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भारतीय कृषि में बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता के बीच किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार कई महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएं चला रही है.
भारत में आज भी ज़्यादातर आबादी का गुजारा खेती-किसानी से ही चलता है. देश को कृषि प्रधान तो कह दिया जाता है, लेकिन जमीन पर उतरकर देखें तो खेती करना हर दिन एक नई चुनौती का सामना करने जैसा है. कभी अचानक बदला मौसम फसल बर्बाद कर देता है, तो कभी खाद-बीज और डीजल के बढ़ते दाम किसानों की कमर तोड़ देते हैं.
ऐसे वक्त में किसानों को सहारा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई तरह की योजनाएं चलाती हैं. हालांकि, जमीनी हकीकत यह भी है कि सही और सटीक जानकारी न होने की वजह से कई जरूरतमंद किसान इन सुविधाओं का पूरा फायदा उठाने से चूक जाते हैं. अगर आप खेती से जुड़े हैं और अपनी लागत घटाकर मुनाफा बढ़ाना चाहते हैं, तो सरकार की इन प्रमुख योजनाओं के बारे में जानना आपके लिए बेहद जरूरी है.
हर फसल के सीजन में किसानों को खाद, बीज और कीटनाशक खरीदने के लिए नकदी की जरूरत होती है. इसी जेब खर्च को आसान बनाने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के जरिए सालाना 6,000 रुपये सीधे किसानों के खाते में भेजे जाते हैं. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 2-2 हजार रुपये की तीन किस्तों में मिलने वाली यह मदद किसानों को साहूकारों और ऊंची ब्याज दर वाले कर्ज के जाल में फंसने से बचाती है.
बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या कीटों का हमला- ये कुछ ऐसी प्राकृतिक आपदाएं हैं जो रातों-रात किसान की महीनों की मेहनत पर पानी फेर देती हैं. इस अनिश्चितता से बचाने के लिए फसल बीमा योजना काम आती है. इसमें किसान को बहुत मामूली प्रीमियम देना पड़ता है, और फसल को नुकसान होने पर सरकार बीमा कंपनी के जरिए उचित मुआवजा सुनिश्चित करती है.
आज के दौर में पारंपरिक तरीकों से खेती करना न सिर्फ थकाऊ है, बल्कि इसमें समय भी ज़्यादा लगता है. ट्रैक्टर, हार्वेस्टर या आधुनिक बुआई मशीनें खरीदना हर किसान के बस की बात नहीं होती. इसी समस्या को हल करने के लिए सरकार कृषि उपकरणों की खरीद पर 50 से लेकर 80 फीसदी तक की सब्सिडी दे रही है. छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इससे उनकी मेहनत और समय दोनों की बचत होती है.
पानी की कमी और गिरता भूजल स्तर खेती की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है. 'हर खेत को पानी' के लक्ष्य के साथ शुरू की गई इस योजना में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली लगाने के लिए बड़ी सब्सिडी दी जाती है. इस आधुनिक तकनीक से न सिर्फ पानी और बिजली की भारी बचत होती है, बल्कि फसलों को बराबर नमी मिलने से पैदावार भी बेहतरीन होती है.
सरकारी योजनाएं किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ही तैयार की जाती हैं. यदि आप भी एक किसान हैं और अब तक इन सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाए हैं, तो बिना देर किए अपने नजदीकी सीएससी (CSC) सेंटर, कृषि विभाग के कार्यालय या संबंधित आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आज ही आवेदन करें और अपनी खेती को सुरक्षित और आधुनिक बनाएं.
सब्सिडी का सटीक प्रतिशत और आवेदन की प्रक्रिया अलग-अलग राज्यों के नियमों, किसान की श्रेणी (जैसे- छोटे/सीमांत किसान, महिला किसान, SC/ST) के अनुसार थोड़ा-बहुत बदल सकती है. इसलिए आवेदन करने से पहले किसान को हमेशा संबंधित राज्य के कृषि विभाग या आधिकारिक पोर्टल पर डिटेल्स जरूर चेक कर लेनी चाहिए.