 06:50 PM IST
1.12 रुपये लेकर घर से भागे

गुजरात के अमरेली जिले के दुधाला गांव के रहने सावजी भाई ढोलकिया सिर्फ कक्षा 4 तक ही पढ़ें हुए हैं. हालांकि, साल 1977 में वो अपने गांव से 12.5 रुपये लेकर भागकर सूरत आ गए थे. इतने रुपये तो बस के किराए में ही खत्म हो गए थे.
2.शुरुआत में करनी पड़ी नौकरी

सावजी भाई अपने गांव से भाग कर सूरत आ गए थे. उन्होंने एक फैक्ट्री में 179 रुपये में काम करना शुरू कर दिया था. 179 की नौकरी में खाने-पीने में 140 रुपये के खर्च हो जाते थे और 39 रुपये बचत होती थी. लेकिन करीब 10 साल तक उन्होंने नौकरी की और फिर अपनी कंपनी शुरू की.
3.10 साल तक हीरा घिसने का किया काम

सावजी भाई ने अपने एक दोस्त से हीरा घिसने का काम सीखा. उन्होंने करीब 10 साल तक हीरा घिसने का काम किया. फिर उसी लाइन में अपना कारोबार आगे बढ़ाया. आज उन्हें डायमंड किंग के नाम से भी जाना जाता है.
4.फिर शुरू की अपनी कंपनी

सावजी भाई जब सूरत आए थे, तो उनके पास सिर्फ 12.5 रुपये थे. लेकिन उनकी कड़ी मेहनत और लगन से आज उन्होंने करोड़ों की कंपनी बना दी है. साल 1991 में उन्होंने हरि कृष्ण डायमंड नाम से कंपनी शुरू की और धीरे-धीरे डायमंड की दुनिया में अपनी पकड़ बना ली.
5.आज बनाया करोड़ों का साम्राज्य

डायमंड किंग कहे जाने वाले सावजी भाई ने सालों साल कड़ी मेहनत की है और आज देश के बड़े अरबपतियों में से एक बन गए हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, आज उनकी कंपनी 6000 करोड़ों का सालाना टार्नओवर कर रही है.