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मोहम्मद साबिर | Jan 08, 2026, 07:58 PM IST
1.बिना मां-बाप के बीता बचपन

जर्मनी के रहने वाले हैंस विल्सडोर्फ का जन्म 1881 में हुआ था. जब वो 12 साल के थे, तब उनके माता-पिता का निधन हो गया था और वो अनाथ हो गए थे. लेकिन हैंस ने हार नहीं मानी और संघर्ष करते हुए करोड़ों-अरबों का साम्राज्य बना डाला.
2.इस आइडिया ने बनाई हैंस की किस्मत

हैंस विल्सडोर्फ अक्सर सोचते थे कि क्यों न एक ऐसी घड़ी बनाई जाए, जो हाथ में पहनी जा सके. इतना ही नहीं उन्होंने ये भी सोचा कि वो घड़ी मजबूत और स्टाइलिश हो. धूल और पसीना या कोई भी चीज उसका बाल भी बाका न कर सके.
3.ऐसी हुई कंपनी की शुरुआत

हैंस विल्सडोर्फ साल 1905 में लंदन पहुंच गए. उस समय उनके पास पैसे भी नहीं थे. हालांकि उन्होंने अपने साले के साथ मिलकर एक छोटी से कंपनी शुरू की. उन्होंने खुद की घड़िया बनाने की सोची, जिसके लिए उन्होंने स्विट्जरलैंड से मशीने मंगवाया और उन्हें लंदन में असेंबल किया. हालांकि वो अपनी कंपनी का नाम रखने के लिए काफी सोचते रहे.
4.हजारों नाम रिजेक्ट करने के बाद इस नाम को अपनाया

हैंस विल्सडोर्फ ने अपनी कंपनी के नाम के लिए हजारों नामों को रिजेक्ट कर दिया था. हालांकि कई नाम रिजेक्ट करने बाद उन्होंने रोलेक्स (Rolex) नाम पसंद किया. अब रोलेक्स दुनिया का नंबर-1 ब्रांड बन गया है. खास बात ये थी ये घड़ी वाटरप्रफ थी, जिससे उनकी कंपनी पूरी दुनिया से तेजी से फैल गई और लोकप्रिय बन गई. रोलेक्स की खास बात ये थी कि वो सेल के पीछे कभी नहीं भागती थी.
5.आज अरबों का है साम्राज्य

बचपन में ही माता-पिता के निधन के बाद हैंस ने काफी संघर्ष झेला है. लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. आज उनकी कंपनी अरबों रुपये की मालिक है. रिपोर्ट्स के अनुसार, आज उनकी कंपनी 1 लाख करोड़ रुपये का सालाना कमाई करती है. हालांकि रोलेक्स के पास खुद की सोने की भट्टी भी है.