बिजनेस
मोहम्मद साबिर | Jun 06, 2026, 09:17 PM IST
1.पढ़ाई-लिखाई के बाद नहीं की नौकरी

केरल के रहने वाले के.एम. मैमन मप्पिल्लई के परिवार का सामाजिक और बिजनेस सेक्टर में बड़ा नाम था. मैमन ने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की और फिर नौकरी के पीछे नहीं भागे, बल्कि अपना कारोबार स्टार्ट करने की सोची. हालांकि, एक समय था जब मप्पिल्लई को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा था और उनकी सारी संपत्तियां भी चली गई थी. उसे समय मप्पिल्लई युवा थे और उन्होंने नौकरी के बजाय कारोबार करने का फैसला लिया.
2.गुब्बारे बेचने का शुरू किया था बिजनेस

मैमन मप्पिल्लई ने साल 1946 में चेन्नई के तिरुवोत्तियूर इलाके में एक छोटे शेड में खिलौने और गुब्बारे बनाने का काम शुरू किया. उनके लिए ये शुरुआत आसान नहीं थी. उन्होंने नए मौके तलाशना स्टार्ट किया और 1949 तक कंपनी ने लेटेक्स से बने खिलौने, दस्ताने और अन्य रबर के उत्पाद बनाना स्टार्ट किया. इससे उनके कारोबार को फायदा हुआ.
3.इस नाम से कंपनी ने बनाई पहचान

मप्पिल्लई का सपना सिर्फ रबर उत्पाद बनाना नहीं था, बल्कि वो टायर सेक्टर में भी उतरना चाहते थे. साल 1960 में उन्होंने अपनी कंपनी को Madras Rubber Factory (MRF) नाम दिया. इसी साल चेन्नई के तिरुवोत्तियूर में पायलट प्लांट में पहला MRF टायर तैयार किया. हालांकि, आज एमआरएफ आज भारत का सबसे बड़ा टायर ब्रांड बनकर उबरा है. फिर साल 1967 में MRF पहली भारतीय कंपनी बनी, जिसने अमेरिका को टायर निर्यात किया था. क्योंकि उस समय अमेरिका टायर की तकनीक में नंबर-1 देश बना था.
4.विराट कोहली से है गहरा नाता

MRF ने खेल की दुनिया में अलग पहचान बनाई, खासकर क्रिकेट में. MRF ने सचिन तेंदुलकर, ब्रायन लारा, विराट कोहली और अन्य क्रिकेटर्स को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया है. हालांकि, विराट कोहली MRF टायर का विज्ञापन करते हैं. दुनिया के सबसे नंबर-1 खिलाड़ी विराट कोहली भी MRF के लोगो वाले बैट से खेलते हैं.
5.आज बनाया करोड़ों का साम्राज्य

के.एम. मैमन मप्पिल्लई ने भारत को बड़ा योगदान दिया है, जिसके लिए उन्हें साल 1992 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. रिपोर्ट्स के अनुसार, MRF की वैल्यूएशन 53000 करोड़ रुपये पहुंच गई है.