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2024-25 में भारतीय दवाओं का वैश्विक निर्यात 30.5 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो 2000-01 से 16 गुना ज्यादा था. उस समय 1.9 अरब अमेरिकी डॉलर रहा था.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए ऐलान से भारत का पूरा फार्मास्युटिकल सेक्टर हिल गया है. ट्रंप ने अमेरिका में इंपोर्ट होने वाली जेनेरिक दवाओं पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. इस मामले में भारत अमेरिका का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है. ऐसे में फार्मास्युटिकल सेक्टर की चिंता बढ़ गई है.
पिछले साल भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात किया था. भारत दुनियाभर में जेनेरिक दवाओं का जितना निर्यात करता है, उसका 36 प्रतिशत अमेरिका को होता है. भारत का वैश्विक निर्यात 30.5 अरब अमेरिकी डॉलर है.
ट्रंप ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि 1 अगस्त, 2026 से अमेरिका आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो साल तक शून्य फीसदी आयात शुल्क रहेगा, लेकिन उसके बाद एक साल के लिए 100 प्रतिशत और उससे अगले साल से टैरिफ 200 प्रतिशत कर दिया जाएगा. इसका मतलब है कि फार्मास्युटिकल कंपनियों पर इस संकट की शुरुआत 2029 से होगी.
ट्रंप का कहना है कि ये फैसला इसलिए लिया गया है ताकि अमेरिका की दूसरे देशों पर निर्भरता कम हो और जेनेरिक दवाओं का यहीं उत्पादन शुरू हो. उनका कहना है कि जो कंपनियां तय समय के अंदर अमेरिका में कारखाने और जरूरी उपकरण नहीं लगाएंगे, उन्हें उनकी नीति के तहत दंड का सामना करना पड़ेगा.
कितने देशों को दवाओं का निर्यात करता है भारत?
भारत दुनिया में जेनेरिक दवाओं का तीसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है, जबकि मूल्य के हिसाब से 11वें नंबर पर आता है. भारत 191 देशों को जेनेरिक दवाएं और मेडिकल इक्विपमेंट एक्सपोर्ट करता है, जिनमें से 50 प्रतिशत निर्यात अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में होता है. 2024-25 में भारत ने 30.5 अरब अमेरिकी डॉलर की दवाओं का निर्यात किया था, जो 2000-01 से 16 गुना ज्यादा था. उस समय 1.9 अरब अमेरिकी डॉलर रहा था.
किन देशों में नहीं लगता भारतीय दवाओं पर कोई टैरिफ?
पिछले साल ब्रिटेन के साथ इंडिया-यूके कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड डील हुई थी, जिसके तहत भारतीय दवाओं और मेडिकल उपकरणों पर जीरो टैरिफ लागू होगा. ब्रिटेन यूरोप में भारत का सबसे बड़ा फार्मास्यूटिकल इंपोर्टर है. इंडिया-यूके डील के तहत सर्जिकल, डायग्नोस्टिक इक्विपमेंट, ईसीजी मशीन और एक्स-रे जैसी मशीनों पर जीरो टैरिफ लागू होगा. वहीं, यूरोपीयन यूनियन के साथ हुई फ्री ट्रेड डील ने यूरोप की बड़ी मार्केट में भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं.
भारत और यूरोपीयन यूनियन के बीच हुई फ्री ट्रेड डील 2027 से पूरी तरह लागू हो जाएगी, जिसके तहत 27 यूरोपीय देशों की मार्केट में जीरो या बहुत कम टैरिफ के साथ भारतीय सामान उपलब्ध होना शुरू हो जाएंगे. पिछले साल जुलाई में हुई इस डील ने भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए यूरोप के 572.3 अरब डॉलर के फार्मास्युटिकल और मेडिकल टेक्नोलॉजी मार्केट में पहुंच को आसान बना दिया है.
इंडिया-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड डील
पिछले साल दिसंबर में ही भारत की न्यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड डील हुई, जिसके तहत न्यूजीलैंड ने भारतीय दवाओं पर लगने वाला टैरिफ पूरी तरह से खत्म कर दिया था. डील से पहले वह भारतीय जेनेरिक दवाओं और मेडिकल इक्विपमेंट्स पर 5 प्रतिशत टैरिफ लगाता था.
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