बिजनेस
मोहम्मद साबिर | Dec 06, 2025, 06:53 PM IST
1.सरकारी नौकरी छोड़कर शुरू किया बिजनेस

बनारस में बीता बचपन और फिर लखनऊ में बसीं कामिनी सिंह सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (CISH) में सीनियर रिसर्च के तौर पर काम करती थीं. कामिनी ने करीब 7 साल तक सरकारी नौकरी की है. लेकिन फिर अंत में 2015 में उन्होंने उसे छोड़ने का फैसला किया और अपना बिजनेस शुरू किया.
2. प्रोजेक्ट डायरेक्टर पद का मिला ऑफर

डॉ. कामिनी ने जब सरकारी नौकरी छोड़ी, तो उन्हें किसानों से जुड़ी एक कंपनी ने बतौर प्रोजेक्ट डायरेक्टर अपनी कंपनी से जुड़ने का ऑफर दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया. हालांकि इस दौरान उनका किसानों से संपर्क हुआ. फिर बाद में उन्होंने इस कंपनी को भी छोड़कर अपना बिजनेस स्टार्ट करने की सोची.
3.कब शुरू किया अपना बिजनेस?

डॉ. कामिनी सिंह ने सरकारी नौकरी और फिर प्रोजेक्ट डायरेक्टर का पद छोड़कर साल 2017 में अपना बिजनेस किया. उन्होंने किसानों के साथ मोरिंगा प्रोजक्ट शुरू किया. मोरिंगा इसलिए उन्होंने चुना, क्योंकि इसमें किसी भी केमिकल की जरूरत नहीं होती. इस पेड़ की पत्तियां, जड़ और फल विटामिन से भरपूर होते हैं. इसका इस्तेमाल एंटीऑक्सीडेंट, एंटी कैंसर, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी डायबिटिक चीजों के लिए होता है. उन्होंने जैविक विकास कृषि संस्थान को जन्म दिया.
4.अपना कारोबार बढ़ाने के लिए किया काफी संघर्ष

डॉ. कामिनी ने अपना कारोबार बढ़ाने के लिए काफी संघर्ष किया है. उन्होंने साल 2018 नें लखनऊ से एक घंटे की दूरी पर सिधौली में 7 एकड़ जमीन लीज पर ली और वहां मोरिंगा की खेती की. लेकिन शुरुआत में उन्हों कोई खरीददार नहीं मिला. हालांकि उन्होंने कभी हार नहीं मानी है और अपनी कोशिश करती रहीं. फिर उन्होंने 9 लाख रुपये का लोन लिया और एक यूनिट बनाई, जिसमें उन्होंने मोरिंगा की पत्तियों को सुखाकर पाउडर बनाया. फिर धीरे-धीरे उन्होंने साबुन, कैप्सूल और तेल भी बनाया.
5.आज बना दी करोड़ों की कंपनी

रिपोर्ट्स के अनुसार, में कामिनी सिंह की कंपनी का टार्नओवर 1.75 करोड़ था. लेकिन साल 2025 में उनकी कंपनी का टर्नओवर 2 करोड़ से भी ज्यादा का है. हालांकि आप इस कहानी से सीख ले सकते हैं कि उन्होंने सामने कितनी भी चुनौती आई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और हमेशा एक अलग रास्ता निकाला.