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19 की उम्र में कॉलेज छोड़ा, 10 साल में 30 हजार करोड़ का मालिक बना ये लड़का!

आज के दौर में जहां हर कंपनी अपना AI चैटबॉट बनाने की होड़ में है, वहीं अलेक्जेंडर वांग (Alexandr Wang) ने एक अलग रास्ता चुना और Scale AI के जरिए इस पूरी इंडस्ट्री की रीढ़ बन गए.

Gaurav Barar | May 12, 2026, 01:14 PM IST

1.अलेक्जेंडर वांग की सफलता की कहानी

अलेक्जेंडर वांग की सफलता की कहानी
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आज जब हम ChatGPT या अन्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल्स की बुद्धिमानी की चर्चा करते हैं, तो अक्सर पर्दे के पीछे काम करने वाले दिग्गजों को भूल जाते हैं. इन्ही दिग्गजों में एक नाम है अलेक्जेंडर वांग. जो केवल एक बिजनेसमैन नहीं, बल्कि उस दूरदर्शी सोच के प्रतीक हैं जिसने AI को तब ईंधन देना शुरू किया जब दुनिया इसके बारे में सोचना भी शुरू नहीं कर पाई थी. (All Image Source- X/@alexandr_wang)

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2.19 साल की उम्र में छोड़ा कॉलेज

19 साल की उम्र में छोड़ा कॉलेज
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अलेक्जेंडर वांग की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी लगती है. उन्होंने अपनी असाधारण प्रतिभा के दम पर दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान MIT में दाखिला लिया. लेकिन मात्र 19 साल की उम्र में उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया और अपने प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया. उस समय AI आज की तरह चर्चा में नहीं था, लेकिन वांग ने देख लिया था कि आने वाला समय डेटा का होगा.

3.बिखरे हुए डेटा को दी नई पहचान

बिखरे हुए डेटा को दी नई पहचान
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AI मॉडल तभी तक स्मार्ट हैं, जब तक उनके पास उच्च गुणवत्ता वाला डेटा हो. समस्या यह थी कि इंटरनेट पर डेटा बिखरा हुआ और अव्यवस्थित था. वांग ने अपनी कंपनी Scale AI के जरिए डेटा लेबलिंग की नींव रखी. उन्होंने कच्चे डेटा को क्लीन करके उसे AI के समझने योग्य बनाया. उनकी रणनीति बहुत सटीक थी, उन्होंने अपना खुद का चैटबॉट बनाने के बजाय, उन कंपनियों को डेटा बेचना शुरू किया जो AI की जंग लड़ रही थीं. उन्होंने खुद को AI का इनेबलर बनाया.
 

4.सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स किए हासिल

सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स किए हासिल
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जहां सिलिकॉन वैली के अधिकांश स्टार्टअप्स नैतिक उलझनों या इमेज के डर से मिलिट्री प्रोजेक्ट्स से दूरी बनाए रखते थे, वहीं वांग ने इसे एक अवसर के रूप में देखा. उन्होंने यूएस पेंटागन के साथ हाथ मिलाया और रक्षा क्षेत्र में डेटा विश्लेषण की आधुनिक तकनीक पेश की. इसने उन्हें न केवल आर्थिक मजबूती दी, बल्कि एक भरोसेमंद टेक्नोलॉजिस्ट के रूप में भी स्थापित किया.

5.स्मार्ट बिजनेस मॉडल और ग्लोबल नेटवर्क

स्मार्ट बिजनेस मॉडल और ग्लोबल नेटवर्क
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वांग का बिजनेस मॉडल अत्यधिक कुशल था. उन्होंने एक API-बेस्ड सिस्टम विकसित किया. शुरुआती दिनों में उन्होंने दुनिया भर के हजारों फ्रीलांसरों से डेटा लेबलिंग करवाई, जिससे उन्हें भारी-भरकम फुल-टाइम स्टाफ रखने की जरूरत नहीं पड़ी. 

6.ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में लाए बड़ा बदलाव

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में लाए बड़ा बदलाव
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जब Tesla, Toyota और GM जैसी दिग्गज कंपनियां अपनी सेल्फ-ड्राइविंग कारों को ट्रेन करने के लिए संघर्ष कर रही थीं, तब Scale AI उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण पार्टनर बनकर उभरी. वीडियो डेटा को फ्रेम-दर-फ्रेम लेबल करने की उनकी तकनीक ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में क्रांति ला दी.
 

7.मेटा के साथ ऐतिहासिक डील 

मेटा के साथ ऐतिहासिक डील 
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वांग की सफलता का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब मेटा (फेसबुक) ने उनकी कंपनी में ₹1.36 लाख करोड़ का भारी-भरकम निवेश किया. इस डील ने Scale AI की वैल्यू को लगभग ₹2.85 लाख करोड़ तक पहुंचा दिया.

8.मेटा में चीफ एआई ऑफिसर

मेटा में चीफ एआई ऑफिसर
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आज अलेक्जेंडर वांग को मेटा में चीफ एआई ऑफिसर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह कदम न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह दर्शाता है कि भविष्य के बड़े AI प्रोजेक्ट्स में उनकी भूमिका कितनी निर्णायक होने वाली है. महज एक ड्रॉपआउट से लेकर दुनिया के सबसे प्रभावशाली AI रणनीतिकार बनने तक का सफर, अलेक्जेंडर वांग को आज की पीढ़ी का सबसे सफल टेक्नोलॉजिस्ट बनाता है.

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