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यूक्रेन से सालों से चल रहे युद्ध के बीच रूस ने अपने खजाने से गोल्ड बेचना शुरू कर दिया है. इसमें एशियाई बाजार में हांगकांग ने रूस से रिकॉर्ड तोड़ करीब 100 टन गोल्ड इंपोर्ट किया है.
रूस कच्चे तेल के निर्यात करने के बाद अब बड़े गोल्ड एक्सपोर्टर के रूप में उभरा है. सोना बेचने के लिए रूस एशियाई देशों से डील कर रहा है. इस साल के पहले 6 महीनों में हांगकांग रूस से करीब 14.4 अरब डॉलर का इंपोर्ट कर चुका है, जो पिछले साल यानी 2025 से करीब 50 प्रतिश से भी ज्यादा है. वहीं 2024 और 2023 की तुलना में यह 3 से 4 गुणा है. वहीं हॉन्ग कॉन्ग रूस से खरीदे गोल्ड को एशिया के अन्य देशों में पहुंचाता है. जानते हैं कि आखिर रूस के पास में कितना सोना है. वह अपने खजाने को क्यों बेच रहा है...
रूस ने 2026 में अपना सबसे ज्यादा सोना हांगकांग को बेचा है. इससे पहले 2025 में हॉन्ग कॉन्ग ने रूस से करीब 9.6 अरब डॉलर का गोल्ड इंपोर्ट किया था, लेकिन इस साल यह आंकड़ा काफी पीछे छूट गया है. वहीं इसके पीछे की वजह लंदन समेत दूसरे पश्चिमी देशों में रूसी के सोने का निर्यात बंद होना है. यही वजह है कि रूस का सोने बेचने यानी एक्सपोर्ट करने का रुख एशियाई बाजारों की तरफ मुड़ गया है. इसमें हॉन्ग कॉन्ग रूस से सोना खरीदने में सबसे पहले नंबर पर है.
इस समय में सोने की डिमांड देश ही नहीं, दुनियाभर में उछाल मार रही है. इसके बावजूद रूस अपने खजाने यानी सोने को बेच रहा है. इसके पीछे की वजह से रूस का यूक्रेन के साथ सालों से चल रहा युद्ध है. इसमें रूसी सरकार का खर्च काफी ज्यादा बढ़ गया है. अपने घाटे को पूरा करने के लिए रूस ने अब तक अपना करीब 50 टन सोना बेच दिया है. वहीं रूस ने अपना अधिकतम सोना एशियाई बाजारों में बेचा है. यही वजह है कि यह देश सोने बेचने के रूप में एक बड़ा ट्रेडिंग बनकर उभरा है.
दुनिया भर में कई ऐसे देश हैं, जिनके पास सोने के रूप में भारी खजाना भरा हुआ है. इनमें चीन सबसे पहले स्थान पर है. चीन के पास 384.3 मीट्रिक टन सोना है. वहीं दूसरे नंबर पर रूस है, जिसके खजाने में करीब 345 मीट्रिक टन भरा हुआ है. वहीं इसके बाद तीसरे स्थान पर ऑस्ट्रेलिया 293.2 टन, कनाडा, पेरू, घाना और अमेरिका समेत कई देश हैं.