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थोक बाजार में चीनी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन अभी तक रिटेल मार्केट में इसका ज्यादा असर देखने को नहीं मिला है. इसी को ध्यान में रखते हुए अब सरकार 2.5 लाख टन रिफाइंड चीनी को मार्केट में उतारने की तैयार में है.
त्योहारी सीजन रक्षाबंधन और जन्माष्टमी का त्योहार चला गया है, लेकिन इनके शुरू होने से पहले अचानक बढ़े चीनी के दामों में अब भी कोई खास फर्क नहीं आया है. चीनी के दाम रिटेल मार्केट में हल्की गिरावट के साथ 58 से 60 रुपये किलोग्राम पर बने हुए हैं. ऐसे में चीनी के दामों को कम करने के लिए सरकार कंपनियों से बात कर रिफाइंड चीनी उतराने की तैयारी में जुट गई है. आप ने अब तक रिफाइंड तेल तो सुना होगा, लेकिन शायद ही रिफाइंड चीनी के बारें में सुना हो. ऐसे में बहुत से लोग असमंजस में हैं कि आखिर ये रिफाइंड चीनी क्या होती और कैसे तैयार होती है. आइए जानते हैं रिफाइंड चीनी से लेकर ये काम मार्केट में चीनी के दामों को कम कर सकती है.
इस बढ़ती कीमत पर लगाम कसने के लिए अब चीनी मिलों और रिफाइनरियों ने कमर कस ली है. देश की बड़ी शुगर रिफाइनरियों ने मिलकर घरेलू बाजार में लगभग 2.5 लाख टन रिफाइंड चीनी उतारने की ठोस रणनीति बनाई है, जब बाजार में अचानक इतने बड़े पैमाने पर स्टॉक पहुंचेगा, तो मांग और आपूर्ति का असंतुलन अपने आप सुधरेगा. इसका सीधा असर थोक भावों पर देखने को मिलेगा. वहीं धीरे धीरे यह रिटेल तक पहुंचेगा, जिसके बाद चीनी के दाम 10 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम तक कम हो सकेंगे.
आम बोलचाल की भाषा में जिसे हम बेहद चमकदार, सफेद और दानेदार चीनी कहते हैं, उसी को रिफाइंड चीनी कहते हैं. इसे तैयार करने के लिए मुख्य रूप से रॉ शुगर यानी कच्ची चीनी या सीधे गन्ने के रस को आधुनिक रिफाइनिंग प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है. देश के तटीय इलाकों या बंदरगाहों के पास स्थित रिफाइनरियां बाहर से रॉ मटेरियल मंगाकर उसे प्रोसेस करती हैं. अब इसी पोर्ट-बेस्ड और रिफाइंड स्टॉक का एक बड़ा हिस्सा लोकल मार्केट की तरफ मोड़ा जा रहा है, ताकि रिटेल मार्केट में बढ़े चीनी की दामों को कम किया जा सकें. आम जनता की जेब का बोझ कम किया जा सकें.
इस पूरी कवायद के पीछे सिर्फ स्टॉक बढ़ाना ही मकसद नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक दूसरा रणनीतिक पहलू भी है.एक्सपर्ट्स की मानें तो पिछले दिनों सरकारी सख्ती और प्रशासनिक छापों के डर से सप्लाई चेन में थोड़ी रुकावट आई थी. इसकी वजह से चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला.अब रिफाइनरियों द्वारा भारी मात्रा में चीनी बाजार में झोंके जाने से न सिर्फ जमाखोरों पर लगाम कसेगी, बल्कि बाजार में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा होगी, जिससे कीमतें नीचे आने के लिए मजबूर होंगी.