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लोगों के मन में ये सवाल जरूर उठता होगा कि भारतीय करेंसी नोट्स कहां छपते हैं. इतना ही नहीं, लोगों के मन में ये भी सवाल उठता होगा कि नोट छापने का कंट्रोल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) या केंद्रीय सरकार किसके पास रहता है.
भारत में रोजमर्रा का लेन-देन करोड़ों-अरबों के हिसाब से होता है. भारतीय जनता 10 के नोट से लेकर 500 के नोट तक का लेन-देन रोजाना करती है. लेकिन, लोगों के मन में ये सवाल जरूर उठता होगा कि भारतीय करेंसी नोट्स कहां छपते हैं. इतना ही नहीं, लोगों के मन में ये भी सवाल उठता होगा कि नोट छापने का कंट्रोल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) या केंद्रीय सरकार किसके पास रहता है. आइए जानते हैं कि नोटों की छपाई कहां होती है और इसका कंट्रोल किसके पास रहता है.
भारत के किन राज्यों में छपते हैं नोट?
भारत में करेंसी नोटों की छपाई चार प्रमुख प्रिंटिंग प्रेस में की जाती है, जो भारत के अलग-अलग 4 राज्य में स्थित है. भारत के नासिक, देवास, मैसूर और सालबोनी में नोटों की छपाई होती है. इसमें से नासिक की करेंसी प्रेस भारत की सबसे पुरानी प्रिंटिंग प्रेस है. हालांकि, मैसूर में बड़ी मात्रा में करेंसी की छपाई होती है.
क्या खुद RBI छापता है करेंसी?
भारत में कई लोग ऐसे होंगे, जो सोचते होंगे कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया खुद ही करेंसी नोट छापता है. लेकिन इसकी सच्चाई थोड़ी अलग है. हालांकि, नोटों की छपाई विशेष सरकारी और आरबीआई से जुड़ी कंपनियों में कराई जाती है. हालांकि, मुद्रा जारी करना और उसका नियंत्रण आरबीआई के पास रहता है.
सरकार या RBI किसके पास है इसका कंट्रोल?
भारत के लोगों को लगता होगा कि करेंसी की छपाई केवल आरबीआई कंट्रोल करता है. लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. नोटों की छपाई के लिए आरबीआई और सरकार दोनों ही महत्वपूर्ण भुमिका निभाते हैं. आरबीआई तय करता है कि मार्केट में कितने नोटों की जरूरत है और कितने नोट जारी करने होंगे. वहीं केंद्र सरकार नोटों की डिजाइन, सुरक्षा फीचर्स और प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं को देखती है. 1934 के तहत 2 रुपये के नोट से लेकर 500 तक के नोट तक या उससे ऊपर के नोट जारी करने का अधिकार आरबीआई के पास ही है.