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रिपोर्ट में बताया गया कि जून में भारत, तुर्किए, ब्रुनेई और जॉर्जिया की रिफाइनरियों ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों- यूरोपीय संघ, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया, को 81.4 करोड़ यूरो मूल्य के पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया, इनमें से करीब 36.9 करोड़ यूरो के उत्पाद रूस के कच्चे तेल से तैयार किए गए थे.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. 25 प्रतिशत टैरिफ ये कहकर लगाया गया कि भारत अमेरिकी सामानों पर ज्यादा टैक्स वसूलता है, जबकि 25 प्रतिशत टैरिफ रूसी तेल खरीदने के लिए पेनल्टी के तौर पर लगाया गया था. अब एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें पता चला है कि वो देश जिन्होंने रूस के कच्चे तेल पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं, वे खुद भारत, तुर्किये, ब्रुनेई और जॉर्जिया की रिफाइनरियों से रूसी तेल से बने पेट्रोलियम उत्पादों का आयात कर रहे हैं.
रूसी तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश भारत
साल 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिका और यूरोपीय संघ (European Union, EU) ने रूसी तेल के निर्यात पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए थे. हालांकि, भारत ने पिछले कुछ समय में रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है और जून में वह रूस से कच्चा तेल खरीदने वाला चीन के बाद सबसे बड़ा देश बन गया है.
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने मई के मुकाबले जून में रूस से 34 प्रतिशत अधिक खरीदारी की है. जून में भारत ने 4.5 अरब यूरो के तेल का आयात किया है. इसी रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका, यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया ने भारत, तुर्किए, ब्रुनेई और जॉर्जिया के जरिए रूसी तेल से बने उत्पादों का आयात किया है.
अमेरिका, ईयू और ऑस्ट्रेलिया ने भारत से खरीदे रूसी तेल से बने उत्पाद
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत रूस के कच्चे तेल से तैयार किए गए रिफाइंड फ्यूल के वैश्विक व्यापार में भी अहम भूमिका निभा रहा है. रिपोर्ट में बताया गया कि जून में भारत, तुर्किए, ब्रुनेई और जॉर्जिया की रिफाइनरियों ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों- यूरोपीय संघ, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया को 81.4 करोड़ यूरो मूल्य के पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया, इनमें से करीब 36.9 करोड़ यूरो के उत्पाद रूस के कच्चे तेल से तैयार किए गए थे.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों के आयात पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंध के बावजूद जून में भारतीय रिफाइनरियों से भेजी गई ऐसी दो खेप यूरोपीय बंदरगाहों पर उतारी गईं. इसके अलावा, जून में जामनगर रिफाइनरी से रूसी कच्चे तेल से तैयार जेट ईंधन की पहली खेप ब्रिटेन भेजी गई थी. ब्रिटिश सरकार की ओर से दिए गए विशेष प्रावधान के तहत यह आयात हुआ था.
रूसी तेल पर अमेरिका का नया सेंक्शन बिल
चार अमेरिकी सीनेटरों ने ट्रंप प्रशासन के साथ मिलकर रूस पर नए प्रतिबंध लगाने वाले बिल 'सेंक्शन बिल' को आगे बढ़ाने पर सहमति बनाई है. इस बिल का मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है, जिससे उसकी वॉर मशीन के लिए फंडिंग को रोका जा सके. जो देश रूस से कच्चा तेल, नेचुरल गैस, यूरेनियम और दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद खरीद रहे हैं, उनको इसमें निशाने पर रखा गया है.
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