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Union Budget 2025: इनकम टैक्स में 1 लाख करोड़ की छूट सरकार को नुकसान या GDP को फायदा? समझें गणित

केंद्र सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब में जो बदलाव किया है उससे माना जा रहा है कि सरकार ने मिडिल क्लास को तो खुश कर दिया लेकिन, उससे केंद्र सरकार इनकम टैक्स से मिलने वाले पैसों में 1 लाख करोड़ रुपए की कमी आएगी. आइए समझें नफा-नुकसान.

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Union Budget 2025: इनकम टैक्स में 1 लाख करोड़ की छूट सरकार को नुकसान या GDP को फायदा? समझें गणित
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Union Budget 2025: देश में पहली बार इनकम टैक्स में इतनी बड़ी छूट के बाद मिडिल क्लास गदगद हो गया है. मोदी सरकार ने भारत के इतिहास में पहली बार इनकम टैक्स में इतनी बड़ी छूट का ऐलान किया है. केंद्र सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब में जो बदलाव किया है उससे माना जा रहा है कि सरकार ने मिडिल क्लास को तो खुश कर दिया लेकिन, उससे केंद्र सरकार इनकम टैक्स से मिलने वाले पैसों में 1 लाख करोड़ रुपए की कमी आएगी. हालांकि, विशेषज्ञों की राय इससे अलग है. 

इस कैलकुलेशन को भारत सरकार के 17वें मुख्य आर्थिक सलाहकार प्रो. कृष्णमूर्ति वी सुब्रमण्यन ने सोशल मीडिया साइट 'एक्स' पर एक पोस्ट शेयर समझाया है. मुख्य आर्थिक सलाहकार ने बताया है कि कैसे सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये के नुकसान से देश की जीडीपी को 8 प्रतिशत की दर से दौड़ने के काबिल बना दिया है. 

12 लाख की इनकम पर नहीं लगेगा टैक्स  
इस बार के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने न्यू टैक्स रिजीम में आने वालों के लिए बड़ी घोषणा की है, जिसमें उन्होंने बताया है कि जिन लोगों ने न्यू टैक्स रिजीम को चुना हुआ है, उनकी 12 लाख रुपए सालाना तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. इसके साथ ही इनकम टैक्स की न्यू रिजीम में 75 हजार रुपए का डिडक्शन भी मिलता है, जिससे 12 लाख 75 हजार रुपए तक की सालाना इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा.

इस छूट से सरकार को कितना नुकसान 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो टैक्स स्लैब बढ़ाया है, उससे सरकार के वित्तीय वर्ष 2025-26 में एक लाख करोड़ रुपए की कम आमदनी के बारे में बताया जा रहा है. इस नुकसान के बारे में वित्त मंत्री ने बजट पेश करते समय जिक्र भी किया. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकार को फायदा नहीं बल्कि देश की GDP का फायदा मिलेगा. 

आइए समझते हैं GDP का ये फायदा  
आसान शब्दों में समझा जाए तो सरकार के खजाने में एक लाख करोड़ रुपए नहीं आ रहे हैं, वो सीधे-सीधे लोगों की जेब में रहेंगे और प्रो. कृष्णमूर्ति वी सुब्रमण्यन की एक्स पोस्ट के अनुसार सामान्य तौर पर भारतीय अपनी इनकम के 20 प्रतिशत हिस्से की बचत करते हैं. ऐसे में 80 हजार करोड़ रुपए किसी ना किसी तरीके से मार्केट में आएंगे और इससे देश की GDP को बढ़ने का मौका मिलेगा.

प्रो. कृष्णमूर्ति वी सुब्रमण्यन ने एक्स पर पोस्ट शेयर करके बताया कि FY26 में खपत में 10% से अधिक की वृद्धि होगी और जी.डी.पी. में 8% से अधिक की वृद्धि होगी. वहीं, वित्त मंत्री के बजट भाषण के अनुसार व्यक्तिगत आयकर (PIT) में कटौती के कारण टैक्स छूट लगभग 1 लाख करोड़ रुपए होगी. यह मिडिल क्लास की उपलब्ध आय में सीधे वृद्धि करेगी.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार मिडिल क्लास लगभग अपनी इनकम के 20% की सेविंग करते हैं. इसलिए जो 1 लाख करोड़ रुपए टैक्स के तौर पर बचेंगे, उसमें से 80% हिस्सा खपत में जाएगा.

खपत गुणक = 1/(1 MPC), जहां MPC (सीमांत खपत प्रवृत्ति) = 1 बचत दर = 0.8. अतः, consumption multiplier खपत गुणक = 1/(1 0.8) = 5.

अब, ऊपर #1 के अनुसार, खपत में कुल वृद्धि होगी = (खपत गुणक) × (उपलब्ध आय में वृद्धि) = 5 × ₹1 लाख करोड़ = ₹5 लाख करोड़

इस वर्ष, खपत में वृद्धि 7.3% रही है जबकि जी.डी.पी. (GDP) में वृद्धि 6.4% हुई है. वहीं, वित्त वर्ष FY26 के लिए, अपेक्षित 6.3% की जी.डी.पी. वृद्धि के आधार पर, खपत में अनुमानित वृद्धि लगभग 7.2% होगी. ध्यान रहे, यह अनुमान बजट 2025 में PIT में कटौती के प्रभाव के बिना है.

अब हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि PIT में कटौती के कारण कुल खपत में कितनी वृद्धि होगी. जी.डी.पी. अनुमानों के अनुसार (https://tinyurl.com/2s47xfxz), वित्त वर्ष FY25 में वास्तविक खपत ₹104 लाख करोड़ है. चूंकि 5/104 = 4.8%, PIT में कटौती अतिरिक्त 4.8% की खपत वृद्धि प्रदान करेगी. अतः, मेरा अनुमान है कि वित्त वर्ष FY26 में खपत में कुल वृद्धि 4.8% + 7.2% = 12% होगी.

इसका जी.डी.पी. पर क्या प्रभाव पड़ेगा? वित्त वर्ष FY25 में वास्तविक जी.डी.पी. ₹185 लाख करोड़ है. चूंकि 5/185 = 2.7%, PIT में कटौती के कारण अतिरिक्त जी.डी.पी. वृद्धि 2.7% होगी. इसलिए प्रो. कृष्णमूर्ति का अनुमान है कि वित्त वर्ष FY26 में जी.डी.पी. में वृद्धि 6.3% (PIT में कटौती के बिना) + 2.7% (PIT में कटौती का प्रभाव) = 9% होगी.

अंतिम अनुमान: ऊपर दी गई गणनाओं में कुछ अधिक अनुमान लगाने की गुंजाइश को ध्यान में रखते हुए, यहां तक कि बहुत ही रक्षात्मक अंदाज़ में भी, खपत में >10% और जी.डी.पी. में >8% की उल्लेखनीय वृद्धि होगी.

 


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