बिजनेस
ऋतु सिंह | May 20, 2026, 09:33 AM IST
1. पंजाब के एक कारोबारी की कहानी आपकी सोच बदल देगी

क्या सिर्फ बड़ी डिग्री ही सफलता की गारंटी होती है? पंजाब के एक कारोबारी की कहानी इस सोच को पूरी तरह बदल देती है. कभी फैक्ट्री में मामूली मजदूरी करने वाला एक लड़का आज हजारों करोड़ रुपये के बिजनेस साम्राज्य का मालिक है और उसकी कंपनी का कारोबार दुनिया के 150 से ज्यादा देशों तक पहुंच चुका है.
यह कहानी सिर्फ पैसे कमाने की नहीं, बल्कि उस सोच की है जिसमें हालात से हार मानने के बजाय मौके तलाशे जाते हैं. खास बात यह है कि इस सफर की शुरुआत किसी बड़े निवेश या पारिवारिक बिजनेस से नहीं, बल्कि संघर्ष और छोटे-छोटे कामों से हुई थी. (फोटो एआई)
2.14 साल की उम्र में छोड़नी पड़ी पढ़ाई

पंजाब के बठिंडा में जन्मे राजिंदर गुप्ता का बचपन आर्थिक चुनौतियों के बीच गुजरा. परिवार की जिम्मेदारियां इतनी बढ़ गईं कि उन्हें कम उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी. जब बाकी बच्चे स्कूल जा रहे थे, तब वे काम की तलाश में फैक्ट्रियों के चक्कर लगा रहे थे. शुरुआती दिनों में उन्होंने मोमबत्ती और सीमेंट पाइप बनाने जैसे छोटे काम किए. उस समय उनकी रोज की कमाई करीब ₹30 थी.
यह रकम भले आज छोटी लगे, लेकिन उसी दौर ने उन्हें मेहनत, अनुशासन और बाजार की असली समझ दी. यही अनुभव बाद में उनके बिजनेस की सबसे बड़ी ताकत बना. (फोटो एआई)
3.छोटी शुरुआत से खड़ा किया बड़ा कारोबार

राजिंदर गुप्ता ने शुरुआत में छोटी बचत और सीमित संसाधनों के साथ अपना काम शुरू किया. 1980 के दशक में उन्होंने फर्टिलाइजर कारोबार में कदम रखा. धीरे-धीरे उन्होंने टेक्सटाइल और पेपर इंडस्ट्री में विस्तार करना शुरू किया. यहीं से ट्राइडेंट ग्रुप की नींव पड़ी. उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक छोटे शहर से शुरू हुआ यह कारोबार एक दिन वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना लेगा.
विशेष बात यह रही कि उन्होंने सिर्फ बिजनेस बढ़ाने पर नहीं, बल्कि नए प्रयोगों पर भी ध्यान दिया. गेहूं के भूसे से पेपर बनाने जैसे मॉडल ने कंपनी को अलग पहचान दिलाई. (फोटो एआई)
4.आज 150 देशों में पहुंचा कारोबार

समय के साथ ट्राइडेंट ग्रुप दुनिया की बड़ी टेरी टॉवल बनाने वाली कंपनियों में शामिल हो गया. कंपनी के प्रोडक्ट अब अमेरिका, यूरोप और कई एशियाई देशों तक पहुंच चुके हैं.
आज कंपनी का कारोबार हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. लेकिन इस सफलता का एक और पहलू भी है. बड़े स्तर पर फैक्ट्री और उत्पादन बढ़ने से हजारों लोगों को रोजगार मिला. यानि यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति के अमीर बनने की नहीं, बल्कि रोजगार और उद्योग के जरिए पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने की भी है. (फोटो एआई)
5.क्यों अलग मानी जाती है यह सफलता

भारत में अक्सर सफलता को डिग्री और बड़े कॉलेज से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन राजिंदर गुप्ता की कहानी बताती है कि बिजनेस में अनुभव, जोखिम लेने की क्षमता और लगातार सीखते रहने की आदत भी उतनी ही जरूरी है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि छोटे शहरों से आने वाले उद्यमियों में जमीन से जुड़ी समझ ज्यादा होती है. यही वजह है कि वे बाजार की जरूरत को जल्दी पहचान लेते हैं. राजिंदर गुप्ता को कई लोग पंजाब का ‘धीरूभाई अंबानी’ भी कहते हैं. उनकी यात्रा आज बिजनेस स्कूलों में प्रेरणादायक उदाहरण के तौर पर पढ़ाई जाती है. (फोटो एआई)
6.आज के युवाओं को क्या सीखना चाहिए

आज जब लाखों युवा नौकरी और करियर को लेकर दबाव महसूस कर रहे हैं, तब ऐसी कहानियां एक अलग संदेश देती हैं. हर सफलता की शुरुआत बड़ी नहीं होती. कई बार छोटा काम, कम कमाई और संघर्ष ही आगे चलकर सबसे बड़ी ताकत बन जाते हैं.
डिजिटल दौर में बिजनेस शुरू करने के मौके पहले से ज्यादा बढ़े हैं. लेकिन सफलता उन्हीं को मिलती है जो मुश्किल दौर में भी लगातार काम करते रहते हैं. राजिंदर गुप्ता की कहानी यही बताती है कि हालात चाहे जैसे हों, अगर सोच बड़ी हो तो छोटे शहर और कम पढ़ाई भी रास्ता नहीं रोक सकते. (फोटो एआई)