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इस योजना के माध्यम से न केवल 50,000 रुपये तक का बिना गारंटी लोन मिल रहा है, बल्कि 30,000 रुपये की सीमा वाला यूपीआई लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड भी दिया जा रहा है.
केंद्र सरकार की ओर से समाज के हर तबके को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए कई बेहतरीन योजनाएं चलाई जा रही हैं. इनका मकसद सिर्फ लोगों को आर्थिक मदद देना ही नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है. इन्हीं में से एक पहल है- 'प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि', जिसे हम सब 'पीएम स्वनिधि योजना' के नाम से ज्यादा जानते हैं.
यह योजना खासतौर पर हमारे आसपास रोजमर्रा का सामान बेचने वाले रेहड़ी-पटरी और स्ट्रीट वेंडर्स भाइयों-बहनों के लिए तैयार की गई है. अक्सर छोटे दुकानदारों और वेंडर्स को अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए पैसों की तंगी से जूझना पड़ता है.
किसी भी बैंक से लोन लेने जाओ तो गांरटी या गिरवी रखने के लिए संपत्ति मांगी जाती है. पीएम स्वनिधि इसी मुश्किल को आसान बनाती है. इस योजना के जरिए सरकार बिना किसी गारंटी के बहुत ही आसान शर्तों पर लोन मुहैया कराती है, ताकि छोटे कारोबारी अपने काम-धंधे को बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ा सकें.
योजना का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि जैसे-जैसे आप लोन चुकाते जाते हैं, आपकी लोन की राशि बढ़ती जाती है. यह पूरी प्रक्रिया तीन अलग-अलग चरणों में बंटी हुई है-
इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण सिर्फ लोन ही नहीं, बल्कि क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी है. जो दुकानदार दूसरे चरण का लोन बिना किसी चूक के सही समय पर चुका देते हैं या तीसरे चरण का लोन ले चुके हैं, उनके लिए सरकार ने एक खास सहूलियत दी है. ऐसे वेंडर्स 30,000 रुपये तक की लिमिट वाले यूपीआई से जुड़े 'रुपे क्रेडिट कार्ड' के लिए अप्लाई कर सकते हैं.
इस क्रेडिट कार्ड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर आप समय पर अपने बिलों का भुगतान करते हैं, तो आपको 20 से लेकर 50 दिनों तक बिना किसी ब्याज के पैसा इस्तेमाल करने की छूट मिलती है यानी एक तरह से आपके पास हर वक्त अपनी दुकान के सामान के लिए इमरजेंसी फंड मौजूद रहता है.
सरकार चाहती है कि रेहड़ी-पटरी वाले भी देश के डिजिटल दौर से पूरी तरह जुड़ें. इसलिए जो दुकानदार कैश की जगह डिजिटल पेमेंट, जैसे क्यूआर कोड या यूपीआई से खरीदारी या बिक्री करते हैं, उन्हें बढ़ावा देने के लिए सरकार की तरफ से 1,600 रुपये तक का कैशबैक भी दिया जाता है. इससे छोटे व्यापारियों में वित्तीय समझ बढ़ती है और उन्हें तकनीक का इस्तेमाल करने का फायदा भी सीधे मिलता है.
अगर आप भी इस योजना का फायदा उठाना चाहते हैं, तो कुछ बुनियादी बातें ध्यान में रखनी होंगी.
क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनियों और बैंकों के लिए सरकार ने सख्त और साफ दिशा-निर्देश तय किए हैं. जब आप स्वनिधि पोर्टल पर आवेदन करते हैं, तभी आपसे बिल चुकाने के लिए सहमति ले ली जाती है. इसके तहत कार्ड मिलते ही बिल के पेमेंट के लिए 'ऑटो-डेबिट' सुविधा अपने आप चालू हो जाएगी.
इसका मतलब है कि आपके बैंक खाते से बिल की रकम तय समय पर खुद कट जाएगी, जिससे लेट फीस या पेनाल्टी से बचाव होगा. अगर कोई वेंडर्स इसे बंद करके किसी दूसरे तरीके से भुगतान करना चाहता है, तो उसे खुद इस विकल्प को बदलना होगा. पीएम स्वनिधि योजना छोटे दुकानदारों को ब्याज के चक्रव्यूह से निकालकर तरक्की के रास्ते पर ले जाने का एक मजबूत जरिया बन चुकी है.