Advertisement

5000 रुपये का कर्ज लेकर से शुरू किया था बिजनेस, आज बना दी 200 करोड़ की कंपनी

सभी के माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चे पढ़-लिखर अमीर और बड़े इंसान बने. संजय कुमार के माता-पिता चाहते थे कि वो सविल सर्विस में जाए और बड़े अधिकारी बनें. लेकिन उनका सपना बिजनेसमैन बनने का था और आज वो करोड़ों का कारोबार भी कर रहे हैं.

मोहम्मद साबिर | Apr 16, 2026, 04:12 PM IST

1.5000 रुपये में शुरू किया था बिजनेस

5000 रुपये में शुरू किया था बिजनेस
1

सीतामढ़ी जिले बोखरा के रहने वाले संजय कुमार को बचपन से ही अपना कारोबार करने का शौक था. हालांकि उनके पास बिजनेस के लिए पैसे नहीं थी, जिसके बाद उन्होंने रिश्तेदारों से पैसे उधार लिए और फिर अपना बिजनेस शुरू किया. आज वो करोड़ों का साम्राज्य बना चुके हैं. 
 

Advertisement

2.सिविल सर्विसेज छोड़ चुना कारोबार

सिविल सर्विसेज छोड़ चुना कारोबार
2

संजय कुमार के माता-पिता की इच्छा थी कि उनका बेटा सविल सर्विसेज में बड़ा अधिकारी बनें. लेकिन संजय का सपना दूसरा था, जिसके लिए उन्होंने माता-पिता की बात नहीं मानी और अपना सपना चुना. हालांकि कारोबार के लिए संजय के माता-पिता ने एक भी पैसा नहीं दिया, क्योंकि वो चाहते थे कि संजय अपने बलबूते सबकुछ खड़े हो सके. 
 

3.उधार लेकर इस बिजनेस में घुसे संजय

उधार लेकर इस बिजनेस में घुसे संजय
3

संजय कुमार ने उधार पैसे लेकर राइस मिल शुरू की. शुरुआत में संजय ने काफी संघर्ष किया और कड़ी मेहनत भी की. खटारा बाइक से वो 40-50 किलोमीटर के चक्कर लगाने पड़ते थे. हालांकि, वो सरकार से धान लेते और तैयार चावल वापस देते हैं. सरकार मिलिंग चार्ज सिर्फ 10 रुपये क्विंटल मिलता है. लेकिन संजय ने इसमें बड़े पैमाने पर काम किया, जो आज काफी सफल बन गया है. 
 

4.लोगों को देते हैं रोजगार

लोगों को देते हैं रोजगार
4

संजय कुमार ने जब राइस मिल शुरू की थी, तब सिर्फ 10 से 15 मजदूर ही काम करते थे. लेकिन अब करीब 65 से 70 मजबूर उनकी मिल में काम कर रहे हैं. हालांकि, धीरे-धीरे मजदूरों की संख्या भी बढ़ रही है. करीब 40 लोग लोडिंग और अनलोडिंग के लिए भी हैं और कई लोग मिलिंग, बॉयलर और ड्रायर की टीमों का हिस्सा हैं. 

5.आज बना दिया करोड़ों का कारोबार

आज बना दिया करोड़ों का कारोबार
5

रिपोर्ट्स के अनुसार, संजय कुमार की राइस मिल का सर्विस टर्नओवर 200 करोड़ रुपये है. हालांकि यहां तक पहुंचने के लिए संजय ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है. उनकी ये कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है और आप भी इससे सीख ले सकते हैं. 

Advertisement
Advertisement
Advertisement