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PM Kisan Yojana: फरवरी पेआउट पिछले साल मई की तुलना में 24% हुआ कम, संसद में जारी हुआ केंद्र का डेटा

सरकार ने लाभार्थी किसानों को मिलने वाले किस्त को लेकर एक डेटा जारी किया है. इसके मुताबिक पिछले साल की तुलना में लाभार्थियों की संख्या घटी है.

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PM Kisan Yojana: फरवरी पेआउट पिछले साल मई की तुलना में 24% हुआ कम, संसद में जारी हुआ केंद्र का डेटा

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डीएनए हिंदी: केंद्र ने संसद में पुष्टि की कि पिछले साल 31 मई को दी गई राशि के मुकाबले किसानों को लेटेस्ट पीएम किसान किस्त (PM Kisan Yojana) के तहत दी गई कुल राशि में 24% से अधिक की गिरावट आई है. जबकि इस योजना के तहत पिछले साल 31 मई को किस्त के रूप में लगभग 22,555 करोड़ रुपये दिए गए थे, पिछले साल 17 अक्टूबर को कुल राशि गिरकर लगभग 17,985 करोड़ रुपये हो गई और 27 फरवरी 2023 को भुगतान की गई लेटेस्ट किस्त में और कम होकर 17,107 करोड़ रुपये हो गई.

पिछले साल के मुकाबले लाभार्थी किसानों की घटी संख्या

एक रिपोर्ट के मुताबिक 27 फरवरी को 2,000 रुपये की लेटेस्ट किस्त पाने वाले किसानों की संख्या पिछले मई में 11.27 करोड़ किसानों से घटकर लगभग 8.54 करोड़ हो गई है.

यह केंद्रीय डेटाबेस में किसानों के भूमि और लाभार्थी रिकॉर्ड को अपडेट नहीं किए जाने के कारण हो सकता है, केंद्र द्वारा ट्रांसपेरेंसी और धोखाधड़ी को कम करने और यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य किया गया है कि कोई लीकेज या अपात्र लाभार्थी इसका लाभ ना उठा सके.

लाभार्थी किसानों के डेटा की वेरिफिकेशन

पीएम-किसान के तहत लाभ जारी करना एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है. कृषि मंत्री एनएस तोमर (Agriculture Minister NS Tomar) ने संसद को बताया कि संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों से डेटा मिलने और पीएम-किसान पोर्टल पर इसके वेरिफिकेशन के बाद लाभ जारी किए जाते हैं.

तोमर ने एक लिखित जवाब में कहा कि योजना के ऑपरेशनल गाइडलाइन्स के मुताबिक, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पीएम-किसान पोर्टल पर डेटा अपलोड करने से पहले पात्र किसानों की पहचान और वेरिफिकेशन करते हैं. “पीएम-किसान पोर्टल पर आधार प्रमाणीकरण (Aadhaar Authentication), सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (Public Finance Management System) के खाते और सरकारी कर्मचारियों/पेंशनरों के डेटा के सत्यापन के लिए अपलोड किए गए डेटा के वेरिफिकेशन के बाद डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर मोड के जरिए पात्र लाभार्थियों को लाभ ट्रांसफर किए जाते हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि पात्र किसानों का नामांकन किया जा रहा है और मृतक या अपात्र लाभार्थियों को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा लाभार्थी के डेटा के निरंतर ववेरिफिकेशन और वैलीडेशन के जरिए हटाया जा रहा है.

तोमर ने आगे कहा कि योजना के तहत डेटा गतिशील है. “राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों को उचित सत्यापन के बाद लाभार्थियों को अपात्र और इसके विपरीत पात्र के रूप में चिह्नित करने का विकल्प प्रदान किया गया है. सभी लाभार्थियों की स्थिति वेरीफाई करने के लिए उनका e-KYC भी किया जा रहा है. राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों को सभी पात्र लाभार्थियों के साथ योजना के लिए प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा गया है.

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