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EMI, ये टर्म कितना कॉमन है इसका अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इस आर्टिकल को पढ़ते वक्त आपके आसपास जितने लोग दिख रहे हैं, उनमें से 60 प्रतिशत ऐसे होंगे जिनकी किसी न किसी लोन की EMI चल रही होगी. लेकिन बहुत कम लोग होंगे जिन्हें EMI का फुल फॉर्म पता होगा.
EMI Full Form: पूरी दुनिया के अर्थशास्त्री इस बात से परेशान हैं कि ज्यादातर लोग कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो भारत में रहने वाले कम से कम 60 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्होंने छोटा-बड़ा लोन लिया हुआ है और वो उस लोन की EMI पटा रहे हैं. आपके आसपास ही कितने लोग आपको मिल जाएंगे जो महंगे iPhone लेकर चल रहे होंगे, जिन्होंने घर लिया होगा या जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट से नहीं कार से चलते होंगे. इनसे जब आप उनकी महंगी खरीदारी की पार्टी मांगेंगे तो वो डायलॉग सुना देंगे- बाबू मोशाय!जिनके खर्चे EMI पर चलते हैं वो पार्टी नहीं दिया करते.
बहरहाल, हमारे आसपास के इतने सारे लोग EMI पर जी रहे हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर लोगों को लगता है कि EMI का फुलफॉर्म Every Month Instalment है. जबकि ऐसा नहीं है.
ये फैक्ट है कि EMI हर महीने कटती है. लेकिन इसका मतलब होता है Equated Monthly Instalment. ये EMI इस आधार पर तय होती है कि आपने कितना लोन लिया है, कितने साल के लिए लिया है और कितने इंटरेस्ट पर लिया है. लोन लेते वक्त NBFC और बैंक वाले कैल्कुलेट करते हैं कि आपको कुल कितने रुपये लौटाने होंगे. उसके बाद तय होती है EMI. ये EMI हर महीने आपके अकाउंट से कट जाती है.
कोई भी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट आपको लोन ये देखकर देता है कि आप लोन वापस चुका सकते हैं या नहीं. नौकरीपेशा लोगों को या जिनके अकाउंट पर हर महीने फिक्स्ड इनकम आती है उन्हें बैंक वाले बिना किसी सबूत के एक तय अमाउंट तक का पर्सनल लोन ऑफर करते हैं. वहीं, अगर आप होम लोन, कार लोन, बिजनेस लोन जैसा कोई बड़ा लोन लेने का प्लान करते हैं तो आपको अपनी आय का सबूत बैंक को देना होगा. इसके लिए आपको अपना ITR, सैलरी स्लिप आदि बैंक में देना होगा. आपकी आर्थिक स्थिति का जायज़ा लेने के बाद ही बैंक वाले आपका लोन अप्रूव करते हैं.
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