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Tata Technologies IPO: 20 सालों बाद आ रहा है टाटा का आईपीओ, जानें क्या होगा प्राइस बैंड

Tata Technologies IPO: टाटा ग्रुप की कंपनी 20 सालों बाद IPO लेकर आ रही है. IPO के प्राइस बैंड और उससे जुड़े रिस्क के बारे में आइए आपको बताते हैं.

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Tata Technologies IPO: 20 सालों बाद आ रहा है टाटा का आईपीओ, जानें क्या होगा प्राइस बैंड
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डीएनए हिंदी: टाटा समूह की एक कंपनी जल्द ही लगभग 20 वर्षों में पहली बार अपना IPO लेकर आ रही है. होगी. परिणामस्वरूप निवेशकों (Tata Technologies IPO) में इस बात पर खूब चर्चा हो रही है. हम बात कर रहे हैं टाटा टेक्नोलॉजी की. कंपनी को आईपीओ (IPO) लाने के लिए सेबी (Sebi) की मंजूरी मिल गई है. अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में टाटा टेक्नोलॉजी (Tata Group) का आईपीओ प्राइमरी मार्केट में आने की उम्मीद है. इस आईपीओ (IPO) के संभावित परिणामों और उससे जुड़े संबंधित जोखिमों के बारे में आइए आपको बताते हैं.

जीएमपी (GMP) क्या है? 
ग्रे मार्केट पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक कंपनी के शेयर फिलहाल 105 रुपये के प्रीमियम के करीब  ट्रेड कर रहे हैं. इस सप्ताह का जीएमपी (Tata Technologies IPO GMP Today) पिछले सप्ताह की तुलना में अधिक है. जो एक मजबूत लिस्टिंग की ओर इशारा करता है. पिछले सप्ताह टाटा टेक्नोलॉजी के आईपीओ का जीएमपी 89 रुपये था.

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ये हो सकता है IPO का प्राइस बैंड
स्टॉक मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, Cyient का मार्केट कैप 12,000 करोड़ रुपये है. टाटा टेक्नोलॉजी ने 405,668,530 शेयर का प्रस्ताव सामने रखा है. ऐसे में कंपनी के लिए आईपीओ (Tata IPO) का मूल्य (Price Band)  295 रुपये प्रति शेयर के आसपास हो सकता है. हालांकि, आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 265 रुपये से 270 रुपये के बीच हो सकता है, यह केवल तभी संभव होगा अगर कंपनी 10% से 15% के बीच छूट प्रदान करती है. हालांकि अगर कंपनी को लगता है कि इस आईपीओ को लेकर बाजार में भारी मांग है और लोग अपनी रुचि इसमें दिखा रहे हैं तो इसकी कीमत 315 रुपये से 320 रुपये तक भी हो सकती है.

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Tata IPO से जुड़े संभावित जोखिम
1. कंपनी का भारी भरकम रेवेन्यू सिर्फ 5 क्लाइंट्स से आता है.

2 ऑटोमोटिव उद्योग कंपनी के रेवेन्यू में एक बड़ा योगदान देता है. ऐसे में कंपनी का कैश फ्लो और रेवेन्यू,  कंपनी सेक्टर की परफॉर्मेंस से अधिक प्रभावित होगा.

3- ईवी उद्योग की अनिश्चितताओं का कैश फ्लो और व्यावसायिक संचालन पर असर पड़ सकता है.


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